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NHRC का बड़ा फैसला: लापरवाही से हुई 5 मौतों पर 30 लाख के मुआवजे का आदेश, 73 मामलों की हुई सुनवाई

Published: Fri, 09 Oct 2026 12:20 AM (GMT+05:30)Updated: Fri, 09 Oct 2026 12:35 AM (GMT+05:30)

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पटना में 73 मामलों की सुनवाई के बाद अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया। ...और पढ़ें

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HighLights

  1. एनएचआरसी ने 73 मानवाधिकार मामलों की सुनवाई की।

  2. लापरवाही से हुई 5 हिरासत मौतों पर 30 लाख मुआवजा।

  3. अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया।

जागरण संवाददाता, पटना। मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों में कार्रवाई और पीड़ितों को राहत देने में लापरवाही पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया है। आयोग की दो दिवसीय पूर्ण पीठ की कैंप सिटिंग व खुली सुनवाई के समापन पर गुरुवार तक कुल 73 मामलों की सुनवाई हुई।

आयोग ने बंधुआ मजदूरी, बाल श्रम, पुलिस-न्यायिक हिरासत में मौत, महिलाओं-बच्चों के खिलाफ अपराध जैसे गंभीर मामलों में संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई का हिसाब मांगा। आयोग ने बताया कि पहले दिन की कार्रवाई में एक करोड़ से अधिक मुआवजा दिए जाने की जानकारी राज्य सरकार ने दी। दूसरे दिन भी पुराने मामलों के अनुपालन की समीक्षा कर पीड़ित परिवारों को भुगतान की स्थिति देखी गई।

दूसरे दिन आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यन ने बंधुआ मजदूरी के 10 मामलों की सुनवाई की। एक मामले में डीएम की ओर से जेल अधिकारी के प्रतिनिधि के रूप में उपस्थित होने पर आयोग ने नाराजगी जताई। साथ ही हिरासत में मौत के पांच मामलों में लापरवाही पाए जाने पर 30 लाख रुपये मुआवजे तो कथित बंधुआ मजदूरी के एक मामले में एनएचआरसी के महानिदेशक (अन्वेषण) को मौके पर जाकर जांच करने का निर्देश दिया।

बाल श्रम के दो मामलों में श्रम सचिव से निर्धारित प्रारूप में विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई। वहीं, आयोग की खंडपीठ के सदस्यों, न्यायमूर्ति डा. विद्युत रंजन सारंगी व विजय भारती सयानी ने 33 मामलों की सुनवाई की। 10 मामलों में अनुपालन रिपोर्ट व मृतकों के निकटतम स्वजन को 40 लाख रुपये मुआवजे का प्रमाण मिलने पर मामलों को बंद कर दिया गया।

इन मामलों पर आयोग गंभीर

सुनवाई के बाद आयोग ने गैर सरकारी संगठनों, सिविल सोसायटी व मानवाधिकार कार्यकर्ताओं से संवाद किया। इस क्रम में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ महिलाओं व बच्चों के खिलाफ अपराध, मानव तस्करी, बाल श्रम, स्कूलों की सुरक्षा, शेल्टर होम, सुधार गृह और आवासीय देखभाल केंद्रों की निगरानी जैसे मुद्दों पर चर्चा की। आयोग इन जगहों पर मानवाधिकारों का हनन होने पर संबंधित अधिकारी से रिपोर्ट मांगने के साथ आवश्यक कार्रवाई या मुआवजे की सिफारिश कर सकता है।

अधिकारियों को आयोग को रिपोर्ट भेजने में देरी, संबंधित कानूनों व सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की जानकारी और बंधुआ मजदूरों की पहचान, बचाव, मुक्ति और पुनर्वास की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने को कहा। साथ ही शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन और उससे जुड़ी मौतों पर मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों में अधिकारियों को संवेदनशील बनाने पर जोर दिया।

बिहार में मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों में आई कमी

आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यन ने कहा कि प्रदेश में मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों में कमी आई है। वहीं, उन्होंने बेउर जेल में कैदी की मौत मामले में कहा कि पीएमसीएच के डाक्टरों ने हृदय रोग के उपचार के लिए आइजीआइसी ले जाने का कहा था लेकिन जेल पुलिस ने उसे वापस ले जाकर बैरक में बंद कर दिया। इस लापरवाही के लिए कैदी के स्वजन को पांच लाख मुजावजा देने का निर्देश दिया गया है।

महिला पीड़िता को सुरक्षा देने के लिए समर्पित हेल्पलाइन

मनेर क्षेत्र में 10 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या मामले में आयोग ने उसके निकटतम स्वजन को पांच लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है। न्यायिक हिरासत में मौत के दो अन्य मामलों में जेल व चिकित्सा अधिकारियों की लापरवाही पाए जाने पर 15 लाख मुआवजा देने का निर्देश दिया गया। वहीं, एक महिला पीड़िता को सुरक्षा देने के लिए समर्पित हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध कराने का निर्देश डीजीपी को दिया ताकि खतरा होने पर वह इस नंबर पर संपर्क कर सके। इस मामले की जांच को आयोग ने एसआइटी गठित करने को भी कहा है।दो दिन की कार्रवाई - एक नजर में

दो दिन की कार्रवाई एक नजर में
30 मामले आयोग के अध्यक्ष ने बुधवार को सुने।
19 मामले सिफारिशों के अनुपालन के बाद बंद।
10 मामले दूसरे दिन अध्यक्ष ने बंधुआ मजदूरी से संबंधित सुने।
33 मामले सदस्यीय खंडपीठ ने दूसरे दिन सुने।
10 मामले 40 लाख रुपये भुगतान के प्रमाण के बाद बंद।
5 मामले हिरासत में मौत, 30 लाख रुपये राहत की सिफारिश।
1 करोड़ रु. से अधिक पहले दिन मुआवजा भुगतान की रिपोर्ट।
03 मामले शिकायतकर्ता के उल्लेख पर सूची से अलग तत्काल सुनवाई।