पटना, स्‍टेट ब्‍यूरो। पटना हाईकोर्ट ने मंगलवार को नियोजित शिक्षकों के हित में एक बड़ा आदेश पारित किया है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को चार महीने के अंदर सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं की तरह ही नियोजित शिक्षकों को भी सारी सुविधाएं देने का निर्देश दिया है। यदि हाईकोर्ट के आदेश का पालन कर लिया जाता है तो करीब चार लाख शिक्षकों को बड़ा फायदा होगा।

न्यायाधीश डॉ. अनिल कुमार उपाध्याय की एकलपीठ ने टीइटी-एसटीइटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने पहले ही ठेके पर नियुक्त पंचायत शिक्षकों को राज्य कर्मियों की तरह ही माने जाने के लिए कहा था। अधिवक्ता मुकेश कुमार ने याचिकाकर्ताओं की तरफ से कहा कि नियोजित शिक्षकों को सरकारी कर्मचारियों की तरह माना जाता है, लेकिन सारी सुविधाएं राज्य कर्मचारियों की भांति नहीं दी जाती हैं।

उल्लेखनीय है कि शिक्षकों को सरकारी कर्मचारी मान लिया जाएगा तो रूल-रेगुलेशन व वेतन आदि सब सरकारी कर्मचारियों की भांति हो जाएंगे। इसमें कोई संदेह नहीं कि नियोजित शिक्षक राज्य के कर्मचारियों की तरह ही कार्य करते हैं। इसके बावजूद सरकार इन शिक्षकों से दोयम दर्जे का व्यवहार करती है।

मालूम हो कि 2014 में बड़ी संख्या में नियोजित शिक्षकों की बहाली हुई थी। 2006 में उन्हें शिक्षा मित्र कहा जाता था। बाद में 2010 में शिक्षक पात्रता परीक्षा लागू कर दी गई। इसके बाद भी वे नियोजित शिक्षक ही कहे जाते हैं। इसपर कोर्ट ने कहा कि मुख्य सचिव को चार महीने में उनके आवेदन पर गंभीरता से सोचना चाहिए। इसमें दो मत नहीं है कि अपील इन शिक्षकों के हित में पारित हुआ था।

Posted By: Amit Alok

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