सीता साहू, राजधानी पटना की पहली महिला मेयर हैं। पिछले साल इस पद के लिए चुनी गईं। मूल रूप से वैशाली जिले के महनार की निवासी हैं। पति स्व. वैद्यनाथ प्रसाद व्यवसायी थे। उनकी हत्या 23 जुलाई 1990 को घर के बाहर कर दी गई। तब से सीता न केवल पारिवारिक बल्कि पति की दाल मिल के संचालन की जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं। दो बेटों और एक बेटी का परिवार बसाया।

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पारिवारिक जिम्मेदारी से मुक्त तो हुईं पर इनके मन में हमेशा से दबी इच्छा थी कि शहर के लिए कुछ करें। इसी कड़ी में वर्ष 2017 में नगर निकाय चुनाव में वार्ड पार्षद बनीं और इसके बाद पटना के मेयर के रूप में चुनी गईं। 60 वर्ष की उम्र में भी काम के प्रति काफी जुनून है। सुबह उठने के बाद लगभग प्रतिदिन किसी-न-किसी वार्ड के भ्रमण पर निकल जाती हैं। इसकी समस्याएं जानती हैं। मेयर के रूप में अपनी भूमिका बखूबी निभा रही हैं।

मेयर के अनुसार राजधानी पटना का स्वर्णिम अतीत रहा है। अब यह स्थिति नहीं है। कई क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है। राजधानी अब भी बुनियादी सुविधाएं हासिल करने के लिए मशक्कत कर रही है। यह गंगा नदी के किनारे बसा है।

नदी में पानी बढ़ने या अधिक वर्षा होने पर शहर के बाईपास के सटे इलाके में जलजमाव की समस्या हो जाती है। ज्यादा बारिश होने पर कई इलाके जलमग्न हो जाते हैं। सड़कों पर गंदगी की समस्या भी बड़ी है। इस स्थिति में व्यापक बदलाव की जरूरत है। यह शहर देश के बेहतर नगर की श्रेणी में आए, इसके लिए एक विशेष पैकेज जरूरी है। 

70 साल पुरानी पाइपलाइन को बदलने की जरूरत

शहर की पेयजल आपूर्ति व्यवस्था सबसे खराब स्थिति में है। इसके बदलाव के लिए सरकार को बड़ा फैसला लेने की जरूरत है। अधिकांश जलापूर्ति पाइपलाइन लगभग 70 साल पुरानी हैं। जर्जर हो चुकी हैं। शहरवासियों के घर तक गंदा पानी पहुंचा रही हैं। नई पाइपलाइन बिछाकर जलापूर्ति व्यवस्था दुरुस्त करने से शहर की पानी की समस्या दूर हो सकती है।

विद्युत आपूर्ति लाइन को अंडरग्राउंड करना आवश्यक

शहर की जनसंख्या धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है, जबकि सड़कों की चौड़ाई पूर्व के अनुसार ही सीमित है। ऐसे में सड़कों पर लगे विद्युत और अन्य वायर को अंडरग्राउंड करना जरूरी है। इससे सड़क की चौड़ाई बढ़ जाएगी। वाहनों की रफ्तार को भी गति मिलेगी। साथ ही सड़क और फुटपाथ के बीच मिट्टी वाले स्थान पर पेवर लगाने की जरूरत है। इससे जलजमाव या गंदगी से राहत मिलेगी। 

सड़कों और गलियों का दूर हो अंधेरा

शहर को अंधेरे से मुक्ति दिलाने के लिए संसाधन बढ़ाने की जरूरत है। गलियों की कौन कहे अभी कई सड़कों में लाइटिंग नहीं है। हर चौक-चौराहे पर विशेष हाईमास्ट लाइट लगनी चाहिए। साथ ही गलियों को भी स्ट्रीट लाइट से रोशन करने की जरूरत है। इससे अंधेरे से मुक्ति मिल जाएगी। गलियों में लाइट लगाने के लिए निगम स्तर पर कवायद की जा रही है।

यातायात पर नियंत्रण जरूरी

किसी शहर की पहचान बेहतर यातायात व्यवस्था से भी होती है। वर्तमान में पटना की यातायात व्यवस्था बेहतर नहीं है। इसका कारण अतिक्रमण के साथ-साथ परिवहन व्यवस्था पर किसी का नियंत्रण नहीं होना है। शहर में बस स्टॉप बना दिए गए हैं, लेकिन सिटी बसें वहां रुकती नहीं हैं। लोग जगह-जगह उतरते और चढ़ते हैं। नियमों का पालन करना जरूरी है। जब बसें निर्धारित जगह पर रुकेंगी और लोग नियत स्थान पर चढ़ेंगे और उतरेंगे तब व्यवस्था दुरुस्त हो जाएगी।

बेहतर सफाई के लिए यांत्रिकीकरण जरूरी

शहर की पहचान उसकी बेहतर साफ-सफाई व्यवस्था से होती है। नगर निगम की ओर से इसके लिए कड़ी मशक्कत चल रही है। इसमें व्यापक बदलाव जरूरी है। इसके लिए प्रयास भी हो रहे हैं। इसमें मुख्य सड़क से लेकर गली तक सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए यांत्रिकीकरण जरूरी है।

By Nandlal Sharma