दैनिक जागरण के माय सिटी-माय प्राइड अभियान में उठाए गए मुद्दे धीरे-धीरे अंजाम की ओर बढ़ने लगे हैं। शनिवार को जागरण कार्यालय में आयोजित कोलेबरेशन राउंड टेबल कांफ्रेंस (आरटीसी) में शहर की कई समस्याओं के निदान की पहल की गई।

मेयर सीता साहू ने बताया कि पटना को स्मार्ट बनाने के लिए निगम के अधिकारी और पार्षद दूसरे शहरों से भी सीख ले रहे हैं। हाल ही में निगम के अधिकारी इंदौर और पुणे जैसे शहर गए थे। अब पार्षदों को भेजने की तैयारी है, ताकि वे दूसरे शहरों के अच्छों कामों को यहां लागू कर सके। वेंडिंग जोन से लेकर स्मार्ट सिटी तक कई बदलाव जल्द शहर में दिखेंगे।

नगर निगम के उप नगर आयुक्त विशाल आनंद ने बताया कि अतिक्रमण से शहर को आजादी दिलाने के लिए हल्लाबोल अभियान शुरू हो गया है। सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए अत्याधुनिक मशीनें मंगाई जा रही हैं। पूरे शहर को जगमग करने के लिए एलईडी लाइट लगाई जा रही है।

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मेडिकल के क्षेत्र में पीएमसीएच समेत बड़े अस्पतालों से मरीजों का दबाव घटाने के लिए रेडक्रॉस सोसाइडी के डॉ. विनय बहादुर सिंह ने निगम के सभी 75 वार्डों में पॉली क्लीनिक खोलने की पहल की। इसपर मेयर ने जल्द पार्षदों के साथ बैठक आयोजित कर इसकी रूपरेखा तय करने का भरोसा दिलाया।

 

इसी तरह शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रही संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए विशेष क्लास आयोजित करने आदि की पहल की। कार्यक्रम में हेल्थ, एजुकेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर, इकोनॉमी और सेफ्टी से जुड़े 30 से अधिक विशेषज्ञों ने शिरकत की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

मेयर सीता साहू ने कहा कि जागरण के द्वारा उठाए गए हर मुद्दे पर काम करने की कोशिश होगी। पटना का कोई गली-मोहल्ला ऐसा नहीं होगा, जहां अंधेरा रहेगा। तेजी से शहर को रोशन करने का काम चल रहा है। वार्डों में रेडक्रॉस के सहयोग से पॉली क्लिनिक खोलने के प्रस्ताव को जल्द ही अपनाया जाएगा। इसके लिए जो भी आवश्यकता होगी। नगर निगम पूरा कराने की दिशा में कार्रवाई करेगा। लोगों को जागरूक करने के लिए भी विभिन्न तरह के कार्यक्रम चलाए जाएंगे।

पटना नगर निगम क्षेत्र में दो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट 2020 तक चालू हो जाएगा। किसी घर का सीवर लाइन नाले में नहीं बहेगा। शहर में डेढ़ माह के भीतर 100 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक मशीनें आएंगी। इसका रखरखाव पांच सालों तक कंपनी करेगी। निगम 75 हजार स्ट्रीट लाइट लगा रहा है। इसका रखरखाव भी पांच सालों तक कंपनी खुद करेगी। अंचलों में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र मुहैया कराने की व्यवस्था कर दी गई है। 750 डस्टबिन लगाए जा रहे हैं ताकि रोड पर कहीं कचरा फेंकने की नौबत नहीं आए।
- विशाल आनंद, उप-नगर आयुक्त

रेडक्रॉस सोसाइटी हर वार्ड में क्लीनिक खोलने को तैयार है। इसके लिए पार्षदों का सहयोग जरूरी होगा। मेयर के सहयोग से यह काम हो सकता है। हर वार्ड में इलाज की सुविधा होगी तो बड़े अस्पतालों का लोड खुद ब खुद कम होगा। पीएमसीएच के डॉक्टरों को भी सर्दी, जुकाम, डायरिया और डेंगू के मरीजों से फुर्सत मिलेगी।
- डॉ. विनय बहादुर सिंह, अध्यक्ष, रेडक्रॉस सोसाइटी

साफ-सफाई और रहन-सहन से लोग जागरूक होंगे तो बीमारी कम होगी। अभी जरूरत है कि प्राथमिक स्वास्थ्य उप-केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र सीधे पीएमसीएच मरीज भेजने के बजाय जिला और सदर अस्पताल रेफर करें। देखा जा रहा है कि पीएमसीएच के डॉक्टरों को सामान्य मरीजों के इलाज में समय बीत जाता है। पीएचसी में हेल्थ चेकअप की व्यवस्था सुदृढ़ करने से स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होंगी।
- डॉ. अशोक कुमार, पीएमसीएच

