पटना में सप्लीमेंट फैक्ट्री पर छापा, दूध में 'फार्मेलिन' मिला; नाली में बहाया 125 लीटर
खाद्य सुरक्षा विभाग ने पटना में छापामारी कर 125 लीटर दूध नष्ट किया जिसमें फार्मेलिन पाया गया। फतुहा की एक ...और पढ़ें

पटना में खाद्य सुरक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई, दूध में मिलावट पर 125 लीटर दूध नष्ट (AI Generated Image)
HighLights
पटना में खाद्य सुरक्षा विभाग ने की छापामारी।
फार्मेलिन युक्त 125 लीटर दूध मौके पर नष्ट किया गया।
फतुहा फैक्ट्री से कैल्शियम सप्लीमेंट के नमूने जब्त हुए।
जागरण संवाददाता, पटना। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने शुक्रवार को पटना में कई स्थानों पर छापामारी की। इस दौरान दूध में फार्मेलिन की मौजूदगी पाए जाने पर 125 लीटर दूध को मौके पर ही नष्ट करा दिया गया।
इसके अलावा, फतुहा के बारिसपुर में फूड सप्लीमेंट तैयार करने वाली फैक्ट्री में छापामारी कर कैल्शियम युक्त विभिन्न सप्लीमेंट के नमूने जब्त किए गए। खाद्य संरक्षा के अभिहीत पदाधिकारी सुदामा कुमार के नेतृत्व में टीम ने दूध की जांच की।
जांच में फार्मेलिन मिलने के बाद संबंधित 125 लीटर दूध को नाली में बहाकर नष्ट कराया गया। विभाग के अधिकारियों के अनुसार दूध को संरक्षित रखने के लिए फार्मेलिन का इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। वहीं, बारिसपुर स्थित सप्लीमेंट निर्माण इकाई से कैल्शियम युक्त उत्पादों के छह नमूने लिए गए हैं।
खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी डॉ. सुदीन कुमार ने बताया कि सप्लीमेंट में ऐसे पदार्थों के इस्तेमाल की आशंका है, जो स्वास्थ्य के लिए उचित नहीं हैं। सभी छह नमूने शनिवार को प्रयोगशाला भेजे जाएंगे। जांच रिपोर्ट करीब 14 दिन में आने की उम्मीद है। रिपोर्ट के आधार पर संबंधित फैक्ट्री के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
छोटे दुकानदारों पर कार्रवाई, बड़े प्रतिष्ठानों को लेकर सवाल
खाद्य सुरक्षा विभाग की लगातार छापामारी को लेकर छोटे दुकानदारों में भी सवाल उठने लगे हैं। दुकानदारों का कहना है कि फिलहाल मुख्य रूप से छोटी दुकानों और छोटे कारोबारियों के यहां कार्रवाई होती दिखाई दे रही है, जबकि बड़े प्रतिष्ठानों और बड़े कारोबारियों के यहां लंबे समय से ऐसी कार्रवाई नहीं हुई है।
उनका कहना है कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जांच अभियान सभी स्तर के प्रतिष्ठानों में समान रूप से चलना चाहिए।
छोटे दुकानदारों का यह भी कहना है कि यदि मिलावट के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है तो बड़े प्रतिष्ठानों की भी नियमित जांच होनी चाहिए, ताकि अभियान को लेकर किसी तरह का भेदभाव का सवाल न उठे।
