पटना में हर चौथा क्रिमिनल केस फर्जी, जमीन विवाद में सबसे ज्यादा झूठे मुकदमे
पटना में फर्जी आपराधिक मुकदमों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है, अब हर चार में से एक मामला जांच ...और पढ़ें

पटना में हर चौथा क्रिमिनल केस फर्जी, जमीन विवाद में सबसे ज्यादा झूठे मुकदमे
HighLights
पटना में हर चौथा आपराधिक केस फर्जी पाया गया।
पुलिस का 28% समय फर्जी मामलों की जांच में खर्च।
जमीन विवाद फर्जी मुकदमों की सबसे बड़ी वजह बनकर उभरा।
जागरण संवाददाता, पटना। पटना में फर्जी आपराधिक मुकदमों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। बीते पांच वर्षों में ऐसे मामलों की हिस्सेदारी 19.7 प्रतिशत से बढ़कर 26.4 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यानी अब दर्ज होने वाले प्रत्येक चार मामलों में लगभग एक मामला जांच के दौरान फर्जी पाया जा रहा है। इसमें संगीन मामले शामिल नहीं है।
इस बढ़ती प्रवृत्ति का असर पुलिस की कार्यक्षमता पर भी पड़ रहा है। पुलिस अपने कुल कार्य समय का 28 प्रतिशत हिस्सा फर्जी मामलों की जांच में खर्च कर रही है, जबकि वास्तविक मामलों को 62 प्रतिशत समय ही मिल पा रहा है।
बिहार के सभी जिलों के एसएसपी और एसपी की बैठक में सामने आए आंकड़े पटना में फर्जी मुकदमों की बढ़ती समस्या की गंभीरता को उजागर करते हैं। ये आंकड़े हत्या, लूट, डकैती और चोरी जैसे संगीन अपराधों को छोड़कर अन्य मामलों से संबंधित हैं।
इनमें जमीन विवाद, पैसों के लेनदेन, घरेलू विवाद और मारपीट जैसे मामले शामिल हैं। इनमें भी जमीन विवाद से जुड़े मामलों में फर्जी मुकदमों की संख्या सबसे अधिक है।
जमीन विवाद में हर 10 में चार मामले फर्जी
फर्जी मुकदमों में जमीन विवाद सबसे बड़ी वजह बनकर सामने आया है। जमीन विवाद से जुड़े 560 मामलों में 230 मामले फर्जी पाए गए। इस तरह करीब 41 प्रतिशत मामलों में आरोप सही नहीं मिले। इसके बाद मारपीट के मामले हैं, जिनमें 640 में से 190 मामले फर्जी पाए गए। इनकी हिस्सेदारी 30 प्रतिशत रही।
छेड़छाड़ से जुड़े 500 मामलों में 130 मामले फर्जी पाए गए, जबकि चोरी के 720 मामलों में 100 मामले फर्जी निकले। इन दोनों श्रेणियों में फर्जी मामलों की हिस्सेदारी क्रमशः 26 और 14 प्रतिशत रही।
पुलिस को जमीन विवाद और आपसी रंजिश से जुड़े मामलों में पुलिस को जांच के दौरान विशेष सतर्कता बरतनी पड़ रही है।
कमजोर एफआईआर और समझौते से भी जुड़े मामले
फर्जी मामलों के स्वरूप में कमजोर एफआईआर, आपसी समझौते और दबाव जैसी परिस्थितियां भी सामने आई हैं। उपलब्ध आंकड़ों में 41 प्रतिशत मामलों में समझौता, 23 प्रतिशत में दबाव, 14 प्रतिशत में डर और 10 प्रतिशत में पैसे से संबंधित कारण दर्ज हैं। अन्य कारणों की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत बताई गई है।
आयु वर्ग के लिहाज से 26 से 35 वर्ष के लोग सबसे अधिक प्रभावित श्रेणी में हैं। कुल मामलों में इस आयु वर्ग की हिस्सेदारी 41 प्रतिशत बताई गई है।
पांच साल में फर्जी केसों का आंकड़ा
| वर्ष | कुल केस | फर्जी केस | फर्जी केस प्रतिशत |
|---|---|---|---|
| 2021 | 2,180 | 430 | 19.7 प्रतिशत |
| 2022 | 2,360 | 520 | 22.0 प्रतिशत |
| 2023 | 2,610 | 630 | 24.1 प्रतिशत |
| 2024 | 2,780 | 710 | 25.5 प्रतिशत |
| 2025 | 2,950 | 780 | 26.4 प्रतिशत |
| नोट: (संगीन मामले छोड़कर) | |||
किस प्रकार के अपराध में कितने फर्जी मामले?
| अपराध का प्रकार | कुल केस | फर्जी केस | प्रतिशत |
|---|---|---|---|
| जमीन विवाद | 560 | 230 | 41 प्रतिशत |
| मारपीट | 640 | 190 | 30 प्रतिशत |
| छेड़छाड़ | 500 | 130 | 26 प्रतिशत |
| चोरी | 720 | 100 | 14 प्रतिशत |
कुल मामलों की स्थिति (वर्ष 2025)
- कुल केस - 2,950
- चार्जशीट दाखिल - 1,620 (55 प्रतिशत)
- फर्जी केस - 780 (26 प्रतिशत)
- लंबित - 550 (19 प्रतिशत)
फर्जी केस के पीछे प्रमुख कारण
- जमीन विवाद - 39 प्रतिशत
- निजी दुश्मनी - 26 प्रतिशत
- सामाजिक दबाव - 21 प्रतिशत
- गलतफहमी - 14 प्रतिशत
फर्जी केस में दोनों पक्षों का रिश्ता
- पड़ोसी - 28 प्रतिशत
- रिश्तेदार - 24 प्रतिशत
- परिचित - 21 प्रतिशत
- अजनबी - 17 प्रतिशत
- अन्य - 10 प्रतिशत
पुलिस के समय का उपयोग
- फर्जी केस - 28 प्रतिशत
- असली केस - 62 प्रतिशत
- अन्य कार्य - 10 प्रतिशत
