पटना, जेएनएन। बिहार में चुनाव से पहले 94 हजार प्राइमरी शिक्षकों की नियुक्ति पर ग्रहण लग गया है। राजधानी में हाइकोर्ट ने प्राइमरी स्कूलों में बड़े पैमाने पर शिक्षकों की बहाली प्रक्रिया मामले पर सुनवाई की। कोर्ट ने इस पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया। नीरज कुमार और अन्य की रिट याचिकाओं पर जस्टिस अनिल कुमार उपाध्याय ने मामले पर सुनवाई की। CTET पास अभ्यर्थियों को मौका नहीं देने का मामला।

पटना हाईकोर्ट ने प्राइमरी स्कूलों में करीब 94 हजार शिक्षकों की बहाली प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने राज्य सरकार को चार सितंबर तक यह बताने को कहा है कि क्या नियुक्ति के मापदंड में परिवर्तन किया जा सकता है। न्यायाधीश अनिल कुमार उपाध्याय की एकलपीठ ने नीरज कुमार एवं दर्जनों याचिकाओं की बुधवार को सुनवाई करते हुए उक्त आदेश दिया।

अदालत ने कहा कि 2019 के प्रारंभिक शिक्षक नियोजन प्रक्रिया की अंतिम चयन सूची जारी करना गलत होगा। 15 जून से 31 अगस्त तक 50 हजार से अधिक प्रारंभिक शिक्षकों के नियोजन कार्यक्रम में हस्तक्षेप करते हुए राज्य सरकार को यह भी आदेश दिया कि उक्त नियोजन कार्यक्रम की अंतिम चयन सूची कोई भी नियोजन ईकाई जारी नहीं करेगी। याचिकाकर्ता के वकील दीनू कुमार एवं रीतिका रानी ने सम्मिलित रूप से कोर्ट को बताया कि यह नियोजन कार्यक्रम 2019 का ही है।

एनसीटीई से मान्यता प्राप्त संस्थानों से जो सेवा में लगे जिन शिक्षकों ने 18 महीने का डीएलएड कोर्स पास किया था, उन्हें भी इस नियोजन कार्यक्रम में आवेदन देने का अधिकार दिया गया है। इस विज्ञापन के अनुसार जो अभ्यर्थी टीइटी एसटीइटी, डीएलएड पास हैं, वे 15 जून 2020 से लेकर 14 जुलाई 2020 तक आवेदन दे सकते हैं। 

विदित हो कि उन प्राइमरी स्कूलों के शिक्षको की नियुक्ति होने वाली थी जिन्हें कक्षा 1 से 5 एवं कक्षा 6-8 के बच्चों को पढ़ाना था। यह चयन प्रक्रिया वर्ष 2012 से लेकर 2019-20 तक की है, जिसको लेकर याचिकाकर्ता की ओर से ऐतराज जाहिर किया गया। अधिवक्ताओं का कहना था कि 2012  और 2019-20 में निकाले गए विज्ञापन में समानता नहीं लाई जा सकती। 

Posted By: Kajal Kumari

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