विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

पटना हाई कोर्ट में हाई-वोल्टेज ड्रामा, महाधिवक्ता ने सुनवाई से खुद को किया अलग; 3 विभागों के सचिव तलब

Published: Thu, 10 Sep 2026 10:08 PM (IST)

पटना हाई कोर्ट में बिहार न्यायिक अकादमी से जुड़ी जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हाई-वोल्टेज ड्रामा हुआ, जब राज्य ...और पढ़ें

पटना हाई कोर्ट में हाई-वोल्टेज ड्रामा, महाधिवक्ता ने सुनवाई से खुद को किया अलग; 3 विभागों के सचिव तलब

पटना हाई कोर्ट में हाई-वोल्टेज ड्रामा, महाधिवक्ता ने सुनवाई से खुद को किया अलग; 3 विभागों के सचिव तलब

HighLights

  1. अदालत में बिना रिकॉर्ड दलीलों पर महाधिवक्ता ने खुद को अलग किया।

  2. महात्मा गांधी सेतु विकास कार्य में देरी पर अदालत ने नाराजगी जताई।

  3. तीन विभागों के सचिवों को एकीकृत कार्ययोजना के साथ तलब किया।

विधि संवाददाता, पटना। पटना हाई कोर्ट में बिहार न्यायिक अकादमी से जुड़ी लोकहित याचिका की सुनवाई के दौरान गुरुवार को अदालत कक्ष में एक अभूतपूर्व और हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला।

कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश सुधीर सिंह और न्यायाधीश राजेश कुमार वर्मा की पीठ के समक्ष राज्य सरकार के वकीलों द्वारा बिना रिकॉर्ड के दी गई दलीलों से नाराज अदालत ने तीखी टिप्पणी की, जिसके बाद राज्य के महाधिवक्ता एस.डी. संजय ने खुद को इस मामले से अलग कर लिया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने बिहार सरकार के पथ निर्माण विभाग, वन विभाग और नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिवों को शुक्रवार (11 सितंबर) सुबह 10:30 बजे व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होने का कड़ा आदेश जारी किया है।

अदालत में क्या हुआ?

सुनवाई के दौरान एएजी 3 (अपर महाधिवक्ता 3)पी.के. वर्मा ने दावा किया कि महात्मा गांधी सेतु के नीचे के क्षेत्र के विकास के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्रमंडल द्वारा हलफनामा दायर किया गया है। जब पीठ ने उन्हें रिकॉर्ड जांचने को कहा, तो पूरी फाइल खंगालने के बाद भी ऐसा कोई हलफनामा नहीं मिला।

अदालत द्वारा बिना रिकॉर्ड की दलीलों पर आपत्ति जताने पर महाधिवक्ता एस.डी. संजय ने मामले से हटने का फैसला कर लिया।

इस पर हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि बिहार न्यायिक अकादमी और न्याय प्रणाली से जुड़े इतने संवेदनशील लोकहित याचिका में बिना हलफनामे के दलीलें दी जा रही हैं। जब अदालत ने रिकॉर्ड से इसका मिलान चाहा, तो महाधिवक्ता ने खुद को अलग कर लिया।

अदालत ने याद दिलाया कि 3 जून 2026 के आदेश में महात्मा गांधी सेतु के नीचे घेराबंदी और पौधारोपण का काम 30 जून 2026 तक पूरा करने का आश्वासन दिया गया था, जिसका अब तक पालन नहीं हुआ है।

वन प्रमंडल पदाधिकारी (पटना पार्क डिवीजन) के हलफनामे के अनुसार, अतिक्रमण हटाए गए स्थल पर पार्क निर्माण का प्रस्ताव नगर विकास एवं आवास विभाग को प्रशासनिक स्वीकृति और फंड के लिए भेजा गया है।

वहीं, पथ निर्माण विभाग ने बताया कि बाउंड्री वॉल के लिए री-टेंडर जारी किया गया है और दो महीने में काम पूरा कर लिया जाएगा।

याचिकाकर्ता बिहार न्यायिक अकादमी की ओर से अधिवक्ता पीयूष लाल ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के हलफनामे केवल उत्तरी दीवार से संबंधित हैं, जबकि पूर्वी हिस्से और पुल के नीचे के विकास पर कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया है।

इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि यह याचिका किसी प्रतिद्वंद्वी मुकदमेबाजी का हिस्सा नहीं है, बल्कि न्याय प्रशासन की सुरक्षा और वातावरण में सुधार के लिए है। पूर्व आदेशों का पालन न होने और विभागों के बीच सामंजस्य की कमी को देखते हुए अब तीनों विभागों के सचिवों को शुक्रवार को सुबह एकीकृत कार्ययोजना और समय-सीमा के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।

यह भी पढ़ें- 21 साल जेल में रहा निर्दोष, 16 साल अपील तक नहीं कर सका; पटना हाई कोर्ट ने पुलिस जांच को बताया 'फर्जी'

यह भी पढ़ें- बिहार में पंचायत चुनाव कब, हाई कोर्ट ने सरकार और आयोग से मांगा जवाब