US-UK के नागरिकों को कॉल, कंप्यूटर में मालवेयर और फिर डॉलर की वसूली; पटना में बाइक सवार से ऐसे खुला राज
पटना पुलिस ने मुसल्लहपुर में वाहन जांच के दौरान एक एमबीए पास युवक की गिरफ्तारी से बड़े साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया है।

पटना में विदेशी नागरिकों को ठगने वाले गिरोह का भंडाफोड़। सांकेतिक तस्वीर
जागरण संवाददाता, पटना। मुसल्लहपुर थाना क्षेत्र के रामपुर रोड में वाहन जांच के दौरान पकड़े गए MBA पास युवक से पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है।
पुलिस उस काॅलिंग सेंटर तक पहुंच गई, जहां फ्लैट में बैठकर एसआईपी वीओआईपी काॅलिंग साॅफ्टवेयर से अमेरिका और ब्रिटेन सहित अन्य विदेशी नागरिकों से ठगी की जा रही थी।
फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने और इसी स्किल का इस्तेमाल वह विदेशी नागरिकों से बात कर कंप्यूटर में खराबी का झांसा देकर एपीके या मालवेयर इंस्टाॅल करात थे।
वाहन जांच में पकड़े गए एमबीए पास युवक से मिला सुराग
फिर ठीक करने के नाम पर अमेरिकी डाॅलर वसूले जाते थे। पकड़े गए आरोपित की निशानदेही पर दानापुर के गोला रोड स्थित फ्लैट में छापेमारी कर तीन अन्य आरोपितों को गिरफ्तार किया गया।
इनमें राजीव नगर निवासी अक्षय कुमार साह, भोजपुर के महुआ निवासी ओम प्रकाश ठाकुर, सहरसा के गोलमा निवासी सत्यम कुमार और औरंगाबाद के श्रीकृष्ण नगर अहरी निवासी अभिषेक कुमार शामिल हैं।
इनके पास से दो बाइक, चार लैपटाॅप, नौ मोबाइल, सात डेबिट कार्ड, 1.09 लाख रुपये नकद, नेट फाइबर, माइक लगे हेडफोन, यूएसडीटी लेनदेन के स्क्रीनशाॅट समेत इलेक्ट्राॅनिक उपकरण बरामद हुए।
जब्त उपकरणों से किए गए अंतरराष्ट्रीय काॅल, विदेशी पीड़ितों की संख्या, ठगी की रकम और यूएसडीटी लेनदेन का ब्योरा पुलिस खंगाल रही है।
साथ ही हवाला के जरिए रकम भारत पहुंचाने वाले नेटवर्क और गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
पुलिस को देखते ही साक्ष्य मिटने के लिए तोड़ दिया लैपटाॅप
मुसल्लहपुर थाने की पुलिस रामपुर रोड में वाहन जांच कर रही थी। संदेह के आधार पर पुलिस ने एक बाइक सवार को घेरकर दबोच लिया। उसकी पहचान अक्षय कुमार के रूप में हुई।
उसके पास से बरामद मोबाइल में साइबर क्राइम से जुड़े कुछ साक्ष्य मिले। उसने बताया कि वह दानापुर के गोला रोड स्थित एक फ्लैट में रहकर अपने दोस्तों के साथ साइबर ठगी का काम करता है।
थानाध्यक्ष सीतु कुमारी के नेतृत्व में टीम का गठन कर आरोपित की निशानदेही पर गोला रोड स्थित विवेक विहार कालोनी स्थित अपार्टमेंट के उस तीसरे तल के फ्लैट में दबिश दी गई।
वहां से तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान एक आरोपित ने एक लैपटाप को जमीन पर पटककर साक्ष्य मिटाने की कोशिश की।
डिजिटल साक्ष्यों से खुलेगा गिरोह के नेटवर्क का राज
जब्त लैपटाप और मोबाइल की जांच में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों की जीमेल आइडी, पहचान पत्र, निजी दस्तावेज, यूएसडीटी (एक डिजिटल क्रिप्टोकरेंसी है जिसे स्टेबलकाइन कहा जाता है।
(इसका मूल्य अमेरिकी डाॅलर के बराबर होता है) लेनदेन के स्क्रीनशाट और एसआईपी वीओआईपी काॅलिंग साॅफ्टवेयर (एक ऐसा डिजिटल एप्लीकेशन या प्रोग्राम है जो आपको पारंपरिक टेलीफोन लाइनों के बजाय इंटरनेट के माध्यम से वायस और वीडियो काॅल करने की सुविधा देता है) मिले हैं। इसी साफ्टवेयर से विदेशों में काॅल की जाती थी।
तैयार कर रहे थे साफ्टवेयर, सालाना कमाते थे 80-90 लाख
पूछताछ में पता चला कि यह गिरोह अन्य देशों के लोगों से ठगी के लिए दूसरे गिरोह के साथ मिलकर विशेष साॅफ्टवेयर विकसित करा रहा था।
इसके पीछे विदेशी मोबाइल नंबर के बजाय स्थानीय नंबर प्रदर्शित कर काल करने की मंशा थी। यह गिरोह तीन-चार वर्षों से सक्रिय था, जो पहले दूसरे गिरोह के लिए काम करता था।
अकेले गिरोह के सरगना तक सालाना 80 से 90 लाख रुपये पहुंचा रहे थे। इस बीच गिरोह के एक बदमाश पकड़े गए। फिर चारों मिलकर अलग गिरोह बनाए और ठगी करने लगे।
