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पटना में 95 करोड़ का रेल टर्मिनल, 24 महीने बाद भी निर्माण अधूरा; वाशिंग पिट से अटका काम

Published: Wed, 30 Sep 2026 08:47 AM (IST)

हार्डिंग पार्क पैसेंजर टर्मिनल का निर्माण कार्य वाशिंग पिट लाइन के कारण धीमा पड़ गया है, जिससे 24 माह बाद ...और पढ़ें

अधूरा पड़ा हार्ड‍िंंग पार्क टर्मिनल का काम। जागरण

अधूरा पड़ा हार्ड‍िंंग पार्क टर्मिनल का काम। जागरण

HighLights

  1. वाशिंग पिट लाइन हार्डिंग पार्क टर्मिनल निर्माण में मुख्य बाधा।

  2. 24 माह में 10% से भी कम काम, लक्ष्य से पीछे।

  3. परियोजना देरी से पटना जंक्शन दबाव कम करने में चुनौती।

विद्या सागर, पटना। पटना जंक्शन का दबाव कम करने के लिए प्रस्तावित हार्डिंग पार्क पैसेंजर टर्मिनल खुद निर्माण की धीमी रफ्तार में फंस गया है।

टर्मिनल के निर्माण में वाशिंग पिट लाइन सबसे बड़ी बाधा बन गई है। स्थिति यह है कि परियोजना के लिए टेंडर अवार्ड होने के करीब 24 माह बाद भी 10 प्रतिशत काम पूरा नहीं हो सका है।

जबकि प्रारंभिक योजना के अनुसार प्रथम चरण का काम महज 12 माह में पूरा किया जाना था। करीब 95 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना का टेंडर सितंबर 2024 में अवार्ड हुआ था।

12 माह में पूरा होना था प्रथम चरण, अब तय समय भी बीता

इसके बाद निर्माण शुरू हुआ, लेकिन काम की गति बेहद धीमी रही। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 30 मई 2025 को परियोजना का आनलाइन शिलान्यास किया था।

इसके बाद रेलवे ने प्रथम चरण को दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। अब लक्ष्य की समय सीमा नजदीक है और जमीन पर निर्माण की स्थिति इस लक्ष्य पर सवाल खड़े कर रही है।

इस परियोजना के धीमी रफ्तार पूर्व मध्य रेल के तत्कालिन महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह ने बैठक कर 30 अप्रैल 2026 को 10 दिनों में तकनिकी बाधा दूर कर काम तेज करने के निर्देश दिए थे।

इस निर्देश के भी पांच माह बीत गए। लेकिन सिर्फ चहारदीवारी के काम आगे बढ़े। इसके बाद जून में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव जब बिहार दौरे पर पटना पहुंचे तो उन्होंने इस परियोजना के फायदे गिनाए।

उस समय उम्मीद की गई कि अब परियोजना रफ्तार पकड़ेगी। लेकिन समय बीतते जा रहा योजना की प्रगति पर खास असर नहीं दिख रहा।

समय के साथ ही बताया जा रहा है कि अब परियोजना की लागत भी करीब 15 प्रतिशत से अधिक बढ़ गया है। ऐसे समय पर परियोजना न पूरा होने से यात्रियों के सुविधा के साथ रेलवे को भी आर्थिक नुकसान हो रहा है।

वाशिंग पिट लाइन के कारण अटका निर्माण

हार्डिंग पार्क में टर्मिनल विकसित करने के लिए जिस क्षेत्र को निर्माण के लिए तैयार किया जाना है, वहां मौजूद वाशिंग पिट लाइन और उससे जुड़े रेल परिचालन को लेकर काम प्रभावित हो रहा है।

निर्माण एजेंसी को पर्याप्त कार्यक्षेत्र नहीं मिल पाने से कई हिस्सों में काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। रेलवे के सामने एक तरफ मौजूदा रेल परिचालन को बनाए रखने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ टर्मिनल निर्माण को गति देने का दबाव।

स्थिति ऐसी है कि न तो प्लेटफार्म का काम न ही आगे बढ़ा है न ही एसएनटी भवन का निर्माण हो पा रहा है। परियोजना पूरी होने पर हार्डिंग पार्क से लोकल और मेमू समेत कुछ यात्री ट्रेनों का परिचालन कराया जाना है।

इससे पटना जंक्शन की मुख्य लाइन पर ट्रेनों का दबाव कम करने की योजना है। लेकिन निर्माण में देरी जारी रही तो इसका सीधा असर पटना जंक्शन की क्षमता बढ़ाने की पूरी योजना पर पड़ेगा।

पांच प्लेटफाॅर्म और पांच लाइन बननी हैं

टर्मिनल के प्रथम चरण में पांच प्लेटफार्म और पांच रेल लाइन तैयार की जानी हैं। इसके साथ जी 4 स्टेशन भवन, जी 6 एसएनटी भवन, सबवे, फुट ओवरब्रिज, सिग्नल एवं टेलीकम्युनिकेशन भवन समेत यात्री सुविधाएं विकसित की जानी हैं। प्लेटफार्मों पर कवर शेड भी लगाए जाने हैं।

पहले चार प्लेटॅफार्म, फिर बढ़ाकर पांच किए गए

हार्डिंग पार्क टर्मिनल की योजना अप्रैल 2024 में रेलवे बोर्ड की मंजूरी के बाद सामने आई थी। तब यहां चार प्लेटफार्म बनाने और मेमू व लोकल ट्रेनों का परिचालन कराने की बात कही गई थी।

रेलवे ने करीब 100 जोड़ी लोकल ट्रेनों को हार्डिंग पार्क से चलाने की संभावना भी जताई थी। बाद में प्रथम चरण में प्लेटफार्मों की संख्या बढ़ाकर पांच कर दी गई।

परियोजना को पटना जंक्शन के पुनर्विकास से भी जोड़ा गया। उद्देश्य साफ था लोकल ट्रेनों को अलग टर्मिनल देकर पटना जंक्शन की मुख्य लाइन को मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों के लिए अधिक उपलब्ध कराना। लेकिन निर्माण की धीमी रफ्तार ने इस पूरी योजना की समयबद्धता पर सवाल खड़ा कर दिया है।


परियोजना का काम समय पर पूरा हो इसकी निगरानी की जा रही है। जो भी बाधा है उसे दूर कर काम सुचारू रूप से हो यह रेल प्रशासन की ओर से सुनिश्चित किया जा रहा है।
सरस्वती चन्द्र, सीपीआरओ, पूर्व मध्य रेल

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