FIR की टाइमिंग से लेकर गवाहों के बयान तक, प्रदीप महतो को पटना हाईकोर्ट ने किया बरी
पटना हाईकोर्ट ने सुखो सदा हत्याकांड में दोषी प्रदीप महतो को बरी कर दिया है। कोर्ट ने अभियोजन की कहानी, ...और पढ़ें

HighLights
पटना हाईकोर्ट ने प्रदीप महतो को सुखो सदा हत्याकांड में बरी किया।
कोर्ट ने अभियोजन की कहानी और गवाहों के बयानों पर संदेह जताया।
एफआईआर की समयावली पर सवाल, संदेह का लाभ मिला।
विधि संवाददाता, पटना। सुखो सदा हत्याकांड में दोषसिद्ध प्रदीप महतो को पटना हाईकोर्ट ने बरी कर दिया। न्यायाधीश संजय कुमार सिंह और न्यायाधीश अंशुल की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया है।
इसके साथ कोर्ट ने आईपीसी की धारा 302 और शस्त्र अधिनियम की धारा 27 के तहत हुई दोषसिद्धि एवं सजा निरस्त कर दी।
कोर्ट ने अभियोजन की कहानी, की स्वाभाविकता और विवेचना की प्रक्रिया को समग्र रूप से परखने के बाद मामले में गंभीर संदेह पाया।
प्रत्यक्षदर्शियों के बयान से दावा कमजोर
अभियोजन के अनुसार विवाद के बाद प्रदीप महतो ने ताड़ के पेड़ के पास सुखो सदा की गोली मारकर हत्या कर दी थी। लेकिन जिन गवाहों को प्रत्यक्षदर्शी बताया गया, उनके बयान ही इस दावे को मजबूती नहीं दे सके।
गवाह सत्तन सदा,अशोक सदा और एतवारी सदा के बयानों से घटना को प्रत्यक्ष देखने की पुष्टि नहीं हुई। सूचक पवन सदा के प्रत्यक्षदर्शी होने के दावे को भी अन्य साक्ष्यों से पर्याप्त समर्थन नहीं मिला।
एफआईआर के समय पर भी कोर्ट ने उठाया सवाल
कोर्ट ने पाया कि मृतक की पत्नी खखरी देवी घटना की सूचना पर घटनास्थल पहुंची थी और पुलिस ने उसका बयान लिया था, लेकिन उसे अभियोजन गवाह के रूप में पेश नहीं किया गया और उसका औपचारिक बयान भी रिकॉर्ड पर नहीं लाया गया।
सबसे महत्वपूर्ण सवाल एफआईआर की समयावली पर उठा। एफआईआर रात 11 बजे दर्ज बताई गई, जबकि शाम 5:45 बजे तैयार इनक्वेस्ट रिपोर्ट में पहले से एफआईआर नंबर दर्ज था।
एफआईआर को मजिस्ट्रेट तक पहुंचने में हुई देरी को भी अन्य परिस्थितियों के साथ देखा गया। खंडपीठ ने कहा कि इन सभी परिस्थितियों को अलग-अलग तकनीकी खामियां मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
समग्र साक्ष्य अभियोजन के मामले पर गंभीर संदेह पैदा करते हैं। संदेह का लाभ देते हुए कोर्ट ने प्रदीप महतो को बरी कर दिया।
