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मैट्रिमोनियल साइट पर शादी, फिर खुला राज; पटना हाई कोर्ट से सास-ससुर और पहली पत्नी को मिली राहत

Published: Tue, 13 Oct 2026 03:09 PM (IST)

पटना हाई कोर्ट ने एक धोखाधड़ी और फर्जी शादी के मामले में मुख्य आरोपी अमित कुमार राय के माता-पिता और ...और पढ़ें

पटना हाई कोर्ट

पटना हाई कोर्ट

HighLights

  1. पटना हाई कोर्ट ने धोखाधड़ी मामले में परिवार को राहत दी।

  2. माता-पिता और पहली पत्नी के खिलाफ सबूत नहीं मिले।

  3. मुख्य आरोपी अमित राय का मामला अलग से चलेगा।

विधि संवाददाता, पटना। बिहार की एक युवती के साथ कथित धोखाधड़ी और फर्जी शादी के मामले में पटना हाई कोर्ट ने आरोपित अमित कुमार राय के माता-पिता और पहली पत्नी को राहत दी है। न्यायाधीश सोनी श्रीवास्तव की अदालत ने उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही निरस्त कर दी।

कोर्ट ने कहा कि इन तीनों के खिलाफ लगाए गए आरोप सामान्य प्रकृति के हैं और उनकी संलिप्तता साबित करने के लिए कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया है। मामला सहरसा से जुड़ा है।

जीवनसाथी डॉट कॉम पर संपर्क, खुद को बताया था अविवाहित

शिकायतकर्ता मौसम राज के अनुसार, उन्होंने जीवनसाथी डॉट कॉम के माध्यम से अमित कुमार राय से संपर्क किया था। आरोप है कि अमित ने खुद को अविवाहित और बिहार पुलिस में सब-इंस्पेक्टर बताया।

इसके बाद 22 जून 2022 को समस्तीपुर के विद्यापति धाम मंदिर में दोनों की शादी हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि शादी के नाम पर परिवार से लाखों रुपये, गहने और अन्य सामान लिए गए।

बाद में पहली शादी और दो बच्चों की जानकारी मिलने का आरोप

शिकायतकर्ता का आरोप है कि बाद में उन्हें पता चला कि अमित पहले से शादीशुदा है और उसके दो बच्चे हैं। यह भी आरोप लगाया गया कि अमित बिहार पुलिस में सब-इंस्पेक्टर नहीं है।

इसके बाद मामले में अमित के साथ उसके पिता इंद्रजीत राय, मां पुष्पा देवी और पहली पत्नी मीरा देवी को भी आरोपी बनाया गया। शिकायत में शादी से जुड़ी जानकारी छिपाने और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए थे।

कोर्ट ने कहा, परिवार के खिलाफ नहीं है ठोस साक्ष्य

हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि मुख्य आरोप अमित कुमार राय के खिलाफ हैं। उसके माता-पिता और पहली पत्नी की किसी विशिष्ट भूमिका का ठोस साक्ष्य नहीं दिखाया गया है।

कोर्ट ने यह भी गौर किया कि अमित के पिता इंद्रजीत राय घटना के दिन झारखंड में ड्यूटी पर थे। अदालत के अनुसार, केवल परिवार का सदस्य होने के आधार पर किसी को आपराधिक मामले में जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

दूसरी शादी से जुड़े आरोपों पर भी उठे कानूनी सवाल

कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 495 और 496 के तहत लगाए गए आरोपों पर संज्ञान लेने की कानूनी वैधता पर भी सवाल उठाए। ये धाराएं पहली शादी छिपाकर दूसरी शादी करने और कपटपूर्ण विवाह से संबंधित हैं।

अदालत ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के न्यायनिर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि आपराधिक जिम्मेदारी तय करने के लिए आरोपित व्यक्ति की भूमिका से जुड़े पर्याप्त आधार होने चाहिए।

संज्ञान और डिस्चार्ज आदेश किए निरस्त

हाई कोर्ट ने सास पुष्पा देवी, ससुर इंद्रजीत राय और पहली पत्नी मीरा देवी के खिलाफ पारित एक मई 2023 के संज्ञान आदेश तथा 10 सितंबर 2026 के डिस्चार्ज से जुड़े आदेश को निरस्त कर दिया।

इस फैसले से इन तीनों के खिलाफ संबंधित आपराधिक कार्यवाही समाप्त हो गई है। मामले में मुख्य आरोपित अमित कुमार राय के संबंध में राहत के दायरे को अदालत के आदेश के अनुसार अलग से देखा जाएगा।