पटना में बाढ़ के पानी से बचा लाई भविष्य, चारपाई में भींगी किताबें सुखाती दिखी शिवानी
पटना में बाढ़ से प्रभावित 12 वर्षीय शिवानी अपनी और छोटे भाई पवन की पानी में डूबी स्कूल की किताबों ...और पढ़ें

शिवानी अपनी भीगी किताबों के पन्ने सुखाकर उन्हें बचाने की कोशिश करती हुई। साथ में उसका भाई पवनl जागरण
HighLights
12 वर्षीय शिवानी बाढ़ में भी किताबें सुखा रही है।
पानी में डूबी किताबों से शिक्षा के सपने बचा रही।
बच्चों का शिक्षा के प्रति जुनून आपदा में भी।
पवन कुमार मिश्र, पटना। धूप में चारपाई पर फैली किताबें...किसी के पन्ने गल गए, किसी की स्याही फैल गई तो कुछ पन्ने आपस में चिपक गए हैं। 12 वर्षीय शिवानी एक-एक पन्ने को सावधानी से अलग कर रही है।
किताब थोड़ी देर धूप में रखने के बाद वह उसे पलटती है फिर चिपके पन्नों को अंगुलियों से धीरे-धीरे खोलती। हर बचा पन्ना उसके चेहरे पर थोड़ी उम्मीद लाता कि शायद धूप कुछ किताबें बचा ले। देखने से अहसास हो रहा था कि वह सिर्फ किताबें नहीं सुखा रही, बल्कि पानी से घिरे जेपी गंगा पथ पर अपने सपनों को बचा रही है।
कुर्जी बिंद टोली के गोसाईं टोला की निवासी शिवानी कक्षा चार तो नौ वर्षीय छोटा भाई पवन कक्षा तीन में पढ़ते हैं। दोनों के लिए स्कूल की किताबें और कापियां किसी खजाने से कम नहीं।
सरकारी स्कूल से मिलीं ये किताबें ही उनकी पढ़ाई का सहारा है। फिर गंगा का पानी बढ़ा और देखते ही देखते घर के सामान के साथ उनकी किताबें भी पानी में डूब गईं। पानी बढ़ने लगा तो घरवाले राहत शिविर में आ गए।
यहां दर्जनभर से अधिक परिवार शिविर में हैं। कोई सामान के नाम पर कपड़े लाया, कोई बर्तन तो बाकी अन्य घरेलू सामान। वहीं, शिवानी और पवन अपने साथ जो सबसे जरूरी चीजें बचा कर लाए वह हैं उनकी किताबें।
अब इन्हीं किताबों को वह चरपाई पर सुखा रही है। कभी वह किताब उठाती है, कवर सीधा करती और फिर पन्नों को अलग करने लगती। कई जगह कागज इतना गल चुका है कि अंगुली लगाते ही फट जाता। कुछ पन्नों पर लिखे अक्षर धुंधले हो गए हैं पर शिवानी उन्हें छोड़ नहीं रही।
शिवानी बताती है, बाढ़ में मेरी और पवन की सारी किताबें खराब हो गईं। पढ़ने का बहुत मन करता है, लेकिन अब क्या करें? हमें लगा कि किताबों को सुखा लेंगे तो शायद कुछ बच जाएंगी।
यह कहते हुए वह फिर किताब की ओर झुक जाती है। जैसे बातचीत से ज्यादा जरूरी सामने बिखरे पन्नों को बचाना हो। बाढ़ ने सिर्फ शिवानी के घर को नहीं घेरा, उसकी पढ़ाई के रास्ते को भी रोक दिया है।
स्कूल बंद हैं, घर कब सामान्य होगा, पता नहीं। किताबें खराब हो चुकी हैं और कापियों के पन्ने गल गए हैं। ऐसे में पढ़ाई फिर कैसे शुरू होगी, यह सवाल शिवानी को परेशान कर रहा है।
बाढ़ से घर और सामान के साथ बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित
चारपाई पर रखी किताबों को सुखाने की उसकी कोशिश इस बात की गवाही है कि बच्चे आपदा में भी अपने सपने पूरा करने का रास्ता तलाशते हैं। सामान्य बच्चों के लिए किताबें महज कागज-स्याही होती है, लेकिन शिवानी के लिए ये स्कूल लौटने का रास्ता हैं।
इन्हीं पन्नों में उसके सवाल-जवाब और आगे बढ़ने का सपना है। चारपाई पर फैले पन्ने बाढ़ की भयावहता भी दर्शाते हैं। पानी उतर जाएगा, घर फिर बसेंगे, जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर लौटेगी मगर जिन बच्चों की किताबें बह गईं, उनके लिए पढ़ाई दोबारा शुरू करना भी एक चुनौती होगी।
