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पटना में सड़क पर तड़पता रहा घायल, नहीं आई Ambulance; पुलिस जीप ने बचाई जान

Published: Thu, 08 Oct 2026 10:53 AM (IST)

पटना के जेपी गंगा पथ पर एक सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को 30 मिनट तक एंबुलेंस नहीं मिली, जिसके ...और पढ़ें

एंबुलेंस नहीं आई तो पुलिस जीप बनी सहारा

एंबुलेंस नहीं आई तो पुलिस जीप बनी सहारा

HighLights

  1. घायल संदीप ओझा को जेपी गंगा पथ पर टक्कर लगी।

  2. एंबुलेंस 30 मिनट देरी से पहुंची, पुलिस ने पहुंचाया अस्पताल।

  3. गोल्डन आवर में उपचार के सरकारी दावों पर उठे सवाल।

जागरण संवाददाता, पटना सिटी(पटना)। सड़क दुर्घटना में घायल को गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंचाने के लिए सरकार की ओर से तमाम इंतजाम किए गए हैं। कैशलेस उपचार से लेकर एंबुलेंस और डायल 112 तक की व्यवस्था का दावा है। लेकिन मंगलवार रात आलमगंज थाना क्षेत्र के महावीर घाट के पास जेपी गंगा पथ पर व्यवस्था की हकीकत कुछ और नजर आई।

आधे घंटे तक सड़क पर पड़ा रहा घायल

फतुहा की आयरन फैक्ट्री में काम कर घर लौट रहे 40 वर्षीय संदीप ओझा को तेज रफ्तार बेकाबू वाहन ने टक्कर मार दी और फरार हो गया।

हादसे के बाद राहगीरों ने डायल 112 को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंच गई, लेकिन करीब आधे घंटे तक एंबुलेंस नहीं पहुंची। गंभीर हालत में संदीप सड़क पर तड़पता रहा।

एंबुलेंस नहीं आई तो पुलिस जीप बनी सहारा

घायल की हालत बिगड़ती देख पुलिसकर्मियों ने गश्ती जीप से ही उसे पीएमसीएच पहुंचाने का फैसला किया। जीप की बीच वाली सीट खाली कर संदीप को किसी तरह उसमें लिटाया गया। जब तक एंबुलेंस घटनास्थल पर पहुंची, तब तक घायल को पीएमसीएच ले जाकर उपचार शुरू कराया जा चुका था।

पिता-परिवार पहुंच गया, लेकिन एंबुलेंस नहीं

संदीप के पिता देवेंद्र कुमार ओझा भी परिवार के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए थे। उन्होंने बताया कि पुलिस मौके पर थी और एंबुलेंस का इंतजार किया जा रहा था। करीब आधे घंटे तक एंबुलेंस नहीं आने पर पुलिस के साथ मौजूद लोगों की मदद से संदीप को गश्ती जीप में अस्पताल भेजा गया।

हर मिनट कीमती, फिर भी इंतजार क्यों?

सड़क हादसे में घायल के लिए शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। जेपी गंगा पथ जैसे व्यस्त मार्ग पर एंबुलेंस के आधे घंटे तक नहीं पहुंचने की घटना व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।

गंभीर चोट या सिर-गर्दन में चोट की स्थिति में घायल को इस तरह जीप में ले जाना भी जोखिम भरा हो सकता था।

गोल्डन आवर बचाने के दावे पर उठे सवाल

सरकार की ओर से दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस उपचार की सुविधा, डायल 112 और एंबुलेंस जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं। आयुष्मान नामित अस्पतालों में 1.50 लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज का प्रावधान भी है।

लेकिन अस्पताल तक समय पर पहुंचाने की व्यवस्था कमजोर पड़ने पर इन सुविधाओं का लाभ मिलने में देरी हो सकती है।

सिविल सर्जन बोले- जांच कराई जाएगी

सिविल सर्जन डॉ. योगेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा कि सामान्य तौर पर एंबुलेंस समय पर पहुंचती है। यदि इस मामले में देरी हुई है तो इसकी जांच कराई जाएगी।

पीड़ित और पुलिसकर्मियों से यह पता किया जाएगा कि एंबुलेंस के लिए किसे और किस समय फोन किया गया था। उन्होंने कहा कि एंबुलेंस व्यवस्था की ट्रैकिंग की व्यवस्था है।

ब्लैक स्पॉट पर 24 घंटे एंबुलेंस की मांग

स्थानीय लोगों ने गायघाट स्थित पुलिस पोस्ट के पास एंबुलेंस की स्थायी तैनाती की मांग की है। उनका कहना है कि जेपी गंगा पथ पर दुर्घटना होने पर यहां से घायलों को पीएमसीएच या एनएमसीएच तत्काल पहुंचाया जा सकेगा। लोगों ने सड़क पर कैमरे और स्पीडोमीटर जैसी निगरानी व्यवस्था की भी मांग की है।

ब्लैक स्पॉट पर एंबुलेंस रहे तैनात

राजधानी में बार-बार दुर्घटना वाले स्थानों को ब्लैक स्पॉट के रूप में चिह्नित किया जाता है, लेकिन इन जगहों पर 24 घंटे एंबुलेंस की स्थायी तैनाती नहीं है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि डायल 112 की तर्ज पर ब्लैक स्पॉट पर एंबुलेंस तैनात हो तो दुर्घटना के बाद गोल्डन आवर में घायल को अस्पताल पहुंचाना आसान होगा।