खनन लीज आवंटन में मनमानी पर पटना हाई कोर्ट की फटकार, सरकार और ठेकेदारों लिए 7 नए निर्देश जारी
पटना हाई कोर्ट ने खनन पट्टा आवंटन में राज्य सरकार की कार्यशैली पर कड़ा रुख अपनाते हुए शेखपुरा मामले में सरकार और ठेकेदार दोनों को जिम्मेदार ठहराया है।
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सांकेतिक तस्वीर
HighLights
खनन पट्टा आवंटन में सरकार-ठेकेदार दोनों को जिम्मेदार ठहराया।
जब्त 2.90 करोड़ रुपये 12% ब्याज सहित लौटाने का आदेश।
भविष्य की देरी रोकने हेतु 7 सूत्रीय दिशा-निर्देश जारी।
विधि संवाददाता, पटना। पटना हाई कोर्ट के न्यायाधीश बिबेक चौधरी एवं न्यायाधीश राणा विक्रम सिंह की खंडपीठ ने खनन पट्टा आवंटन के एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार की कार्यशैली पर कड़ा रुख अपनाया है।
अदालत ने शेखपुरा जिले के स्टोन ब्लाक नंबर 27 के आवंटन और जब्ती से जुड़े मामले में माना कि लीज निष्पादन में देरी के लिए राज्य सरकार और ठेकेदार दोनों समान रूप से जिम्मेदार हैं।
कोर्ट ने जिला प्रशासन द्वारा जब्त की गई 2.90 करोड़ की राशि को 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ ठेकेदार को वापस लौटाने का आदेश दिया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक अनुबंधों और टेंडरों में प्रशासनिक शक्तियों का मनमाना उपयोग नहीं हो सकता।
हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को इस आदेश की प्रति भेजकर इन दिशा निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है।
साथ ही, भविष्य में ऐसी प्रशासनिक देरी और राजस्व के नुकसान को रोकने के लिए अदालत ने राज्य सरकार को स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किए हैं।
अदालत द्वारा जारी प्रमुख दिशा निर्देश
- खनन ब्लाक के टेंडर नोटिस के साथ ही जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी की जानी चाहिए।
- सर्वेक्षण रिपोर्ट में प्रत्येक ब्लाक का अक्षांश और देशांतर तथा अन्य सभी भौगोलिक जानकारी अलग-अलग स्पष्ट रूप से दर्ज होनी चाहिए।
- नीलामी की तारीख से 15 दिनों के भीतर लेटर आफ इंटेंट प्रकाशित किया जाएगा।
- सफल बोलीदाता को लेटर आफ इंटेंट प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर अपना माइनिंग प्लान जमा करना अनिवार्य होगा।
- सक्षम प्राधिकारी द्वारा माइनिंग प्लान जमा करने की तिथि से 15 दिनों के अंदर उसे मंजूरी दी जाएगी।
- माइनिंग प्लान मंजूर होने के 7 दिनों के भीतर सफल बोलीदाता को राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण के समक्ष पर्यावरणीय स्वीकृति हेतु आवेदन करना होगा।
- यदि संबंधित सरकारी विभाग आवश्यक दस्तावेज/सूचना समय पर उपलब्ध कराने में विफल रहता है, तो इसे सरकार की ओर से लापरवाही माना जाएगा और राज्य सरकार को नुकसान का हर्जाना देना होगा।
