पटना। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान पटना (एनआइटी) को नये कैंपस के लिए जमीन का इंतजार जल्द खत्म होगा। संस्थान के निदेशक प्रो. अशोक डे ने सोमवार को श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित संवाददाता सम्मलेन में बताया कि 14 दिसंबर को एनआइटी पटना एवं विज्ञान एवं प्रावैधिकी विभाग (डीएसटी) के बीच अनुबंध होगा। इसके बाद एनआइटी को बिहटा में कैंपस के लिए औपचारिक रूप से 125 एकड़ जमीन मिल जाएगी।

निदेशक के अनुसार राज्य सरकार ने जमीन के लिए बियाडा को 224 करोड़ रुपये पूर्व में दिए थे। बियाडा ने यह जमीन डीएसटी को सौंप दी है। डीएसटी से अब यह एनआइटी को प्राप्त होगी। जमीन प्राप्त होते ही संस्थान चारदीवारी का निर्माण प्रारंभ कर देगा। पूर्व में सरकार की ओर से संस्थान को बिहटा में आइआइटी के करीब कैंपस के लिए 100 एकड़ जमीन देने की घोषणा हुई थी। हालांकि संस्थान को यह जमीन हस्तांतरित नहीं हुई। तीन साल में बिहटा कैंपस में पहले चरण का निर्माण पूरा होगा। निदेशक के अनुसार बिहटा के नए कैंपस के साथ ही पटना कैंपस को भी संस्थान अपने पास रखेगा। भविष्य में पटना कैंपस में 3000 एवं बिहटा कैंपस में इससे तीन गुना छात्रों के पढ़ने की सुविधा होगी। बिहटा कैंपस छात्रों एवं शिक्षकों के लिहाज से पूरी तरह आवासीय सुविधा वाला होगा।

: आर्थिक रूप से पिछड़ा लगा बिहार : बीओजी चेयरमैन

मनीष सभरवाल पहली बार बिहार के साथ ही एनआइटी के पटना कैंपस आए थे। जब उनसे पूछा गया कि पहली नजर में बिहार कैसा लगा तो उनका जवाब था- यह आर्थिक रूप से पिछड़ा लगा। हालांकि अब कुछ हद तक यह ऐसी स्थिति में पहुंच गया है कि उच्च शिक्षा में राज्य में भी छात्रों के पास काफी विकल्प हैं। नौकरी को लेकर अभी राज्य में इस तरह के विकल्प नहीं हैं। उम्मीद है कि इस दिशा में भविष्य में सुधार आएगा।

फैकल्टी उन्नयन, कैंपस की आधारभूत संरचना सुधारने पर जोर :

इस वर्ष 22 जनवरी को एनआइटी पटना के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन की जिम्मेदारी संभालने वाले प्रसिद्ध उद्योगपति एवं टीमलीज के संस्थापक मनीष सभरवाल भी इस अवसर पर मौजूद थे। उन्होंने बताया कि अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद वे पहली बार कैंपस आए थे। फैकल्टी उन्नयन, कैंपस की आधारभूत संरचना एवं छात्रों के प्लेसमेंट पर उनका पूरा फोकस रहेगा।