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बिहार विधान परिषद चुनाव: एनडीए महागठबंधन से झटकेगा दो सीटें, RJD-कांग्रेस को एक-एक सीट का नुकसान

Published: Wed, 27 May 2026 07:47 AM (IST)

महागठबंधन को विधान परिषद की दो सीटें गंवानी पड़ सकती हैं, जिसमें एक राजद और एक कांग्रेस की होगी, जबकि ...और पढ़ें

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राज्य ब्यूरो, पटना। Bihar News: बिहार विधान परिषद में महागठबंधन की दो सीटें एनडीए झटक लेगा। इसमें एक सीट राजद और दूसरी कांग्रेस की होगी। अपनी तीसरी सीट बचाने के लिए भी महागठबंधन को कठिन चुनौती से जूझना होगा।

राज्यसभा चुनाव में हुई धींगामुश्ती के बाद विशेषकर राजद निर्विरोध निर्वाचन को लेकर आश्वस्त नहीं। हालांकि, शीर्ष नेतृत्व के स्तर से यह तय है कि किसी भी तरह की चुनौती से पीछे नहीं हटा जाएगा।

बहरहाल, विधान परिषद के लिए उप चुनाव वाली सीट एनडीए में जदयू को मिलनी तय है। उसके बाद बची नौ सीटों में सहयोगी दलों के बीच बंटवारा होना है।

मंत्री दीपक प्रकाश के लिए राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) को एक सीट पक्की मानी जा रही। इसके अलावा लोजपा-रामविलास और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) भी एक-एक सीट के लिए दबाव बनाए हुए हैं।

हालांकि, अंतिम तौर पर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है। महागठबंधन में एकमात्र राजद की दावेदारी है। हालांकि, राज्यसभा चुनाव में नैतिक समर्थन के हवाले से एआइएमआइएम द्वारा दबाव बढ़ाए जाने की आशंका भी है।

अगर ऐसी स्थिति बनी तो उस एक सीट पर भी दांव आजमाने से एनडीए शायद ही चूके। विधानसभा में अभी 242 सदस्य हैं। उनमें 201 एनडीए के और 35 महागठबंधन के हैं।

एआइएमआइएम के पांच सदस्य हैं और एक विधायक बसपा से। बसपा का झुकाव प्राय: सत्ता-पक्ष के साथ रहा है। महागठबंधन के समर्थन में एआइएमआइएम उसी हद तक आगे बढ़ेगा, जिससे सीमांचल में उसकी अपनी संभावना पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़े।

यहां मान-मनव्वल की स्थिति बनेगी। इसके अतिरिक्त महागठबंधन के विधायकों को एकजुट रखने की चुनौती भी है, विशेषकर कांग्रेस के उखड़े रुख के कारण।

राज्यसभा की पांच सीटों पर हुए चुनाव के दौरान महागठबंधन अपने विधायकों को एकजुट नहीं रख पाया था। परिणाम यह हुआ कि राजद प्रत्याशी एडी सिंह को मुंह की खानी पड़ी।

कांग्रेस पूरी तरह हो जाएगी आउट

विधानसभा चुनाव के कुछ माह पहले तक विधान परिषद में कांग्रेस के चार सदस्य हुआ करते थे। एक-एक करके तीन विदा हो गए। बचे एकमात्र समीर कुमार सिंह। इस बार के समीकरण में कांग्रेस के लिए कोई संभावना ही नहीं बनती। यानी कि विधान परिषद में अब उसका खाता खाली हो जाएगा।

राजद में मुंहामुंही कई बातें

राजद में यह चर्चा जोरों पर है कि प्रत्याशी कोई मालदार ही होगा। पार्टी के लिए कोष के प्रबंधन से लेकर दूसरे तमाम खर्च हैं। राबड़ी देवी के मुंहबोले भाई सुनिल कुमार सिंह प्रबल दावेदार हैं, लेकिन अंतिम तौर पर तय नहीं, क्योंकि रिक्त दूसरी सीट का प्रतिनिधि मुसलमान है। यहां जनाधार से संबंधित पेच फंसेगा।

एक सीट पर जीत के लिए चाहिए 25 विधायक

इस बार एक सीट पर जीत के लिए 25 विधायकों की आवश्यकता होगी। इस तरह नौ सीटों पर चुनाव के बाद भी 17 वोट शेष बच जाएंगे। ये 17 वोट अतिरिक्त प्रत्याशी की संभावना बना रहे। राज्यसभा चुनाव में हुई उठापटक के बाद इस संभावना को खारिज भी नहीं किया जा सकता।

विधानसभा में संख्या बल

दल का नाम सीटें
भाजपा (BJP) 88
जनता दल (यूनाइटेड) - जदयू 85
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) - LJP(RV) 19
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) 25
अखिल भारतीय मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) 5
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) 6
हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) 5
राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) 4
भाकपा-माले 2
माकपा (CPI-M) 1
आइआइपी 1
बहुजन समाज पार्टी (BSP) 1
रिक्त (बांकीपुर, पटना) 1

(नोट: पटना का बांकीपुर सीट रिक्त है।)