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'बच्चों की इच्छा और कल्याण सर्वोपरि', पटना हाई कोर्ट ने मां से लेकर पिता को सौंपी कस्टडी

Published: Wed, 09 Sep 2026 07:51 PM (IST)

पटना हाई कोर्ट ने नाबालिग बच्चों की कस्टडी के मामले में बच्चों के कल्याण और उनकी इच्छा को सर्वोपरि बताया। ...और पढ़ें

पटना हाई कोर्ट ने बच्चों के कल्याण को प्राथमिकता दी, पिता को मिली कस्टडी

पटना हाई कोर्ट ने बच्चों के कल्याण को प्राथमिकता दी, पिता को मिली कस्टडी

HighLights

  1. बच्चों का कल्याण और उनकी इच्छा कस्टडी में सर्वोपरि।

  2. पटना हाई कोर्ट ने पिता को सौंपी नाबालिग बच्चों की कस्टडी।

  3. मां को बच्चों से मिलने और बात करने का अधिकार बरकरार।

विधि संवाददाता, पटना। पटना हाई कोर्ट ने नाबालिग बच्चों की कस्टडी के मामले में कहा कि बच्चों का कल्याण और उनकी इच्छा सर्वोपरि है। कोर्ट ने जहानाबाद परिवार न्यायालय के आदेश को रद करते हुए दोनों बच्चों की कस्टडी मां से वापस लेकर पिता को सौंप दी। साथ ही मां को बच्चों से मिलने और उनसे बातचीत करने का पूरा अधिकार दिया है।

न्यायाधीश बिबेक चौधरी और न्यायाधीश राणा विक्रम सिंह की खंडपीठ ने शक्ति किशोर की याचिका पर सुनवाई की। दंपती की शादी 2011 में हुई थी और अगस्त 2018 से दोनों अलग रह रहे हैं। उस समय बेटी करीब ढाई वर्ष और बेटा आठ माह का था।

इसके बाद दोनों बच्चे पिता और उसके परिवार के साथ रह रहे थे। जहानाबाद परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश ने छह सितंबर 2024 को मां की अर्जी स्वीकार कर बच्चों की कस्टडी उन्हें देने और पिता को मिलने का अधिकार देने का आदेश दिया था। इसे पिता ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

हाई कोर्ट ने कहा कि हिंदू अल्पवयस्कता और संरक्षकता कानून की धारा 13 के तहत बच्चे का कल्याण सबसे महत्वपूर्ण आधार है। केवल कानूनी अधिकार के आधार पर कस्टडी का दावा नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने कहा कि बच्चे कई वर्षों से पिता के साथ रह रहे हैं, वहीं पढ़ाई कर रहे हैं और बातचीत में भी पिता के साथ रहने की इच्छा जता चुके हैं। उनकी स्थिर पढ़ाई और सामाजिक माहौल को देखते हुए कस्टडी पिता के पास रखना उचित है।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि पिता बच्चों की मां से मुलाकात और बातचीत में सहयोग करेंगे। दोनों माता-पिता बच्चों के सामने एक-दूसरे के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।

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