पटना [राजेश ठाकुर]। बिहार में अब शौचालयों की निगरानी करेंगे मुखिया जी। जी हां, यही सच है। बिहार सरकार ने इस पर गुरुवार को अपनी सहमति दे दी। बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने यह जानकारी मीडिया को दी। इतना ही नहीं, जिले को ओडीएफ घोषित करने से पहले इसकी जांच कराएगी सरकार, ताकि किसी प्रकार की शिकायत नहीं हो। कोई गड़बड़ी अथवा घोटाला न हो। इसके पहले आज विधान मंडल में ओडीएफ में हुई गड़बड़ी को लेकर विपक्ष ने हंगामा किया। परिसर में विपक्ष में शामिल राजद, कांग्रेस समेत अन्‍य दलों के विधायकों ने प्रदर्शन किया। 

मंत्री श्रवण कुमार ने दी जानकारी 

बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि कि प्रदेश में सार्वजनिक शौचालयों की निगरानी मुखिया करेंगे। इसमें किसी तरह की गड़बड़ी नहीं होगी। उन्‍होंने कहा कि आवासहीनों के लिए सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराया जाएगा। बिहार को खुले में शौच से पूरी तरह मुक्‍त किया जाएगा। कई जिले ओडीएफ घोषित किए जा चुके हैं। 

ओडीएफ घोषित होने से पहले हाेगी जांच 

उन्‍होंने कहा कि इतना ही नहीं, अब जो भी जिला ओडीएफ घोषित किया जाएगा, वह पूरी तरह जांच-पड़ताल के बाद ही किया जाएगा। ओडीएफ घोषित करने से पहले सरकार उसकी जांच कराएगी। कुछ जिलों से शिकायत मिलने के बाद सरकार ने यह फैसला लिया है। 

शिकायत मिलने पर विपक्ष का हंगामा 

दरअसल, बिहार में सबसे पहले सीतामढ़ी जिले को ओडीएफ घोषित किया गया। लेकिन अब कहा जा रहा है कि वहां इस मामले में गड़बड़ी हुई है। गड़बड़ी की शिकायत मिलने के बाद विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाया। गुरुवार को सदन और बाहर दोनों जगह इसे लेकर विपक्ष ने नीतीश सरकार को घेरा। विपक्ष ने सीएम नीतीश कुमार से इस्‍तीफे की मांग की। 

राजद-कांग्रेस ने किया प्रदर्शन 

विधान परिषद के बाहर भी राजद व कांग्रेस के विधायकों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में राजद के प्रदेश अध्‍यक्ष रामचंद्र पूर्वे, कांग्रेस के प्रदेश अध्‍यक्ष मदन मोहन झा, कांग्रेस एमएलसी प्रेमचंद मिश्रा समेत अन्‍य विधायक मौजूद थे। वे सब अपनी हाथों में तख्तियां लेकर ओडीएफ में हुई गड़बड़ी का विरोध कर रहे थे। बताया जाता है कि इसी के बाद ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने ओडीएफ के संबंध में सरकार के फैसले की जानकारी दी। 

दो साल पहले तैनात किये गये थे गुरुजी 

गौरतलब है कि दाे साल पहले नवंबर 2017 में बिहार सरकार ने शिक्षकों को खुले में शौच करने वालों पर निगरानी करने का आदेश दिया था। सबूत के लिए सेल्‍फी लेने के लिए भी कहा गया था। इस मामले में सभी बीईओ की तरफ से हाइस्कूल के शिक्षकों को यह निर्देश जारी किया गया था कि वे लोग खुले में शौच करने वालों को रोकेंगे और उनकी कठोर निगरानी करेंगे। बाद में सरकार के इस फरमान का शिक्षक संघों ने विरोध किया था, तब अादेश वापस लिये गये थे।

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