भोजन की थाली में छिपा है पेट और लिवर की सेहत का राज, रोटी-चावल के साथ प्रोटीन और फल-सब्जियों को दें जगह
एम्स पटना के डॉ. उत्पल आनंद ने बताया कि रोटी-चावल की अधिकता और प्रोटीन की कमी से फैटी लिवर का ...और पढ़ें

दिनभर की थाली में रखें प्रोटीन और रंग-बिरंगे फल
HighLights
रोटी-चावल की अधिकता से फैटी लिवर का जोखिम बढ़ता है।
प्रोटीन, फाइबर, फल-सब्जियां पेट और लिवर के लिए जरूरी।
गैस, एसिडिटी, कब्ज में खानपान और जीवनशैली सुधारें।
जागरण संवाददाता, पटना। भोजन की थाली में रोटी और चावल की अधिकता और प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थों की कमी से सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। खासकर शारीरिक गतिविधि कम होने और वजन बढ़ने की स्थिति में जरूरत से अधिक कैलोरी वाला भोजन फैटी लिवर का जोखिम बढ़ा सकता है।
पेट और लिवर को स्वस्थ रखने के लिए थाली में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा संतुलित रखने के साथ प्रोटीन, फाइबर, हरी सब्जियां, सलाद और रंग-बिरंगे फलों को पर्याप्त जगह देना जरूरी है।
रविवार को दैनिक जागरण के लोकप्रिय कार्यक्रम हेलो जागरण में एम्स पटना के गैस्ट्रो सर्जरी विभागाध्यक्ष डा. उत्पल आनंद ने खानपान और पेट-लिवर से जुड़ी समस्याओं पर पाठकों के सवालों के जवाब दिए।
उन्होंने कहा कि कार्बोहाइड्रेट को पूरी तरह बंद करना उचित नहीं है। इसकी मात्रा व्यक्ति की उम्र, वजन, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार तय होनी चाहिए।
रोटी-चावल की अधिकता से बढ़ सकता है फैटी लिवर का खतरा
रोटी और चावल कार्बोहाइड्रेट के प्रमुख स्रोत हैं और संतुलित मात्रा में इनका सेवन जरूरी है। समस्या तब होती है जब भोजन का अधिकांश हिस्सा केवल रोटी-चावल से पूरा हो और प्रोटीन व फाइबर की कमी रह जाए।
जरूरत से अधिक कैलोरी और कम शारीरिक गतिविधि वजन बढ़ाने के साथ फैटी लिवर का जोखिम बढ़ा सकती है।
ऐसे में थाली में दाल, दूध, सत्तू, सोयाबीन, पनीर, अंडा, हरी सब्जियां और सलाद को शामिल करना चाहिए। भोजन की मात्रा व्यक्ति की जरूरत के अनुसार होनी चाहिए।
दिनभर की थाली में रखें प्रोटीन और रंग-बिरंगे फल
नाश्ते में दूध, सत्तू, दलिया या अंडा लिया जा सकता है। दोपहर और रात के भोजन में जरूरत के अनुसार रोटी या चावल के साथ दाल, मौसमी सब्जियां, दही और सलाद शामिल करें। सोयाबीन, पनीर और अंडा भी प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं।
अमरूद, पपीता, संतरा, सेब और अन्य मौसमी फलों को भी भोजन का हिस्सा बनाना चाहिए। अलग-अलग रंगों के फल और सब्जियां लेने से आहार में विविधता आती है।
फैटी लिवर की शुरुआत में अक्सर नहीं दिखते लक्षण
लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से अधिक वसा जमा होने को फैटी लिवर कहा जाता है। शुरुआती अवस्था में अक्सर इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते।
कुछ लोगों को थकान या पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में भारीपन महसूस हो सकता है। इसकी पुष्टि के लिए चिकित्सक जरूरत के अनुसार लिवर फंक्शन टेस्ट, अल्ट्रासाउंड और अन्य जांच करा सकते हैं। मधुमेह, मोटापा और बढ़े हुए ट्राइग्लिसराइड वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
गैस और एसिडिटी को बार-बार नजरअंदाज न करें
गैस, एसिडिटी और पेट फूलने की समस्या से बचने के लिए भोजन धीरे-धीरे चबाकर खाना चाहिए। एक बार में बहुत अधिक भोजन करने से बचें। जिन खाद्य पदार्थों से किसी व्यक्ति को गैस बढ़ती है, उनकी पहचान कर सेवन सीमित किया जा सकता है।
भोजन के तुरंत बाद लेटने से बचना चाहिए और रात का खाना सोने से कुछ घंटे पहले कर लेना बेहतर है। बार-बार एसिडिटी होने पर बिना चिकित्सकीय सलाह लंबे समय तक दवा नहीं लेनी चाहिए।
लगातार परेशानी, निगलने में कठिनाई, वजन कम होने या उल्टी में खून आने की स्थिति में तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
कब्ज में बढ़ाएं फाइबर, पानी और शारीरिक गतिविधि
कब्ज से राहत के लिए हरी सब्जियां, सलाद, दालें, साबुत अनाज और साबुत फल भोजन में शामिल करें। पर्याप्त पानी पीने के साथ नियमित शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है।
फाइबर की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ानी चाहिए, क्योंकि अचानक अधिक फाइबर लेने से कुछ लोगों में गैस की समस्या बढ़ सकती है।
मल त्याग की इच्छा को नहीं रोकना चाहिए। लंबे समय तक कब्ज रहने, पेट में तेज दर्द, उल्टी या मल में खून आने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
हेपेटाइटिस और सिरोसिस से बचाव के लिए सावधानी जरूरी
हेपेटाइटिस के कुछ प्रकार दूषित भोजन और पानी से, जबकि कुछ संक्रमित रक्त या शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क से फैल सकते हैं।
सुरक्षित पानी, स्वच्छ भोजन, संक्रमित सुई से बचाव और जरूरत के अनुसार टीकाकरण महत्वपूर्ण है। हेपेटाइटिस बी और सी की समय पर पहचान भी जरूरी है।
लिवर सिरोसिस में लंबे समय तक लिवर को नुकसान पहुंचने से स्थायी निशान बन सकते हैं। पुरानी लिवर बीमारी और कुछ मामलों में अत्यधिक शराब का सेवन इसके कारणों में शामिल हो सकता है। समय पर उपचार से बीमारी की प्रगति को धीमा करने में मदद मिल सकती है।
हर पेट दर्द में एंडोस्कोपी या सर्जरी जरूरी नहीं
पेट दर्द के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें गैस, एसिडिटी, संक्रमण, अल्सर, पथरी और आंतों से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं। चिकित्सक लक्षणों और जांच के आधार पर तय करते हैं कि दवा, एंडोस्कोपी, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन या सर्जरी में से किसकी जरूरत है।
अचानक तेज पेट दर्द, पेट का कड़ा होना, लगातार उल्टी या मल और गैस बंद होने जैसी स्थिति में तत्काल अस्पताल जाना चाहिए।
थाली में इन चीजों को दें जगह
- प्रोटीन: दूध, दाल, सत्तू, सोयाबीन, पनीर और अंडा।
- फाइबर: हरी सब्जियां, सलाद, साबुत अनाज और दालें।
- फल: अमरूद, पपीता, संतरा, सेब और अन्य मौसमी फल।
- सीमित करें: मिठाई, मीठे पेय, अत्यधिक तला-भुना भोजन और जरूरत से ज्यादा कैलोरी।
- जीवनशैली: नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और वजन पर नियंत्रण।