आज किसी बच्चे से पूछे कि क्या बनना है तो जवाब मिलेगा डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस, आईपीएस, जज और प्रशासनिक सेवा का ऑप्शन बताएगा। शिक्षक बनना कोई नहीं चाहता। हर क्षेत्र का असफल व्यक्ति शिक्षा के क्षेत्र में आता है। आज बच्चे माता-पिता से अधिक शिक्षक की बात मानते हैं। बच्चे की पढ़ाई की रुचि को समझना जरूरी है, इसलिए शिक्षकों को बेहतर प्रशिक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए।
- डॉ. कुमार अरूणोदय, शिक्षाविद्

पटना में औद्योगिक क्षेत्र बहुत कम है। औद्योगिक क्षेत्र ऐसा बने, जहां कोई भी बाहरी निवेशक आए और सीधे कारोबार आरंभ कर सके। आधारभूत संरचना में पहले चाहे जो भी त्रुटि रही हो आगे सुधार और नियोजित होना चाहिए। इससे रोजगार और अर्थव्यवस्था में सुधार की गुंजाइश है। यहां सड़क और नाला का प्लान कोई बनाता है और कार्यान्वयन कोई और करता है। रखरखाव किसी और को करना होता है। शहर में वेंडिंग जोन भी अर्थव्यवस्था से सीधे जुड़ा है। इस क्षेत्र में काम करने की जरूरत है। रोड का लेबल फिक्स हो।
- केपीएस केसरी, अध्यक्ष, बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन

पटना महानगर योजना समिति काम करने को तैयार है, मगर बैठक जरूरी है। समय पर बैठक हो और मास्टर प्लान के अनुसार नियोजित विकास की रणनीति बने तो सुधार दिखाई देगा। कम से कम तीन माह में एक बैठक होनी चाहिए ताकि महानगर योजना क्षेत्र में नियोजित विकास के कार्य हो सके।
- सतीश कुमार, उपाध्यक्ष, महानगर योजना समिति

आज माता-पिता से अधिक शिक्षक की बातें बच्चे समझते हैं। शिक्षकों को ऐसी शिक्षा की जरूरत है कि बच्चों के मनोदशा को पढ़कर उचित मार्ग दर्शन करे। रोटरी की ओर से ऐसे कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। टीचर्स ट्रेनिंग के माध्यम से बेहतरी का प्रयास किया जा रहा है।
- वीणा गुप्ता, लायंस क्लब

घरों में एसी, कंप्यूटर, वाशिंग मशीन, आयरन, मोबाइल और गैस सिलेंडर आग को जन्म देते हैं। यदि सतत निगरानी नहीं रखी जाए तो मामूली चूक से बड़ी घटना हो सकती है। जरूरत है कि उचित वायरिंग, बिजली का लोड और किचेन में चूल्हा, रेगुलेटर और सिलेंडर की जांच कर उपयोग में लाएं। लोगों को जागरूक करने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
- सुरेन्द्र सिंह, फायर सेफ्टी ऑफिसर

शहर में लड़कियों और महिलाओं के साथ छेड़खानी, चेन, पर्स-मोबाइल छीनकर अपराधी भाग निकलते हैं। लड़कियों को ऐसे अपराध से सचेत रहने और बचाव के उपाय करना जरूरी है। उन्हें आत्मरक्षा के लिए प्रशिक्षण के साथ सुरक्षा का भाव पैदा करने की जरूरत है।
- जयशंकर सिंह, समाजसेवी

मैंने अपनी आंखों से देखा कि सड़क पर घूमने वाली गाय एक स्कूटी सवार लड़की की ओर अचानक गई और सीधे बस के चक्का के नीचे चली गई। शहर में आवारा पशुओं से मुक्त कराने की जरूरत है। शहर के लिए ऐसी बुनियादी चीजों पर प्राधिकार को ध्यान देना चाहिए।
- पिंकी तुलसियान

शहर में सुरक्षा और न्याय के बाद कल्याण की बात आती है। ऑनलाइन प्राथमिकी दर्ज कराने की व्यवस्था होनी चाहिए। ट्रैफिक सिस्टम दुरुस्त हो ताकि दुर्घटनाएं थम सके। सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, लेकिन 50 फीसद खराब है।
- रमेश कुमार चौबे, समाजसेवी

बुनियादी शिक्षा के कार्यक्रम फ्लाप हो रहे हैं, क्योंकि गतिविधि आधारित पढ़ाई की व्यवस्था नहीं है। सभी सरकारी स्कूलों को हैप्पी स्कूल के रूप में विकसित करने की जरूरत है। शिक्षा के क्षेत्र में बाटम लाइन कैसा हो तय करना जरूरी है। सरकारी स्कूलों में आधारभूत संरचना के लिए नागरिकों को भी सरकार और प्रशासन पर दबाव बनाना होगा।
- मो. नैय्यर, समाजसेवी

