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दीपावली पर इस बार तारीखों का खास संयोग, 5 की जगह 6 दिन चलेगा दीपोत्सव; अमावस्या से बदला पर्वों का क्रम

Published: Tue, 27 Oct 2026 05:47 PM (IST)

इस वर्ष दीपोत्सव तीन साल बाद छह दिनों का होगा, जो धनतेरस से भाई दूज तक चलेगा। इसमें धनतेरस, छोटी ...और पढ़ें

तीन साल बाद फिर छह दिन का दीपोत्सव। सांकेत‍िक तस्‍वीर

तीन साल बाद फिर छह दिन का दीपोत्सव। सांकेत‍िक तस्‍वीर

HighLights

  1. दीपोत्सव इस बार तीन साल बाद छह दिनों का होगा।

  2. धनतेरस से भाई दूज तक के सभी प्रमुख पर्व मनाए जाएंगे।

  3. आठ नवंबर को स्वाति नक्षत्र में दीपावली का पर्व मनेगा।

जागरण संवाददाता, पटना। सनातन धर्मावलंबियों का खास पर्व दीपोत्सव इस बार छह दिन का होगा। धन की देवी माता लक्ष्मी को समर्पित पांच दिनों को दीपोत्सव धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज तक होता है।

धनतेरस से भाई दूज तक देवी-देवताओं के निमित्त पांच दिन तक पांच दीपक जलाए जाते हैं। तीन साल बाद फिर इस बार अमावस्या तिथि दो दिन होने से दीपोत्सव छह दिन तक चलेगा।

नौ नवंबर रविवार को अमावस्या तिथि दोपहर 11:02 बजे से शुरू होगी तथा नौ नवंबर सोमवार की दोपहर 11:43 बजे तक रहेगी।

दिवाली प्रदोष कालीन व निशीथ व्यापिनी अमावस्या तिथि में मनाया जाता है। इसीलिए चतुर्दशी युक्त अमावस्या में दीपावली का पर्व नौ नवंबर रविवार को मनाया जाएगा।

धनतेरस से आरंभ होगा दीपोत्सव

ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने बताया कि कार्तिक कृष्ण प्रदोष व्यापिनी त्रयोदशी में छह नवंबर शुक्रवार को धनतेरस से दीपोत्सव का पर्व शुरू होगा।

छह को त्रयोदशी तिथि दोपहर 11:18 बजे से सात नवंबर शनिवार की सुबह 10:55 बजे तक रहेगा। धनतेरस धन, सुख, स्वास्थ्य व समृद्धि का पर्व है।

इस दिन सोना, चांदी, आभूषण, रत्न, भूमि-भवन, वाहन, वस्त्र, बर्तन सहित अन्य वस्तुओं की खरीदारी करना शुभ माना जाता है।

घरों व व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में इस दिन सुख, समृद्धि, आरोग्यता, धन संपदा, ऐश्वर्य, वैभव की कामना से भगवान धन्वंतरि के साथ लक्ष्मी-गणेश, कुबेर, सरस्वती की पूजा होगी।

इसके अलावा अकाल मृत्यु, रोग, शोक, भय से निजात हेतु यम के निमित्त तेल का दीपक घर के बाहर दक्षिण मुख प्रज्‍ज्वलित किया जाएगा।

वही गोधूलि बेला में घरों पंचदेव को समर्पित घी का पांच दीपक जलाया जाएगा। वहीं, कार्तिक कृष्ण प्रदोष व्यापिनी चतुर्दशी में सात नवंबर शनिवार को नरक चतुर्दशी, छोटी दिवाली एवं हनुमान जयंती का पर्व मनाया जाएगा।

इस दिन चतुर्दशी तिथि सुबह 10:55 बजे से आठ की दोपहर 11:02 बजे तक रहेगा। नरक चतुर्दशी के दिन पांच, 11 या 21 दीपक जलाने की परंपरा है।  

