पटना, राज्य ब्यूरो। Bihar Politics: बिहार में भाजपा (BJP) के साथ रहते हुए नीतीश कुमार (Nitish Kumar) पिछले कुछ महीने से सहज महसूस नहीं कर रहे थे। लगातार कई ऐसी घटनाएं होती रहीं, जो उनके लिए परेशानी का कारण बनती गईं। इसी दौरान महाराष्ट्र में शिवेसना (Shiv Sena) के नेतृत्व वाली सरकार का हश्र भी उनके सामने था। उद्धव ठाकरे के साथ उनके ही सहयोगी एकनाथ शिंदे ने विद्रोह किया और अंतत: सरकार की विदाई तय हो गई। बिहार में भी नीतीश को भाजपा से इसी तरह का खतरा महसूस होने लगा था।

एकनाथ शिंदे की तरह बिहार में थे आरसीपी सिंह

एकनाथ शिंदे की तरह यहां भी जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह थे, जो भाजपा के नेतृत्व वाली नरेन्द्र मोदी केंद्र सरकार में मंत्री थे। नीतीश कुमार के साथ उनका लंबा संबंध रहा है। एक अधिकारी के रूप में भी और नेता के रूप में भी लगभग तीन दशक तक नीतीश से जुड़े रहे थे। किंतु पिछले कुछ दिनों से वह पार्टी और नीतीश की लाइन से अलग चल रहे थे।

आरसीपी पर जदयू तोड़ने की कोशिश का आरोप

सूत्रों का दावा है कि आरसीपी सिंह ने जदयू के कई विधायकों को तोड़ने की कोशिश की। नीतीश कुमार के खिलाफ उन्हें भड़काया और भाजपा में शामिल होने न्योता दिया। इनमें से कुछ विधायकों ने बात ऊपर पहुंचाई तो नीतीश को कड़ा और बड़ा फैसला लेना पड़ा।

केंद्रीय मंत्री बनने के बाद बिगड़े नीतीश से संबंध

आरसीपी के केंद्रीय मंत्री बनने के बाद से ही नीतीश कुमार और उनके लोगों से उनके संबंध असहज होते जा रहे थे। नीतीश को भाजपा के हालिया रुख को देखते हुए आरसीपी के रूप में शिंदे नजर आने लगे थे। भाजपा पिछले कुछ वर्षों के दौरान मध्य प्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक में सत्तारूढ़ दलों में विभेद पैदा कर अपनी सरकार बनाने में सफल हुई है। इससे नीतीश को भी लगने लगा था कि भाजपा बिहार में भी महाराष्ट्र की तरह खेल कर सकती है।

पानी सर के ऊपर से गुजरा तो बीजेपी से बनाई दूरी

पहले तो नीतीश कुमार ने आरसीपी सिंह को फिर से राज्यसभा न भेजकर बात को संभालने का प्रयास किया। किंतु पानी जब सर के ऊपर से गुजरने लगा तो नीतीश ने भाजपा से दूरी बनाने का फैसला किया।

Edited By: Amit Alok