राज्य ब्यूरो, पटना: ग्यारह वर्षों की सेवा के बावजूद एक भी प्रोन्नति न मिलने से नाराज राजस्व सेवा के अधिकारी प्रतिरोध की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस सेवा के लिए निर्धारित पदों पर दूसरी सेवा के अधिकारी तैनात हो रहे हैं। बार-बार ज्ञापन देने के बावजूद सरकार के स्तर से प्रोन्नति के लिए कुछ नहीं किया जा रहा है। 

पूरे सेवाकाल में पांच प्रोन्नति देने का नियम

मालूम हो कि बिहार राजस्व सेवा का गठन 2010 में हुआ। बिहार लोक सेवा आयोग के जरिए हर साल बहाली हो रही है। पहले से कार्यरत राजस्व अधिकारी भी इसी सेवा से जोड़ दिए गए। किसी भी अधिकारी को पूरे सेवाकाल में पांच प्रोन्नति देने का नियम है। लेकिन, इस सेवा के किसी भी अधिकारी को प्रोन्नति का लाभ नहीं मिल पाया। 2010 में इस सेवा में आए अधिकारी प्रोन्नति का इंतजार कर सकते हैं। लेकिन, प्रोन्नति की उम्मीद में ढेर अधिकारी अवकाश प्राप्त कर चुके हैं। ये ऐसे अधिकारी हैं, जो राजस्व सेवा के गठन के पहले से कार्यरत थे। 

अधिसंख्य अधिकारियों की सेवा संपुष्ट नहीं हो पाई

इस सेवा के अधिकारियों की तैनाती राजस्व अधिकारी, अंचल अधिकारी, भूमि सुधार उप समाहर्ता, सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी, भू अर्जन पदाधिकारी के पदों पर पह होती है। अन्य पदों की बात तो दूर राजस्व सेवा के अधिकारियों की अंचलाधिकारी के पद पर भी प्रभारी के तौर पर ही तैनाती हो रही है। ताज्जुब यह भी कि इस सेवा के अधिसंख्य अधिकारियों की सेवा संपुष्ट नहीं हो पाई है। राजस्व सेवा में नौ वर्षों की सेवा के बाद भूमि सुधार उप समाहर्ता के पद पर पोस्टिंग का प्रविधान है। नौ साल की सेवा पूरी करने वाले राजस्व अधिकारियों की संख्या डेढ़ सौ से अधिक है। इन्हें अवसर नहीं मिल रहा है। संघ की मांग है कि प्रोन्नति भले ही अभी न मिले, कम से इस सेवा के अधिकारियों को प्रभारी के तौर पर भूमि सुधार उप समाहर्ता बना दिया जाए। 

निर्धारित सेवा शर्तों का पालन नहीं हो रहा

बिहार राजस्व सेवा संघ के अध्यक्ष शिवाजी सिंह ने कहा कि बीते 15 वर्षों के दौरान राजस्व सेवा के लिए निर्धारित सेवा शर्तों का पालन नहीं हो रहा है। नतीजा यह कि अधिकारी मूल पद से ही अवकाश ग्रहण कर रहे हैं। हम अपने सदस्यों से अपील करते हैं कि वे संगठित होकर अधिकार हासिल करने की कोशिश करें।