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तलाक मामले में 'प्रोसीजर फेल': पटना हाई कोर्ट ने दिया फैमिली कोर्ट को फिर से सुनवाई करने का आदेश

Published: Wed, 29 Apr 2026 07:10 PM (IST)

पटना हाई कोर्ट ने मुजफ्फरपुर के एक तलाक मामले में फैमिली कोर्ट के फैसले को रद कर दिया। अदालत ने ...और पढ़ें

पटना हाई कोर्ट ने दिया फैमिली कोर्ट को फिर से सुनवाई करने का आदेश (AI Generated Image)

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विधि संवाददाता, पटना। पटना हाई कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले से स्पष्ट किया कि वैवाहिक विवादों में आधे-अधूरे विश्लेषण पर न्याय नहीं हो सकता। मुजफ्फरपुर के एक पुराने तलाक विवाद में अदालत ने फैमिली कोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए पूरे मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए वापस भेज दिया।

न्यायाधीश नानी तागिया और न्यायाधीश आलोक कुमार पांडेय की खंडपीठ ने अजय कुमार की अपील पर फैसला पारित करते हुए परिवार न्यायालय की कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणी की।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मामले में कानूनी प्रक्रिया का समुचित पालन नहीं हुआ। खास तौर पर हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत तलाक के आधार- क्रूरता, परित्याग आदि पर न तो स्पष्ट मुद्दे तय किए गए और न ही साक्ष्यों का समग्र मूल्यांकन किया गया।

क्या है मामला?

वर्ष 2017 में फैमिली कोर्ट, मुजफ्फरपुर ने पति की तलाक याचिका को खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ हाई कोर्ट में अपील दायर की गई।

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पाया कि निचली अदालत ने गवाहों के बयान, पक्षकारों के आरोप-प्रत्यारोप और उपलब्ध साक्ष्यों का संतुलित विश्लेषण नहीं किया, जिससे निर्णय “अस्पष्ट और त्रुटिपूर्ण” हो गया।

खंडपीठ ने यह भी कहा कि जब रिकॉर्ड में यह संकेत हो कि दोनों पक्ष साथ रहने को इच्छुक नहीं हैं, तो इस महत्वपूर्ण पहलू की अनदेखी न्यायिक चूक है। हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह छह महीने के भीतर नए सिरे से सुनवाई पूरी करे और सभी कानूनी बिंदुओं पर स्पष्ट मुद्दे तय कर निर्णय दे।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले का निपटारा सुप्रीम कोर्ट के रजनीश बनाम नेहा (2021) और अदिति उर्फ मिठी बनाम जितेश शर्मा (2023) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया जाए, जिसमें आय, संपत्ति और देनदारियों का पूरा ब्योरा देना अनिवार्य है।