पटना [जेएनएन]। अघोषित संपत्ति भविष्य में टाइम बम नहीं बन जाए, इसका घर बैठे समाधान कर सकते हैं। इसके लिए न वकील को फीस देना है, न हीं सीए की रिपोर्ट चाहिए। बस घर बैठे ऑनलाइन संपत्ति की घोषणा, टैक्स मूल्यांकन और आयकर चुकता प्रमाण पत्र, वह भी बिना किन्तु-परन्तु के प्राप्त कर सकते हैं।

आयकर विभाग आइडीएस (इनकम डिक्लरेशन स्कीम) के तहत सभी बेनामी संपत्ति की घोषणा करने वाले लोगों के बारे में सभी सूचनाएं गुप्त रखने को बाध्य है।

आइडीएस चालू वित्तीय वर्ष से पूर्व अघोषित आय पर प्रभावी होगा, लेकिन 30 सितंबर तक ही मौका मिल सकता है। घोषित संपत्ति का 30 प्रतिशत टैक्स, टैक्स का 25 प्रतिशत जुर्माना और 25 प्रतिशत सरचार्ज चुकता करना होगा। यदि एक बार में इस योजना के तहत टैक्स नहीं जमा कर सकते हैं, तो एक साल के भीतर किश्तों में भुगतान का विकल्प चुन सकते हैं।

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कुल संपत्ति का 45 प्रतिशत टैक्स

यदि आपने एक करोड़ की संपत्ति घोषित की तो 30 लाख रुपये प्रत्यक्ष कर चुकता करना होगा। इसके अलावा निर्धारित टैक्स 30 लाख रुपये का 25 फीसद 7.5 लाख रुपये जुर्माना और इतनी ही राशि सरचार्ज यानी कुल 45 प्रतिशत आयकर विभाग को देकर 55 फीसद कर मुक्त संपत्ति का प्रमाण पत्र मिलेगा।

भ्रष्टाचार के मामले शामिल नहीं आइडीएस में वैसी संपत्ति की घोषणा नहीं कर सकते हैं, जिस पर किसी जांच एजेंसी का मुकदमा चल रहा है। कोई अचल संपत्ति जो भ्रष्टाचार से अर्जित की गई और जांच के दायरे में शामिल हो उन्हें इसका लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि, आयकर की पूर्व में तलाशी या सर्वेक्षण के बाद भी कुछ अघोषित संपत्ति कर निर्धारण से वंचित रह गया हो तो इसे घोषित कर जांच के दायरे से बच सकते हैं।

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जांच-पड़ताल का दायरा समाप्त

आयकर की नई योजना में घोषित चल-अचल संपत्ति और जेवरात के मूल्य पर कोई किन्तु-परन्तु नहीं कर सकता है। इस योजना में आयकर विभाग को जांच-पड़ताल करने का अधिकार नहीं होगा। घोषणा की गई संपत्ति का टैक्स एक मुश्त नहीं चुकाने की स्थिति में प्रथम किश्त 30 नवंबर और दूसरा किश्त मार्च 2017 तक जमा कर सकते हैं। शेष राशि 30 सितंबर 2017 तक जमा करने का विकल्प चुन सकते हैं।

Posted By: Kajal Kumari

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