पटना, जेएनएन। पटना में अगर कबाड़ खाना देखना हो तो ज्यादा दूर जाने के जरूरत नहीं। यहां कानूनी पचड़े में फंसने के कारण लोग अपना वाहन नहीं छुड़ा पा रहे हैं। लिहाजा थाने में खड़े-खड़े गाड़ियां कबाड़ हो गई हैं। किसी थाने में एक-दूसरे के ऊपर गाड़ियां रखी हुई हैं तो कहीं जगह के अभाव में सड़क पर रखे-रखे मिट्टी में मिल रही हैं। नीलामी के इंतजार में करोड़ों की ये गाड़ियां थाने में कबाड़ में तब्दील हो रही हैं। गाड़ियों की स्थिति ऐसी हो गई है कि अगर नीलामी हुई तो किलो के भाव बिकेंगी।

कबाड़खाने में तब्दील हो गया है कोतवाली थाना

कोतवाली थाना परिसर कबाड़खाने में तब्दील हो चुका है। मेन गेट पर चार पहिया वाहनों का पहाड़ नजर आता है। कई दोपहिया वाहन तो सड़ चुके हैं। दो सौ से अधिक वाहनों में सिर्फ चेसिस और इंजन बचे हैं। डीएसपी ऑफिस के पीछे भी जब्त बाइकें सड़ रही हैं।

पुलिसकर्मियों के वाहन भी नहीं हो पाते खड़े

थाने में खड़ी गाड़ियां कबाड़ में तब्दील होने के साथ ही थानों की सूरत भी खराब कर रही हैं। बुद्धा कॉलोनी, राजीव नगर, पाटलिपुत्र, दानापुर, कदमकुआं, कंकड़बाग, जक्कनपुर सहित तीन दर्जन से अधिक थाने ऐसे हैं जिनके पास वाहनों को खड़ा करने की जगह नहीं बची है। राजीवनगर व बुद्धा कॉलोनी थानों का परिसर काफी छोटा है। वहां पर पुलिसकर्मियों के वाहनों के अलावा कुछ ही गाड़ियां खड़ी की जा सकती हैं।

वाहनों की वजह से कई बार हो चुके हादसे

गांधी मैदान, बुद्धा कॉलोनी और पाटलिपुत्र थाने की स्थिति ऐसी है कि जब्त गाड़ियां सड़क किनारे ही खड़ी कर दी गई हैं जिससे हर दिन यहां जाम की समस्या व हादसे की संभावना बनी रहती है। अप्रैल 2018 को राजीवनगर थाना परिसर में ही जब्त रखीं तीन कार व एक ट्रैक्टर जलकर राख हो गई थीं। मई 2017 को शाम में कोतवाली थाने में आगजनी की घटना हुई थी। लगभग आधा दर्जन बाइक, ऑटो जल गए थे। पिछले साल बुद्धा कॉलोनी थाना के पास मैदान में खड़ी दो दर्जन से अधिक गाड़ियां जलकर राख हो गई थीं।

रिकॉर्ड में नहीं रहता वाहनों का हिसाब

जब्त वाहनों की सीजर लिस्ट बनाकर मालखाने में इंट्री होती है। सभी जब्त वाहनों को सुरक्षित रखना होता है। दूसरी तरफ थानों की स्थिति यह है कि अस्सी फीसद थानों का मालखाना अपडेट नहीं है। इसी वजह से कोई थानेदार मालखाने का प्रभार लेने से बचता है। एक पुलिस अधिकारी की मानें तो कई थानेदारों को मालखाने की पूरी जानकारी तक नहीं।

तस्करों से जब्त वाहनों की बढ़ी संख्या

थाना परिसर में रखे वाहन अधिकतर चोरी या फिर शराब तस्करों से जब्त किए गए हैं। ऐसे वाहनों के बारे में जानकारी नहीं होती है। कागज भी नहीं होता है। इसकी वजह से वाहनों को जब्त कर लिया जाता है। कई मामलों में वाहनों के तात्कालिक मूल्य के हिसाब से उन्हें छुड़वाना काफी महंगा पड़ता है। इस कारण लोग गाड़ी को थाने में छोड़ देते हैं। वाहन चोरी की घटनाओं में कोर्ट से वाहन की सुपुर्दगी नहीं मिलने तक गाड़ियां बदहाल हालत में थाने में ही पड़ी रहती हैं।

सूची तैयार करने का दिया निर्देश

डीआइजी राजेश कुमार का कहना है कि सभी थानेदारों को निर्देश दिया जाएगा कि 15 दिनों के अंदर जब्त वाहनों की सूची तैयार करें। एएसपी को नोडल अधिकारी बनाया जाएगा। फिर एसडीओ और डीएसपी के साथ बैठक की जाएगी। इसमें डीटीओ और एमवीआइ के पदाधिकारियों को भी शामिल किया जाएगा। जो वाहन डिस्पोज होने के लायक हैं उन्हें चिह्न्ति किया जाएगा।

Posted By: Akshay Pandey

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