डॉ. अशोक कुमार घोष बिहार प्रदूषण नियंत्रण परिषद् के अध्यक्ष हैं। चार दशक से शोध और शिक्षण क्षेत्र से जुड़े हैं। एएन कॉलेज में प्रोफेसर रहे घोष महावीर कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर, पटना के शोध विभाग के भी अध्यक्ष हैं। ग्राउंड वाटर क्वालिटी और क्वांटिटी पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दखल रखते हैं। इंटरनेशनल प्रोजेक्ट डीईएलटीएपी के सदस्य हैं। इसे नीदरलैंड की एडब्ल्यूओ वोट्रो सपोर्ट कर रहा है। इसके साथ-साथ गंगा के तटीय क्षेत्र में आर्सेनिक के प्रभाव, ग्राउंडवाटर, पाइपलाइन सप्लाई आदि पर दर्जनों शोध पत्र प्रस्तुत कर चुके हैं।

अपने शहर को शानदार बनाने की मुहिम में शामिल हों, यहां करें क्लिक और रेट करें अपनी सिटी 

सीवरेज सिस्टम को दुरुस्त करने की जरूरत
डॉ. घोष का कहना है कि गंगा की दुर्दशा पर ध्यान देना ही होगा। सीवरेज सिस्टम को दुरुस्त करना होगा। एक-दो प्लांट पर काम भी शुरू हो गया है। पर्याप्त संख्या में प्लांट अनिवार्य है। सड़कों की साफ-सफाई के साथ-साथ हरियाली भी सुंदर पटना के लिए अहम है। पटना की सुंदरता कम करने में सबसे ज्यादा योगदान सार्वजनिक स्थलों पर अतिक्रमण का है। पटना का पुराना गौरव लौटाना है तो अतिक्रमण पर अंकुश लगाना होगा। फुटपाथ, सड़क, पार्क आदि को चंद पैसे के लिए अतिक्रमण के हवाले करने वाले कर्मी और अधिकारियों पर कार्रवाई के साथ-साथ आमजन को भी जागरूक करने की जरूरत है।

गंगा घाट से नई पीढ़ी को जोड़ा

गंगा घाटों की साफ-सफाई और इससे युवा पीढ़ी को जोडऩे के लिए डॉ. अशोक कुमार घोष ने मैराथन अभियान चलाया। राजधानी के विभिन्न स्कूलों के बच्चों को अलग-अलग गंगाघाटों की सफाई के दौरान उन्हें गंगा, भू-जल, आर्सेनिक तथा साफ-सफाई का जीवन में महत्व से भी अवगत कराते हैं। अभियान में सहयोगी डॉ. राजीव रंजन के शब्दों में उनके अभियान का मकसद नई पीढ़ी को सामाजिक दायित्व से जोडऩा है।

शुद्ध पेयजल के लिए किया जागरूक
प्रो. घोष आमजन को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए लगभग दो दशक से विभिन्न माध्यम से संघर्षरत रहे हैं। एएन कॉलेज में शिक्षण कार्य के साथ-साथ छात्रों और प्रबंधन के सहयोग से लगभग दो दर्जन से अधिक जिलों में पानी की जांच कराई। गंगा तटीय क्षेत्रों में आर्सेनिक युक्त पानी पीने से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव से सरकार और आमजन दोनों को जागरूक किया। वर्तमान में मुख्यमंत्री के सात निश्चय कार्यक्रम में एक 'हर घर नल जल' भी शामिल है। इसके तहत आर्सेनिक और आयरन मुक्त पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। इन्होंने अंतरराष्ट्रीय संगठनों को भी सूबे में शुद्ध पेयजल परियोजना से जोडऩे में महती भूमिका निभाई।

पर्यावरण संरक्षण के लिए मैराथन अभियान
प्रो. घोष पर्यावरण संरक्षण के लिए राजधानी सहित पूरे सूबे में मैराथन अभियान के संवाहक रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए दूसरे को साइकिल से चलने की सलाह देने के बजाए खुद इसका उपयोग अब भी करते हैं। पौधरोपण, पेंटिंग प्रतियोगिता, कार्यशाला आदि से युवाओं को पर्यावरण सरंक्षण से जोडऩे में जुटे रहते हैं।

पटना के पास है हर जरूरी संसाधन
डॉ. अशोक कुमार घोष का मानना है कि पटना के पास वह सब कुछ है, जो एक बेहतर शहर के लिए होना चाहिए लेकिन, संसाधनों का बेहतर उपयोग नहीं होने के कारण पटना को वह गौरव नहीं प्राप्त हो रहा है, जिसके हम हकदार हैं। पिछले एक दशक में पटना में काफी बदलाव आया है। ढांचागत सुविधाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर की उपलब्ध कराई जा रही हैं। गंगा किनारे मरीन ड्राइव, फ्लाईओवर का जाल, बिहार म्यूजियम, ज्ञान भवन, बापू सभागार, सभ्यता द्वार आदि का निर्माण बुलंद भविष्य की ओर इशारा कर रहा है। कई महत्वाकांक्षी योजनाएं पाइपलाइन में हैं। हर घर नल-जल, एलिवेटेड सड़क, पाइपलाइन से गैस सप्लाई, मेट्रो आदि प्रोजेक्ट पर संजीदगी और योजनाबद्ध तरीके से काम करने की जरूरत है। पटना हम सभी की धड़कन है। देश के किसी भी राज्य की राजधानी का इतिहास पटना की तरह गौरवपूर्ण नहीं रहा है। आगामी दशक में इन पांच सेक्टर पर विशेष ध्यान देने की दरकार है। सिटी बस सर्विस को दुरुस्त करने के साथ-साथ मेट्रो प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने से बहुत हद तक राजधानी की सड़कों से वाहनों की संख्या में कमी आएगी। पटना के दायरे में फतुहा, बिहटा और हाजीपुर को भी लाना होगा। राजधानी को केवल नगर निगम के भरोसे साफ नहीं रखा जा सकता है ।

 



By Krishan Kumar