बाढ़ (पटना), संवाद सहयोगी। Bihar Coronavirus Update News: बिहार में सरकार और जिलों का स्‍थानीय प्रशासन लगातार दावे कर रहा है कि ऑक्‍सीजन और स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं का कोई संकट नहीं है, दूसरी तरफ लगातार अस्‍पताल के गेट पर पहुंचकर मरीज दम तोड़ रहे हैं। पटना जिले के बाढ़ स्थित अनुमंडल अस्पताल में सोमवार को एक बुजर्ग ने बगैर इलाज के दम तोड़ दिया। मरीज के स्‍वजनों का कहना है कि काफी कहने के बाद भी अस्‍पताल प्रशासन ने मरीज को ऑक्‍सीजन नहीं लगाया। इस बाबत अस्‍पताल के अधिकारी ने जो कुछ कहा, उसे जानकर आप चौंक जाएंगे।

खुद का ऑक्‍सीजन सिलेंडर लेकर आए थे स्‍वजन

सोमवार की सुबह 10:30 बजे अथमलगोला थाना क्षेत्र के दक्षिणीचक गांव निवासी 70 वर्षीय शिवदयाल सिंह नामक कोरोना संक्रमित व्यक्ति पहुंचा। एंबुलेंस पर आए बुजुर्ग को ऑक्सीजन की सख्त जरूरत थी। परिजनों द्वारा लगाया गया ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म होने की कगार पर था। अस्पताल पहुंचने के डेढ़ घंटे तक परिजन ऑक्सीजन मुहैया कराने की मांग करते रहे।

अस्‍पताल के कर्मी की पैरवी पर डेढ़ घंटे बाद मिला दाखिला

अस्पताल के प्रभारी डॉ. विकासचंद्र चौधरी ने कहा कि मरीज का ऑक्सीजन लेवल 67 था। साथ ही पल्स भी गिरी थी। ऐसी परिस्थिति में कैसे भर्ती किया जाता। स्वास्थ्य विभाग का निर्देश है कि 90 से कम ऑक्सीजन वालों को बॉन्ड भरवा कर ही भर्ती करें। ऐसी परिस्थिति में करीब डेढ़ घंटे तक मरीज ऑक्सीजन का इंतजार करता रहा। आखिरकार अस्पताल के एक स्वास्थ्य कर्मी ने परिजन होने का हवाला भी देता रहा, लेकिन एक नहीं सुनी गई। डेढ़ घंटे बाद जब लोगों ने दबाव बनाया तो उसे वार्ड में लाया गया, जहां बेड पर जाते ही बुजुर्ग की मौत हो गई।

उपाधीक्षक बोले- गंभीर मरीजों को सीधे कर देते हैं रेफर

मरीज के स्‍वजन चंद्र प्रकाश ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि समय पर ऑक्सीजन मिल जाती तो शायद उनकी मौत नहीं होती। इस बाबत उपाधीक्षक ने कहा कि मरीज काफी गंभीर था। कम ऑक्सीजन वाले मरीज को पटना भेजा जाता है। लेकिन सवाल यह है कि यदि समय रहते बुजुर्ग को ऑक्सीजन दे दी जाती तो क्या बिगड़ जाता? बताते चलें कि अस्पताल प्रबंधन के पास ऑक्सीजन की समुचित व्यवस्था है। इसके बावजूद लापरवाही की खबर सामने आई है। वहीं, बाढ़ के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती मरीजों के स्‍वजनों ने भी लापरवाही की बात कहते हुए कहा कि रविवार से मेरा मरीज भर्ती है, लेकिन आज तक उसका समुचित इलाज करने को कोई तैयार नहीं है। केवल दवा ही दी जा रही है, जबकि उनकी हालत काफी नाजुक है।