पटना। नाबार्ड (नेशनल बैंक फार एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट) ने राज्य में वित्तीय वर्ष 2021-22 में पिछले साल की तुलना में कृषि के लिए दो हजार करोड़ से अधिक का ऋण प्रदान किया। वित्तीय सहायता देने में पिछला रिकार्ड तोड़ते हुए नाबार्ड ने एमएसपी में धान खरीद की सुविधा, ग्रामीण आधारभूत परियोजनाओं के सृजन एवं इससे आधारित रोजगार को बढ़ावा देने, पैक्स के कंप्यूटरीकरण, आजीविका संबंधी कौशल विकास के लिए और किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), वाटरशेड तथा आदिवासी विकास परियोजनाओं में विभिन्न संवर्धनात्मक प्रयासों को बल दिया। इसकी जानकारी नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक डा. सुनील कुमार ने दी।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2021-22 के दौरान नौ हजार आठ सौ 36 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी गई, जो कि वर्ष 2020-21 में सात हजार एक सौ 29 करोड़ रुपये प्रदान किए गए। ये पिछले वर्ष की तुलना में 39 प्रतिशत अधिक है। इसमें विभिन्न वित्तीय संस्थानों को चार हजार नौ सौ 73 करोड़ रुपये की पुनर्वित्त सहायता शामिल है ताकि प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र को उधार देने के लिए जमीनी स्तर पर ऋण प्रवाह में तेजी लाई जा सके। राज्य में एफपीओ को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय क्षेत्र योजना के तहत इस साल 31 मार्च तक नाबार्ड ने कुल 36 संगठनों का संवर्धन किया। उम्मीद है कि सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी के साथ आने वाले वर्षों में उत्पाद आधारित एफपीओ की मौजूदगी की प्रक्रिया में तेजी आएगी।

मुख्य महाप्रबंधक ने बताया कि कोरोना काल में प्रवासी मजदूरों के कौशल विकास के लिए गया, रोहतास, मुजफ्फरपुर और वैशाली जिलों में चार हजार प्रवासियों को राजमिस्त्री व इलेक्ट्रीशियन का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इसके अलावा गया, मुजफ्फरपुर और रोहतास जिलों के कैदियों को कौशल आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी प्रदान किया गया, ताकि वे जेल से बाहर निकलने पर आजीविका सुनिश्चित कर सकें।

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