सरकारी स्कूलों के बजाए प्राइवेट सेक्टर में आधारभूत संरचना बेहतर है। कॉरपोरेट जगत के स्कूल पटना में तेजी से आ रहे हैं। जरूरत है कि सरकारी स्कूलों के बच्चों के साथ मेलजोल की व्यवस्था हो। सरकारी स्कूलों को बेहतर लैब और शिक्षण का माहौल बेहतर बनाया जाए।
- डॉ. डीके सिंह, अध्यक्ष, बिहार स्कूल एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन

रोटरी क्लब अपने स्तर से बुनियादी स्कूलों को हैप्पी स्कूल बनाने में लगा हुआ है। सरकार को चाहिए कि सभी स्कूलों को हैप्पी स्कूल बनाए ताकि बच्चों की रुचि पढ़ाई में जगे। रोटरी का यह प्रयोग पटना में सफल रहा है। इसे और आगे बढ़ाया जाएगा।
- सीबी शर्मा, रोटरी क्लब

स्वतंत्रता दिवस पर कई सरकारी स्कूलों को देखने का मौका मिला। स्कूलों में बच्चों की संख्या के अनुपात में जगह हो। शिक्षक भी बच्चों के अनुपात में रखे जाएं। भवन और आधारभूत संरचना की कमी दूर करने से बुनियादी शिक्षा व्यवस्था में बदलाव आ सकेगा।
- शालिनी वैश्य, समाजसेवी

शिक्षा में शिक्षकों का कमिटमेंट होना चाहिए। सरकारी शिक्षा के क्षेत्र में जनगणना से लेकर तमाम सरकारी आयोजन शिक्षकों के बूते चलाये जाते हैं। शिक्षकों को पढ़ाई करने दिया जाए ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए। इसको लेकर शिक्षक संगठन आगे आएं।
- साकेत प्रियदर्शी, समाजसेवी

शहर में जाम, ट्रैफिक सिस्टम, अतिक्रमण और लाइट की समस्या गंभीर है। नियोजित तरीके से शहर को सुविधा संपन्न बनाने की जरूरत है। इसके लिए निगम और प्रशासनिक अधिकारियों केा विशेष पहल करनी होगी।
- शशि मोहन

जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र हर मौके पर जरूरत पड़ती है। यह सुविधा आज भी ऑनलाइन सुलभ नहीं है। यदि 24 ये 72 घंटे में यह सुविधा उपलब्ध हो जाए तो लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। नगर निगम के अफसर इस ओर विशेष ध्यान दें तो बात बनेगी।
- शशि शेखर, समाजसेवी

अपराध के बदलते ट्रेंड के साथ पुलिस की कार्यशैली भी बदलने की जरूरत है। पुलिस विभाग को लोगों को भी इस दिशा में जागरूक करना चाहिए। पुलिस को बताना चाहिए कि साइबर क्राइम की शिकायत कहां करें। साइबर क्राइम रोकने के लिए उचित प्रबंध करना चाहिए।
- अंजू शर्मा, सीए

शहर में करीब 200 से अधिक तालाब हैं। इससे संरक्षित रखा जाए तो भू-जल स्रोत रिचार्ज होगा। शहर में मच्छरों के नियंत्रण के लिए मछली आ गई है। तालाबों और जलाशयों में मच्छर के अंडे उनका आहार होते हैं, इससे मच्छर की समस्या नियंत्रित होगी।
- ऋषिकेश कश्यप, समाजसेवी

पटना हाट खुला, लेकिन सफल नहीं हुआ। शहर में प्राइम जगहों पर ऐसे हाट बनाए जाएं जहां जनोपयोगी सेवाएं उपलब्ध हो। शहर में एक मात्र मौर्यलोक परिसर है, जहां देर रात तक भीड़ रहती है। ऐसे क्षेत्र का विस्तार करना चाहिए।
- राखी शर्मा, समाजसेवी

हमारा शहर उस समय बेहतर बनेगा, जब लोग बेवजह हॉर्न नहीं बजाएंगे और शहर शांत होगा। शहर का मिजाज इतना अच्छा हो, कि लोग एक दूसरे को कहे कि पहले आप चलिए। आज सड़क छीनने की कोशिश हो रही है। स्वस्थ रहने का सबसे बेहतर उपाय है, बीमारी से बचाव। खान-पान पर ध्यान देंगे तो अस्पताल जाने की नौबत ही नहीं आएगी।
- विनोद सिंह, कन्वेनर, स्टूडेंट्स ऑक्सीजन मूवमेंट

इसके अलावा कार्यक्रम में राजनाथ सिंह, एकेपी सिन्हा, राजेश कुमार पांडेय, डॉ. बिनय, जयशंकर सिंह, अशोक कुमार, अमित चौबे, सतीश कुमार आदि उपस्थित थे ।

 

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By Nandlal Sharma