पटना, जेएनएन। कोरोना ने पूरे विश्व में अपना असर दिखाया है, जिससे पूरा जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। हमारे जीवनकाल में यह पहला मौका है, जिसने पूरी दुनिया को हिलाकर कर रख दिया है। सुना था कि 100 साल पहले प्लेग ने ऐसा ही कहर बरपाया था। मलेरिया, हैजा, चेचक के बाद भारत में आंशिक बीमारियों ने समय-समय पर क्षति पहुंचाई है। साहित्यकार पद्मश्री ऊषा किरण खान आज भी उस दिन को नहीं भूलतीं। 

वर्षों बाद मिला है मौका, घर में बिताएं समय

वे कहती हैं, मुझे याद है वर्ष 2003-04 में सार्स का प्रकोप हुआ उसके बाद कोविड-19 जो विश्व महामारी का रूप ले लिया है। इस महामारी को रोकने में सभी लोगों का साथ देना जरूरी है। सभी लोग अपने परिवार के साथ घर में समय व्यतीत करें। वर्षों बाद कुछ ऐसा हुआ जब लोग अपने परिवार को पूरा समय दे रहे हैं। घर के काम में एक-दूसरे का हाथ बंटा रहे हैं। कोरोना के कारण हमारी दिनचर्या में कुछ खास बदलाव नहीं हुआ, लेकिन अपने शौक को पूरा करने में काफी वक्त मिल रहा है। पहले भी सुबह में उठना पड़ता था वही आज भी सुबह में जग कर अपना सारा काम कर रही हूं। चाय के साथ रेडियो पर आज भी भजन और न्यूज सुन रही हूं। पहले पटना आकाशवाणी से सुबह में रामचरित मानस की चौपाई सुनाई जाती थी, लेकिन इन दिनों रेडियो में भी अपने प्रोग्राम को बदला है।

रचनात्मक कार्य कर रहे लोग

विविध भारती पर रोज सुबह पुराने और नये गीतों को सुन कर दिन की शुरुआत हो रही है। पूजा-अर्चना करने के बाद हल्का नाश्ता करने के साथ साहित्य पर पूरा ध्यान दे रही हूं। कोरोना के कारण लोगों का घर में आना-जाना बहुत कम हो गया है, लेकिन इसके पहले घर पर लोग मिलने के लिए बहुत आते थे। आज सभी लोग अपने घरों में बंद होकर रचनात्मक कार्य करने में लगे है। इसी क्रम में हमें भी अपने अधूरे काम पूरा करने का मौका मिल रहा है। इन दिनों काव्य संग्रह पर पूरा ध्यान है। अधिक समय इन चीजों पर दे रही हूं। इन दिनों सात्विक भोजन के साथ फलों पर विशेष रूप से ध्यान दिया जा रहा है, ताकि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे। बुजुर्ग इन दिनों अपने स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दें। घर से बाहर निकलने का प्रयास न करें।  

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