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इतिहास-भूगोल के अस‍िस्‍टेंट प्रोफेसर पदों पर नियुक्ति का रास्‍ता साफ, पटना हाईकोर्ट ने बदला एकलपीठ का आदेश

Published: Mon, 12 Oct 2026 08:01 PM (IST)

पटना उच्च न्यायालय ने बिहार के विश्वविद्यालयों में इतिहास और भूगोल विषयों में सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त किया है।

सहायक प्रोफेसर पद पर न‍ियुक्‍त‍ि का रास्‍ता साफ।

सहायक प्रोफेसर पद पर न‍ियुक्‍त‍ि का रास्‍ता साफ।

विधि संवाददाता, पटना। बिहार के विश्वविद्यालयों में इतिहास और भूगोल विषयों में सहायक प्रोफेसर के पदों पर नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है।

मुख्य न्यायाधीश वी. कामेश्वर राव और न्यायाधीश हरीश कुमार की खंडपीठ ने 20 फरवरी 2025 के एकलपीठ के आदेश को रद करते हुए 26 रिट याचिकाओं को पुनर्जीवित कर दिया है।

इस फैसले से बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग द्वारा जारी 2020 की विज्ञापन प्रक्रिया को बिना किसी अनिश्चितता के आगे बढ़ाने और नियमानुसार नियुक्तियां पूरी करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

क्या था मामला?

बिहार के विभिन्न विश्वविद्यालयों में इतिहास, भूगोल समेत अन्य विषयों में सहायक प्रोफेसरों के हजारों पदों पर भर्ती के लिए 21 सितंबर 2020 को विज्ञापन निकाला गया था।

हालांकि, दस्तावेज सत्यापन, श्रेणी-वार कट-ऑफ और अभ्यर्थियों की पात्रता को लेकर उत्पन्न कानूनी अड़चनों के कारण प्रक्रिया लंबी खींच गई।

20 फरवरी 2025 को एकलपीठ ने आयोग को निर्देश दिया था कि वह अंतरिम रूप से याचिकाकर्ताओं को साक्षात्कार में शामिल करे। इसके खिलाफ बीएसयूएससी ने लेटर्स पेटेंट अपील दायर की थी।

आयोग की दलील थी कि बिना किसी उम्मीदवार की पात्रता का सही से निर्धारण किए और बिना अपना पक्ष (जवाबी हलफनामा) रखे साक्षात्कार का निर्देश देने से पूरी चयन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

पात्रता पर पक्ष रखने का म‍िले पर्याप्‍त मौका 

अपील की सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने माना कि आयोग को प्रत्येक उम्मीदवार की पात्रता पर अपना पक्ष रखने का पर्याप्त मौका मिलना चाहिए ताकि कानूनी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे।

अदालत ने आयोग को 3 सप्ताह के भीतर अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने और उसके बाद अभ्यर्थियों को 1 सप्ताह में प्रत्युत्तर देने का समय दिया है।

इससे कानूनी अड़चनें तय समय में समाप्त होंगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफेसरों के पदों पर की जाने वाली नियुक्तियां याचिकाओं के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी।

इसका मतलब है कि चयन और नियुक्ति की कार्यवाही अब बिना रुके आगे बढ़ सकती है। मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 तय की गई है और पक्षों को एकल पीठ से त्वरित सुनवाई का अनुरोध करने की छूट दी गई है, जिससे प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न हो।