DM साहब, फैसला तथ्यों और कानून पर होना चाहिए; सीतामढ़ी जिलाधिकारी के आदेश पर पटना हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी
पटना हाईकोर्ट ने सीतामढ़ी के जिलाधिकारी द्वारा एक शिकायतकर्ता (डॉ. देवनारायण झा) के खिलाफ की गई व्यक्तिगत और आपत्तिजनक टिप्पणी पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है।

पटना हाईकोर्ट ने डीएम की टिप्पणी पर जताई नाराजगी। फाइल
विधि संवाददाता, पटना। पटना हाईकोर्ट ने सीतामढ़ी के जिलाधिकारी-सह-द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी द्वारा एक शिकायतकर्ता के खिलाफ की गई व्यक्तिगत और आपत्तिजनक टिप्पणी पर कड़ी नाराजगी जताई है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अर्ध-न्यायिक प्राधिकारी को मामले का फैसला तथ्यों और कानून के आधार पर करना चाहिए। किसी वादी के चरित्र, नैतिकता या व्यक्तिगत पृष्ठभूमि पर असंबंधित टिप्पणी करना अधिकार का दुरुपयोग है।
जिलाधिकारी ने डॉ. देवनारायण झा के बारे में की थी टिप्पणी
न्यायाधीश आलोक कुमार ने संस्कृत के विद्वान और पूर्व विश्वविद्यालय कुलपति डॉ. देव नारायण झा की याचिका पर सुनवाई करते हुए जिलाधिकारी के 25 फरवरी 2023 के आदेश में की गई व्यक्तिगत टिप्पणियों को आदेश से हटा दिया।
मामला गांव में सरकारी योजना के तहत बने नाले के जाम होने और उसके पानी से कृषि भूमि प्रभावित होने की शिकायत से जुड़ा था। शिकायत पर अधिकारियों की रिपोर्ट के बाद नाले की मरम्मत का निर्देश दिया गया था।
बाद में अपील खारिज करते हुए जिलाधिकारी ने डॉ. झा के बारे में टिप्पणी की थी कि उनमें आसपास रहने वाले एससी-एसटी समुदाय के लोगों को परेशान करने की मानसिकता प्रतीत होती है।
टिप्पणी को बताया निष्पक्षता के मूल सिद्धांत के विपरीत
हाईकोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत चरित्र पर इस तरह की टिप्पणियां न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता के मूल सिद्धांत के विपरीत हैं।
कोर्ट ने एएम माथुर बनाम प्रमोद कुमार गुप्ता मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का हवाला देते हुए संयमित भाषा के महत्व को रेखांकित किया।
हालांकि, नाले से जुड़े मूल प्रशासनिक आदेश में कोर्ट ने हस्तक्षेप नहीं किया। भौतिक जांच में याचिकाकर्ता की जमीन पर जलजमाव नहीं मिलने की रिपोर्ट को देखते हुए उस हिस्से में हस्तक्षेप से इनकार किया गया।
यह भी पढ़ें- जज साहब ही भूल गए कानून? पटना हाई कोर्ट की ADJ को फटकार, कहा- आपको दोबारा ट्रेनिंग पर भेज दें
