विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

पटना में बिजली चोरी से लेकर ओवरलोडिंग तक पर नजर, डीटी मीटर से ऐसे बदल जाएगी व्यवस्था

Published: Mon, 12 Oct 2026 07:36 PM (IST)

पेसू पटना में बिजली चोरी रोकने, लो-वोल्टेज और ट्रिपिंग की समस्या दूर करने के लिए वितरण ट्रांसफार्मरों पर डीटी मीटर लगा रहा है और उपभोक्ताओं की टैगिंग कर रहा है।

पटना में ट्रांसफॉर्मर पर लगा डीटी मीटर। जागरण

पटना में ट्रांसफॉर्मर पर लगा डीटी मीटर। जागरण

HighLights

  1. बिजली चोरी रोकने और लो-वोल्टेज समस्या दूर करने हेतु पहल।

  2. डीटी मीटर से खपत, नुकसान और ट्रांसफार्मर लोड की निगरानी।

  3. उपभोक्ताओं को बिजली कटौती की सूचना मोबाइल पर मिलेगी।

जागरण संवाददाता, पटना। राजधानी में बिजली चोरी पर लगाम लगाने, लो-वोल्टेज की समस्या दूर करने और बार-बार बिजली ट्रिप होने की परेशानी कम करने के लिए पटना इलेक्ट्रिक सप्लाई यूनिट (PESU) तकनीक का सहारा ले रही है।

पेसू ने वितरण ट्रांसफार्मरों पर डीटी मीटर (Distribution Transformer Meter) लगाने और उपभोक्ताओं की टैगिंग का काम तेज कर दिया है। पेसू क्षेत्र के करीब 84.04 प्रतिशत वितरण ट्रांसफार्मरों पर डीटी मीटर लगाए जा चुके हैं। 

जबकि करीब 51.26 प्रतिशत बिजली उपभोक्ताओं की टैगिंग पूरी हुई है। इस व्यवस्था से बिजली की खपत, ट्रांसफार्मरों पर बढ़ते लोड और बिजली के नुकसान की निगरानी आसान होगी।

बिजली कटौती की मोबाइल पर म‍िलेगी सूचना 

साथ ही, उपभोक्ताओं को बिजली कटौती की सूचना मोबाइल पर देने में भी मदद मिलेगी। पेसू क्षेत्र में कुल 9,226 वितरण ट्रांसफार्मर हैं।

इनमें से अब तक 7,754 पर डीटी मीटर लगाए जा चुके हैं। यानी 1,472 ट्रांसफार्मरों पर मीटर लगाने का काम बाकी है।

राजधानी के कुल 7,61,342 बिजली उपभोक्ताओं में से 3,90,299 की टैगिंग पूरी हो चुकी है। अभी 3,71,043 की टैगिंग होनी बाकी है। पेसू के जीएम दिलीप कुमार सिंह ने बताया कि शेष काम जल्द पूरा कर लिया जाएगा।

एक क्लिक पर पता चलेगा बिजली का हिसाब

डीटी मीटरिंग और उपभोक्ताओं की टैगिंग पूरी होने के बाद यह पता लगाना आसान होगा कि किसी ट्रांसफार्मर से कितनी बिजली निकली और उससे जुड़े उपभोक्ताओं ने कुल कितनी बिजली खर्च की।

दोनों आंकड़ों का मिलान कर बिजली के नुकसान का पता लगाया जा सकेगा। इससे बिजली चोरी या तकनीकी खराबी के कारण होने वाले लाइन नुकसान वाले क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलेगी।

इसके बाद संबंधित इलाके में जांच कर जरूरी कार्रवाई की जा सकेगी। उदाहरण के तौर पर, किसी ट्रांसफार्मर से एक लाख यूनिट बिजली की आपूर्ति हुई।

लेकिन उससे जुड़े उपभोक्ताओं के मीटर में कुल 80 हजार यूनिट खपत दर्ज हुई तो बाकी 20 हजार यूनिट के अंतर की जांच की जा सकेगी। इससे बिजली के नुकसान के कारणों का पता लगाने में आसानी होगी।

ओवरलोडिंग का पहले ही चलेगा पता

गर्मी के दिनों में बिजली की खपत बढ़ने से कई इलाकों में ट्रांसफार्मरों पर अधिक दबाव पड़ता है। इससे ट्रांसफार्मर खराब होने और बिजली आपूर्ति बाधित होने की आशंका रहती है।

डीटी मीटर से ट्रांसफार्मर पर पड़ने वाले लोड की निगरानी की जा सकेगी। इससे क्षमता से अधिक लोड वाले ट्रांसफार्मरों की पहचान कर समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकेंगे।

जरूरत के अनुसार ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाने या लोड को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की योजना बनाई जा सकेगी। इससे लो-वोल्टेज और बार-बार ट्रिपिंग की समस्या कम करने में मदद मिलेगी। बता दें कि इस वर्ष अधिकतम लोड 933.6 मेगावाट दर्ज किया गया है।

दफ्तर से होगी निगरानी, मोबाइल पर मिलेगा अलर्ट

डीटी मीटर में माडम आधारित संचार व्यवस्था होने से बिजलीकर्मियों को हर बार रीडिंग लेने के लिए मौके पर जाने की जरूरत कम होगी। संबंधित आंकड़े दूर बैठे हासिल किए जा सकेंगे।

इससे निगरानी और खराबी की पहचान करने की प्रक्रिया आसान होगी। वहीं, उपभोक्ताओं की टैगिंग पूरी होने पर किसी खास फीडर या ट्रांसफार्मर से जुड़े उपभोक्ताओं की पहचान करना आसान होगा।

ऐसे में संबंधित क्षेत्र में मरम्मत या रखरखाव के लिए बिजली बंद करने पर उपभोक्ताओं को एसएमएस या नोटिफिकेशन से सूचना भेजने में मदद मिलेगी।

इससे लोगों को बिजली कटौती की जानकारी पहले मिल सकेगी और वे अपने जरूरी काम उसी हिसाब से तय कर सकेंगे।