स्वाति नक्षत्र के सुयोग में आठ को दीपावली

दीपोत्सव का सबसे प्रमुख पर्व दीपावली कार्तिक कृष्ण प्रदोष व निशीथ व्यापिनी अमावस्या में आठ नवंबर रविवार को स्वाति नक्षत्र एवं आयुष्मान व सौभाग्य योग के युग्म संयोग में मनाई जाएगी।

इस दिन स्थिर लग्न में धन, वैभव की कामना से महालक्ष्मी, महासरस्वती, विघ्नहर्त्ता गणेश, कुबेर की विधिवत पूजा की जाएगी।

दीपावली पर स्वाति नक्षत्र विद्यमान रहेगा। नक्षत्रों की श्रेणी में स्वाति 15वां नक्षत्र है। इसका स्वामी राहु यानी अंधकार है। जिस तरह स्वाति नक्षत्र में ओस की बूंद सीप पर गिरती है तो मोती बनती है। उसी प्रकार इस नक्षत्र में लोगों की ओर से किया कार्य उसे सफलता की चमक प्रदान करेगा।

नौ नवंबर को सोमवती अमावस्या

दीपोत्सव को पांच की जगह छह दिन होने की मुख्य वजह सोमवती अमावस्या ही है। आठ नवंबर सोमवार की दोपहर 11:43 बजे तक अमावस्या तिथि विद्यमान रहेगी।

इस दिन अमावस्या तिथि एवं सोमवार दिन होने से सोमवती अमावस्या का संयोग बन रहा है। इस दिन महिलाएं अखंड सुहाग की कामना से पीपल वृक्ष की पूजा कर उनकी परिक्रमा करेंगी।

इसके बाद पंडितों से पौराणिक कथाओं का श्रवण कर दान-पुण्य करेंगी। इस दिन गंगा व तीर्थों में स्नान के बाद दान करना शुभ माना जाता है।

सौभाग्य योग में गोवर्धन पूजा

कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि की उपस्थिति में नौ नवंबर सोमवार को स्वाति व विशाखा नक्षत्र एवं सौभाग्य योग में गोवर्धनपूजा व अन्नकूट का पर्व मनाया जाएगा।

महिलाएं इस दिन गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाकर पारंपरिक गीत गाते हुए उनकी पूजा-अर्चना करेंगी। श्रद्धालु इस दिन भगवान श्रीकृष्ण एवं गौ माता की पूजा करेंगे।

इस दिन गौशाला में गायों को स्नान कराकर नूतन वस्त्र धारण कराकर चंदन, अक्षत, पुष्प, धुप-दीप, मिठाई व फल से पूजा होगी।

11 नवंबर को भाई दूज और चित्रगुप्त पूजा

कार्तिक शुक्ल उदय कालिक द्वितीया में 11 नवंबर बुधवार को दीपोत्सव का अंतिम पर्व भाई दूज में रूप में मनाया जाएगा।

बहनें इस दिन अपने भाई की लंबी उम्र की कामना करते हुए उनके माथे पर तिलक लगाकर मधुर भोजन खिलाएगी। इसके बदले भाई भी उनकी रक्षा का संकल्प लेते हुए उपहार भेंट करेंगे।

भाई दूज पर भाई को बहन के घर भोजन करना और उन्हें उपहार देना अत्यंत शुभ होता है तथा ऐसा करने से यम के दुष्प्रभाव भी कम हो जाते है। कायस्थ समुदाय के श्रद्धालु इस दिन विधि-विधान से चित्रगुप्त भगवान की पूजा-अर्चना करेंगे।

दीपोत्सव: एक नजर में

  1. 6 नवंबर (शुक्रवार): धनतेरस
  2. 7 नवंबर (शनिवार): छोटी दिवाली, नरक चतुर्दशी, हनुमान जयंती
  3. 8 नवंबर (रविवार): दीपावली
  4. 9 नवंबर (सोमवार): सोमवती अमावस्या
  5. 10 नवंबर (सोमवार): गोवर्धन पूजा, अन्नकूट
  6. 11 नवंबर (बुधवार): भाई दूज, चित्रगुप्त पूजा