बिहार में सरकारी रेट से 20 रुपये महंगी बिक रही प्याज, चीनी में 15 रुपये तक अंतर; फेस्टिव सीजन में रुला रहा बाजार
पटना में चीनी, प्याज और आटे जैसी रोजमर्रा की खाद्य वस्तुओं की कीमतें सरकारी दर से काफी अधिक हो गई हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ गई है।

सरकारी दर से महंगे दाम। फाइल फोटो
HighLights
चीनी, प्याज, आटा सरकारी दर से 10-21 रुपये महंगा।
त्योहारों से पहले रसोई का बजट बुरी तरह प्रभावित।
थोक बाजार में भी कीमतें निर्धारित दर से अधिक।
जागरण संवाददाता, पटना। राजधानी के बाजार में रोजमर्रा की जरूरत वाली खाद्य वस्तुओं की कीमतों में लगातार उछाल से आम उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ गई है।
स्थिति यह है कि खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की ओर से निर्धारित खुदरा और थोक दर से भी अधिक कीमत पर चीनी, प्याज और आटा बाजार में बिक रहे हैं।
20 अगस्त को विभाग की ओर से जारी दर और राजधानी के मौजूदा बाजार भाव में कई वस्तुओं की कीमत में बड़ा अंतर सामने आया है। इससे त्योहारों से पहले रसोई का बजट बिगड़ने लगा है।
खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की 20 अगस्त की दर के अनुसार, थोक बाजार में चीनी 54 रुपये, प्याज 33 रुपये और आटा 30 रुपये प्रति किलो निर्धारित है।
वहीं, खुदरा में चीनी 57 रुपये, प्याज 41 रुपये और आटा 34 रुपये प्रति किलो की दर तय की गई है। इसके विपरीत राजधानी के बाजार में इन वस्तुओं की कीमत काफी अधिक है।
थोक में चीनी 64 रुपये, प्याज 44 रुपये और आटा 40 से 42 रुपये किलो बिक रहा है। खुदरा बाजार में चीनी की कीमत 70 से 72 रुपये, प्याज 55 से 60 रुपये और आटा 50 से 52 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।
चीनी में 13 से 15 रुपये तक का अंतर
सरकारी खुदरा दर से तुलना करें तो बाजार में चीनी 13 से 15 रुपये प्रति किलो महंगी बिक रही है। इसी तरह प्याज खुदरा में तय दर से 11 से 21 रुपये और आटा करीब 16 से 18 रुपये प्रति किलो अधिक कीमत पर मिल रहा है।
थोक बाजार में भी अंतर कम नहीं है। सरकारी दर की तुलना में चीनी करीब 10 रुपये, प्याज 11 रुपये और आटा 10 से 12 रुपये प्रति किलो अधिक कीमत पर बिक रहा है। इसका सीधा असर खुदरा ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है।
त्योहार से पहले बढ़ी चिंता
आम तौर पर त्योहारों के दौरान खाद्य सामग्री की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। चीनी और आटा जैसी रोजाना इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं के महंगे होने से मध्यमवर्गीय परिवारों का मासिक बजट प्रभावित हो रहा है।
प्याज की कीमत बढ़ने से रसोई का खर्च और बढ़ गया है। खुदरा दुकानदार महासंघ के महासचिव रमेश तलरेजा के अनुसार बाजार में थोक स्तर पर ही कीमतें अधिक मिल रही हैं।
इसका असर आगे खुदरा कीमतों पर पड़ना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि बाजार में कीमतों की निगरानी और आपूर्ति की स्थिति पर ध्यान देने की जरूरत है, ताकि उपभोक्ताओं को अनावश्यक महंगाई से राहत मिल सके।
यह भी पढ़ें- चीनी के बाद प्याज के चढ़े तेवर! 45 फीसदी उछले दाम; सरकार की 'कांदा एक्सप्रेस' से लगेगी कीमतों पर लगाम?
