पटना में क्राइम का ग्राफ गिरा है, इसमें कोई दो मत नहीं। अपराध हो रहे हैं, मगर पहले की तरह सुनियोजित अपराध की घटनाओं में कमी आई है। अपराध के बड़े नाम अब खौफ नहीं रहे, पुलिस के लिए चुनौती कम और नई उम्र के युवा हैं जो अपराध कर रहे हैं। पटना शहर में बढ़ते बाइकर्स गैंग का प्रभाव इसका प्रमाण है। पुलिस कभी-कभी एक्शन के मूड में आती है, तो ये दुबक जाते हैं मगर पुलिस की सुस्ती बढ़ते ही इनकी चुस्ती बढ़ जाती है। चेन स्नैचिंग से लेकर मारपीट और रंगदारी जैसे मामलों में इनका नाम सामने आ चुका है। हालांकि चौक-चौराहों पर लगे कैमरे पुलिस की खूब मदद कर रहे हैं। अपराधियों को पकड़ने में पुलिस के लिए यह सहायक साबित हो रहे हैं।

अपने शहर को शानदार बनाने की मुहिम में शामिल हों, यहां करें क्लिक और रेट करें अपनी सिटी

पुलिस के दूसरा सिरदर्द साइबर क्राइम के मामले हैं। पहले से हत्या, चोरी, डकैती में उलझी रहने वाली पुलिस के लिए साइबर क्राइम से निपटना किसी चुनौती से कम नहीं। अल्ट्रा मॉर्डन तकनीक का इस्तेमाल करने वाले हाईटेक साइबर अपराधियों के दावपेंच का पुलिस के पास कोई काट नहीं है। पिछले दो साल में साइबर क्राइम के आंकड़ों में दोगुना इजाफा हुआ, लेकिन निस्तारण आधा भी नहीं। थानों में साइबर क्राइम से निपटने के लिए तकनीक की कमी दूर नहीं हो सकी है। पुलिस अधिकारियों की मानें तो ऐसे मामलों से निपटने के लिए हाईटेक साइबर सेल के साथ ही ऐसे मामलों की जांच का जिम्मा एक्सपर्ट को सौंपना चाहिए। पर थानों में साइबर क्राइम की जांच ऐसे पुलिस पदाधिकारी को सौंप दी जाती है, जिन्हें इनसे निपटने का प्रशिक्षण तक नहीं दिया गया।

डीआईजी राजेश कुमार कहते हैं, साइबर क्राइम से निपटने के लिए साइबर सेल खुलने वाला है। थानों में ऐसे मामलों से निपटने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आने वाले समय में स्थिति बदलेगी।

बढ़ते जा रहे लंबित मामले
हर महीने समीक्षा बैठक में थानों में लंबित मामलों के आंकड़े बढ़ते जाते हैं। वर्तमान में जिले में 14 हजार से अधिक मामले लंबित हैं। निस्तारण के लिए आईजी, डीआईजी और एसएसपी स्तर से लगातार केस के अनुसंधानकर्ता पर दबाव बनाया जाता है, लेकिन स्थिति यह है कि एक अनुसंधानकर्ता पर 50 से 70 मामले की जांच का जिम्मा सौंपा गया है।

डीआईजी राजेश कुमार भी मानते हैं कि थानों पर लंबित मामलों का दबाव है। वह कहते हैं, कैम्प लगाकर मामलों का निस्तारण कराया जाएगा। आईओ अगर काम ईमानदारी से काम करे तो केस का दबाव अपने आप कम हो जाएगा। अधिकांश ऐसे इनवेस्टिगेशन ऑफिसर भी हैं जो केस डायरी समय पर नहीं लिखते जिससे नए मामलों का बोझ बढ़ता जाता है।

विशेषज्ञों की मानें तो अधिकांश थानों में लोग मामूली बात पर भी केस दर्ज करा देते है। बात बात पर केस दर्ज से बचाना चाहिए और ऐसे मामलों में दोनों पक्षों को बैठाकर बातचीत से मामला शांत कराना चाहिए।

हिचखोले खाते हैं थानों के वाहन
अपराधी हाइटेक वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि पटना पुलिस में आज भी 15 साल पुरानी जीप से गश्ती कर रही है। आधा दर्जन थाने ऐसे हैं, जहां खटारा जीप एक बार खराब हो गई तो उसकी मरम्मत में चार से पांच दिन लग जाते हैं। इसका नतीजा रात में होने वाले अपराध बढ़ गए हैं। पिछले एक माह तीन दर्जन से अधिक बड़ी चोरियां हुई। आधा दर्जन थाना क्षेत्र में एटीएम ही तोड़ने का प्रयास किया गया तो दो एटीएम बदमाश उखाड़ ले गए। इसके पीछे बड़ी वजह पुलिस गश्ती की कमी रही।

केस दर्ज करने के तरीके आज भी पुराने
थानों में फरियादी को आज भी कागज तलाशने से लेकर थानेदार का इंतजार करना पड़ता है। एसएसपी मनु महाराज के जनता दरबार में हर दिन चार दर्जन से अधिक फरियादी पहुंचते हैं, इसमें अधिकांश की शिकायत यही रहती है कि थाना पुलिस कार्रवाई नहीं करती या फिर केस दर्ज नहीं करती। यहीं हाल थानों में है। फरियादी को आवेदन लिखने के लिए पहले पेपर मांगता है, नहीं मिलने पर दुकान की तलाश करता है। फिर आवेदन लिख दिया तो थानेदार के आने का इंतजार करना होता है। अगर थानेदार गश्त पर निकले हैं तो आवेदन जमा कर बाद में बुलाया जाता है। प्रदेश में ऑनलाइन केस दर्ज करने की योजना शुरू होने वाली थी हालांकि ऐसा हुआ नहीं। एसएसपी मनु महाराज ने बताया कि सच है कि कई फरियादी सीधे मेरे पास आवेदन लेकर पहुंच जाते है। इस संबंध में थानेदारों को आदेश दिया गया है।

आशीष शुक्ल

अपने शहर को शानदार बनाने की मुहिम में शामिल हों, यहां करें क्लिक और रेट करें अपनी सिटी

By Krishan Kumar