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पटना, जेएनएन। स्वाधीनता दिवस यानी 15 अगस्त को पटना जिला खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) हो जाएगा। ऐसा इसलिए कि शौचालय बनाने के सौ फीसदी लक्ष्य को हासिल कर लिया गया है। सर्वे में 48 हजार और नए शौचालयों के निर्माण की जरूरत जताई गई है। इनके निर्माण का लक्ष्य 15 अगस्त निर्धारित किया गया है। पटना जिले में 3.80 लाख शौचालयों का निर्माण हो चुका है।


जिले में कुल 5.93 लाख शौचालय हैं। हालांकि शौचालय निर्माण के बाद राशि भुगतान की गति धीमी है। अब तक शौचालय निर्माण कराने वाले 30 फीसद लोगों को ही राशि का भुगतान हो सका है। यही नहीं जियो टैगिंग नहीं होने से शौचालय निर्माण की रिपोर्ट नहीं प्रदर्शित हो पा रही है। प्रत्येक लाभुकों के खाते में 12 हजार रुपये की राशि भेजी जानी है। जिलाधिकारी कुमार रवि ने प्रखंड विकास पदाधिकारियों को शौचालय की जांच कर प्रतिदिन जियो टैगिंग का लक्ष्य दिया है। इसके लिए प्रखंड स्तर पर नोडल पदाधिकारी बनाए गए हैं। दनियावां प्रखंड शौचालय निर्माण करा जियो टैगिंग कराने में प्रथम स्थान पर है। इस प्रखंड में 78.26 फीसद शौचालय की जियो टैगिंग कर दी गई है। 75.18 फीसद जियो टैगिंग कराकर अथमलगोला दूसरे स्थान पर तथा 74.57 फीसद के साथ बाढ़ प्रखंड तीसरे स्थान पर है। वहीं 68.67 फीसद के साथ संपतचक चौथे तथा 62.83 फीसद के साथ मोकामा पांचवें स्थान पर है।


सभी घरों में शौचालय निर्माण कराने के बाद भी पटना सदर जियो टैगिंग नहीं करने के कारण जिले के सभी 23 प्रखंडों में सबसे निचले पायदान पर है। यहां मात्र 27.73 फीसदी शौचालय की जियो टैगिंग हुई है। दरअसल, शौचालय निर्माण कराने वालों का भुगतान नहीं हो पा रहा है। नीचे से दूसरे स्थान पर मनेर है। इस प्रखंड में मात्र 36.46 फीसद जियो टैगिंग हुई है। नीचे से तीसरे स्थान पर 37.97 फीसद जियो टैगिंग कर पुनपुन है। वहीं पालीगंज 39.30 फीसद के साथ चौथे तथा फुलवारीशरीफ 41.53 फीसद के साथ जियो टैगिंग के मामले में पांचवें स्थान पर है

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