पटना में बाढ़ का पानी उतरते ही बढ़ा बीमारियों का खतरा, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी
पटना में बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां बढ़ रही हैं, दूषित पानी और मच्छरों से ...और पढ़ें

बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी रहें सावधान, दूषित पानी से बढ़ सकता है संक्रमण का खतरा (PTI)
HighLights
दूषित पानी से डायरिया, टाइफाइड, हेपेटाइटिस जैसी बीमारियाँ।
जमा पानी में मच्छर पनपने से डेंगू, मलेरिया का खतरा।
सावधानी बरतें, शुद्ध पानी पिएं, लक्षण दिखें तो डॉक्टर को दिखाएं।
जागरण संवाददाता, पटना। जिले के विभिन्न प्रखंडों और शहरी आसपास के इलाकों में बाढ़ का पानी जमा है। कई जगहों पर पानी धीरे-धीरे निकल रहा है, लेकिन पानी उतरने के साथ स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां बढ़ सकती हैं। जलजमाव वाले क्षेत्रों में गंदगी, नालों का पानी और कचरा मिलने से संक्रमण का खतरा रहता है।
वहीं, जमा पानी में मच्छरों के पनपने से डेंगू और मलेरिया का खतरा भी बढ़ सकता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) की बाढ़ संबंधी सलाह में भी दूषित पानी और खराब स्वच्छता से डायरिया, टायफाइड, हेपेटाइटिस-ए/ई और लेप्टोस्पायरोसिस जैसी बीमारियों तथा मच्छरों से डेंगू-मलेरिया का खतरा बताया गया है।
सिविल सर्जन ने कहा- पानी से सीधे संपर्क से बचें
सिविल सर्जन डॉ. योगेंद्र प्रसाद मंडल ने लोगों से बाढ़ के पानी में अनावश्यक रूप से नहीं जाने की अपील की है। जरूरी होने पर रबर के गमबूट, दस्ताने आदि का इस्तेमाल करने को कहा गया है। पानी में यदि बिजली के तार गिरे हों तो उस रास्ते से बिल्कुल नहीं गुजरना चाहिए।
बाढ़ के पानी में छिपे गड्ढे, नाले, टूटे शीशे, लोहे के टुकड़े और अन्य मलबे से चोट लग सकती है। एनसीडीसी की सलाह के अनुसार बाढ़ के पानी के संपर्क में आने पर साबुन और साफ पानी से शरीर के प्रभावित हिस्से को अच्छी तरह धोना चाहिए तथा घाव होने पर उसकी उचित सफाई करनी चाहिए।
पीने के पानी में बरतें विशेष सावधानी
बाढ़ के दौरान हैंडपंप, कुएं या पाइपलाइन का पानी दूषित होने की आशंका रहती है। इसलिए बिना शुद्ध किए पानी का सेवन नहीं करना चाहिए। पीने और खाना बनाने के लिए सुरक्षित पानी का ही इस्तेमाल करें।
भोजन बनाने से पहले और शौचालय के इस्तेमाल के बाद साबुन से हाथ धोना जरूरी है। बच्चों को जलजमाव वाले पानी में खेलने से रोकें।
दस्त-बुखार हो तो तुरंत कराएं जांच
बाढ़ के बाद दस्त, उल्टी, पेट दर्द, तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द या त्वचा पर लाल चकत्ते जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। एनसीडीसी ने बाढ़ के दौरान बुखार या दस्त होने पर चिकित्सा सहायता लेने की सलाह दी है।
मच्छरों से बचाव भी जरूरी
पानी निकलने के बाद भी छोटे-छोटे गड्ढों और घरों के आसपास जमा पानी में मच्छरों का प्रजनन हो सकता है। ऐसे स्थानों को खाली कराएं। घर में मच्छरदानी का प्रयोग करें और शाम के समय विशेष सावधानी बरतें। बुखार आने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सक से सलाह लें।
बाढ़ के बाद जरूरी सावधानियां
- बाढ़ के पानी में अनावश्यक न उतरें। पीने के लिए केवल सुरक्षित/शुद्ध पानी इस्तेमाल करें।
- पानी के संपर्क के बाद साबुन से हाथ-पैर धोएं।
- बच्चों को जमा पानी और कीचड़ में खेलने न दें।
- बुखार, दस्त, उल्टी, त्वचा संक्रमण या चोट होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में दिखाएं।
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