पटना, जेएनएन। पटना सहित प्रदेश के 14 जिलों में मात्र दो होटल ऐसे मिले हैं जो प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का पालन कर रहे हैं। राज्य में 10 फीसद से भी कम होटल हैं जिन्होंने प्रदूषण नियंत्रण पर्षद से स्थापना और संचालन के लिए अनुमति ली है। पर्षद ने ऐसे होटल प्रबंधनों पर कड़ा रुख दिखाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद की टीमों ने पटना की तुलना में राज्य के अन्य जिलों के अधिक होटलों को जांच में शामिल किया था।


राजधानी के 11 होटलों की जांच हुई जबकि बेगूसराय में 21, भागलपुर में 40, मुजफ्फरपुर में 22, समस्तीपुर में 12, सिवान में 11 होटलों सहित 179 को जांच में शामिल किया गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार होटल उद्योग इकाई स्थापना के लिए सीटीइ और संचालन के लिए सीटीओ का सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है।

प्रदूषण नियंत्रण कानून 2016 के अनुसार ऐसे स्थल जहां 100 लोगों के लिए खानपान की व्यवस्था हो वहां कचरा प्रबंधन का इंतजाम करना अनिवार्य है। बड़े होटलों में जल-मल प्रबंधन के लिए एसटीपी की स्थापना जरूरी है। होटल में उपयोग होने वाले पानी के लिए केंद्रीय भूमि जल प्राधिकरण से भी मंजूरी आवश्यक है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बिहार के होटलों में पाई गई गड़बड़ी के लिए प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। प्रबंधन को 15 दिनों में जवाब देने को कहा गया है।

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