'चंदा मामा दूर के' में छपे एक शब्द पर बवाल, पटना हाई कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब; 13 अक्टूबर को अगली सुनवाई
एनसीईआरटी की कक्षा एक की हिंदी पाठ्यपुस्तक 'सारंगी' में 'चंदा मामा दूर के' कविता में आपत्तिजनक शब्द के मुद्रण को ...और पढ़ें

कविता की एक पंक्ति में छपी प्रिंटिंग त्रुटि
HighLights
एनसीईआरटी की 'चंदा मामा दूर के' कविता पर विवाद।
पटना हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर, केंद्र से जवाब मांगा।
कविता में आपत्तिजनक शब्द के मुद्रण पर सवाल उठे।
विधि संवाददाता, पटना। एनसीईआरटी की कक्षा एक की हिंदी पाठ्यपुस्तक ‘सारंगी (भाग-01)’ में प्रकाशित प्रसिद्ध बाल कविता ‘चंदा मामा दूर के’ में कथित आपत्तिजनक शब्द के मुद्रण को लेकर पटना हाईकोर्ट में लोकहित याचिका दायर की गई है। मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश वी. कामेश्वर राव और न्यायाधीश सुधीर सिंह की खंडपीठ ने केंद्र सरकार और संबंधित विभागों से जवाब मांगा है।
कविता की एक पंक्ति में छपी प्रिंटिंग त्रुटि
याचिकाकर्ता सौमित्र शंकर, निवासी मुसल्लहपुर, पटना ने याचिका में कहा है कि कविता की दूसरी पंक्ति में गलत शब्द के मुद्रण से महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचती है और बच्चों पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
याचिका के अनुसार, संबंधित पंक्ति में ‘पूआ पकाएं गुड़ के’ होना चाहिए था, लेकिन ‘गुड़’ के स्थान पर एक आपत्तिजनक शब्द मुद्रित हो गया।
कोर्ट ने सुधारात्मक कदम पर मांगी रिपोर्ट
खंडपीठ ने मामले में संबंधित प्रतिवादियों से जवाब मांगा है। कोर्ट ने सुधारात्मक कदम उठाने और इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय भी दिया है। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
पाठ्यपुस्तक में छपी गलती बनी याचिका का आधार
याचिका में पाठ्यपुस्तक में प्रकाशित इस शब्द को लेकर आपत्ति जताई गई है। फिलहाल हाईकोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार और संबंधित विभागों का पक्ष मांगा है। अगली सुनवाई में इस मामले में दाखिल जवाब और रिपोर्ट पर सुनवाई होगी।
