पटना, आशीष शुक्ल। पटना में जितनी तेजी से जमीन की कीमतें बढ़ी हैं, उसी तेजी से इसके प्रति मोह यहां रिश्ते-नाते की अहमियत को भी खत्म कर रही हैं। कहीं जमीन के लिए पत्नी, पति की हत्या की सुपारी दे रही तो कहीं बाप ही बेटे का दुश्मन बन गया है।

हाल के दिनों में कहीं एक इंच तो कहीं एक बीघा जमीन के लिए दर्जन भर से अधिक लाशें गिर चुकी है। अधिकांश मामले पटना जिले के पश्चिमी क्षेत्र के हैं, जहां जमीन की बढ़ती कीमत के सामने अपनों का खून सस्ता होता जा रहा है।

जमीन के लिए वकील को अपनों ने ही मार डाला

बुधवार को शास्त्रीनगर थाना क्षेत्र के राजवंशीनगर में दिनदहाड़े अधिवक्ता जितेन्द्र की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस की तफ्तीश में पता चला कि हत्या के पीछे अधिवक्ता के अपने लोगों का ही हाथ है। एक बीघा जमीन के लिए अधिवक्ता की हत्या कर दी गई।

छह महीने में एक दर्जन से ज्यादा हत्याएं

हालांकि पिछले छह माह में एक दर्जन से अधिक हत्याएं भूमि विवाद में हुईं हैं। सर्वाधिक हत्या के मामले फुलवारीशरीफ, बेउर, रूपसपुर, बिहटा, दानापुर, नौबतपुर और सगुना इलाके में हुए। पश्चिमी क्षेत्र को छोड़ दिया जाए तो अन्य थाना क्षेत्रों में ज्यादातर बदमाश भी गैंगवार में मारे गए।

भाई-भाभी की हत्या, छोटे भाई को मारी गोली 

पुलिस सूत्रों की मानें तो इसमें अधिकांश मामलों में घर के लोग ही दुश्मन बने या फिर प्रॉपर्टी को लेकर साथी। इसी साल नवंबर माह के आखिरी सप्ताह में बिहटा थाना क्षेत्र के इटवा दोघड़ा गांव में दो भाइयों के बीच जमीन के एक हिस्से के बंटवारे को लेकर विवाद हो गया। मामला थाने तक गया। फिर आपसी समझौते के बाद दोनों घर लौट आए। लेकिन, अंदर-अंदर दोनों तरफ जमीन का पूरा हिस्सा लेने जिद थी।

फिर से दोनों में विवाद हुआ। विवाद में छोटे भाई ने जमीन के लिए अपने ही बड़े भाई और भाभी की गोली मारकर हत्या कर दी। बीते अगस्त माह में बिहटा के शक्तिनगर में जमीन और संपत्ति के चलते पिछले कई साल से चले आ रहे विवाद ने खूनी रूप ले लिया। छोटन ने अपने ही छोटे भाई रामाशंकर से मारपीट की। इसके बाद छोटन ने रामाशंकर के सीने में दो गोलियां उतार दीं, जिससे उसकी मौत हो गई। 

मुख्यालय का आदेश बेमानी

भूमि विवाद में हत्या जैसी गंभीर घटनाओं की बढ़ोत्तरी पर चिंता जताते हुए पुलिस मुख्यालय ने सभी थानाध्यक्ष को सप्ताह में एक दिन जनता दरबार लगाने का आदेश दिया था। जनता दरबार में अंचलाधिकारी को भी मौजूद रहने को कहा गया था। लेकिन, मुख्यालय का आदेश थाना पुलिस के लिए बेमानी साबित हुआ।

पूछने पर अंचलाधिकारी कहते हैं कि हमारे क्षेत्र में कई थाने होते हैं। हम एक समय पर हर जगह उपस्थित नहीं हो सकते और हर दिन जनता दरबार में मौजूद रहना संभव नहीं है। थानाध्यक्ष नियमित रूप जनता दरबार लगाएं और भूमि विवाद के मामले को अंचल कार्यालय में भेजें, ताकि आमजन की समस्याओं का समाधान हो सके।

वहीं, थानाध्यक्ष का कहना है कि अंचलाधिकारी को पत्राचार करने के कई दिनों बाद रिपोर्ट आती है। तब तक विवाद खूनी संघर्ष में बदल जाता है। पीडि़त थाने में तत्काल निदान के लिए पहुंचता है। प्रक्रिया इतनी लंबी है कि दोनों पक्ष संयम खो देते हैं और विवाद दूसरा रूप ले लेता है।

कहा डीआइजी ने-

भूमि विवाद को लेकर थाना पुलिस गंभीर बने। जहां जरूरत हो, वहां अंचलाधिकारी और एसडीएम से समन्वय बनाकर लोगों की समस्याओं का निदान करें। 

राजेश कुमार, डीआइजी

Posted By: Kajal Kumari