पटना को बाईपास कर चलेंगी मालगाड़ियां, नेउरा-जटडुमरी नई रेललाइन को मिली मंजूरी, होंगे ये फायदे
रेल संरक्षा आयुक्त ने नेउरा-जटडुमरी नई रेललाइन पर ट्रेन परिचालन को स्वीकृति दे दी है, जिससे अब मालगाड़ियां पटना को ...और पढ़ें

42 किमी की रेललाइन से बदलेगा मालगाड़ियों का रास्ता। सांकेतिक तस्वीर
HighLights
नेउरा-जटडुमरी नई रेललाइन को परिचालन की स्वीकृति मिली।
मालगाड़ियां अब पटना को बाईपास कर चलेंगी।
मुख्य रेललाइन पर ट्रेनों का दबाव कम होगा।
जागरण संवाददाता, पटना। पटना को बाईपास कर मालगाड़ियों के परिचालन का रास्ता साफ हो गया है। नेउरा-जटडुमरी नई रेललाइन पर ट्रेन परिचालन के लिए रेल संरक्षा आयुक्त (CRS) ने स्वीकृति दे दी है।
इससे अब नेउरा-दनियावां-बिहारशरीफ-बरबीघा-शेखपुरा-किउल के रास्ते मालगाड़ियां चलाई जा सकेंगी। इसके चालू होने से दानापुर-पटना-किउल-झाझा मुख्य रेललाइन पर ट्रेनों का दबाव कम होगा।
साथ ही नई पैसेंजर ट्रेनों के परिचालन के लिए भी रास्ता उपलब्ध हो सकेगा। पूर्व मध्य रेल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चंद्र ने मंगलवार को बताया कि रेल संरक्षा आयुक्त ने आठ अक्टूबर को दानापुर मंडल के अंतर्गत 20 किलोमीटर लंबे नेउरा-जटडुमरी रेलखंड का निरीक्षण किया था।
इस दौरान 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से स्पीड ट्रायल भी किया गया। संरक्षा और सुरक्षा मानकों की जांच के बाद इस रेलखंड पर ट्रेन परिचालन की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।
42 किमी लंबी परियोजना का काम पूरा
नेउरा-दनियावां नई रेललाइन परियोजना की कुल लंबाई 42 किलोमीटर है। इसके पहले चरण में जटडुमरी से दनियावां के बीच 22.74 किलोमीटर लंबी रेललाइन का निर्माण पूरा होने के बाद उस पर ट्रेनों का परिचालन शुरू हो चुका है।
दूसरे चरण में नेउरा से जटडुमरी के बीच शेष 20 किलोमीटर रेलखंड का निर्माण पूरा किया गया। इसके बाद आठ अक्टूबर को सीआरएस ने निरीक्षण और स्पीड ट्रायल किया था। अब इस रेलखंड पर परिचालन की स्वीकृति मिलने से पूरी परियोजना के उपयोग का रास्ता साफ हो गया है।
मुख्य रेललाइन पर घटेगा ट्रेनों का दबाव
नई रेललाइन से मालगाड़ियों को पटना जंक्शन और दानापुर के व्यस्त रेलखंड से होकर गुजरने की जरूरत नहीं होगी। वे नेउरा से दनियावां, बिहारशरीफ, बरबीघा और शेखपुरा होते हुए किउल की ओर जा सकेंगी।
इससे दानापुर-पटना-किउल-झाझा मुख्य रेललाइन पर मालगाड़ियों का दबाव कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही, व्यस्त रेलखंड पर यात्री ट्रेनों के परिचालन के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध हो सकेगी। इससे भविष्य में नई पैसेंजर ट्रेनों के संचालन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
