'माय सिटी माय प्राइड' अभियान के सर्वे में पटना में सुधार की काफी गुंजाइश दिखाई दे रही है। वह दस शहरों में से नौवें स्थान पर काबिज है। बिहार की राजधानी पटना के लोगों ने सजगता के साथ वोटिंग की और उनको लगता है कि शहर में अभी बदलाव की जरूरत है। माय सिटी माय प्राइड की लिवेबिलिटी सर्वे रिपोर्ट में पटना को 3.07 अंक मिले।

शिक्षा के लिहाज से पटना की स्थिति दस शहरों के मुकाबले सबसे कम रही है और इसे आखिरी 10वें पायदान पर जगह मिली है। वहीं, अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में भी पटना अन्य शहरों के मुकाबले पिछड़ता नजर आया है। दोनों ही मामलों में पटना 9वें पायदान पर मौजूद रहा। अन्य मानकों के मुकाबले बुनियादी ढांचा और सुरक्षा के मामले में स्थिति अपेक्षाकृत ठीक रही। इन दोनों मानकों पर पटना 7वें पायदान पर मौजूद रहा।

अर्थव्यवस्था के मामले में पटना को 3.13 अंक मिले, जबकि शिक्षा के मामले में इस शहर को पांच में से 3.14 अंक मिले। स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में पटना को जहां 3.13 अंक मिले। वहीं, बुनियादी सेवाओं की स्थिति के मामले में इस शहर को 3.03 अंक मिले। सुरक्षा के मामले में पटना को पांच में से सबसे कम 2.91 कम मिले।

इन्फ्रा में शानदार
बुनियादी सेवाओं के तहत बिजली आपूर्ति को लेकर लोगों ने पटना की स्थिति को बेहतर बताया। इस मोर्चे पर लोगों ने अपने शहर को सबसे ज्यादा 3.74 अंकों की रेटिंग दी। स्कूलों की उपलब्धता को लेकर भी लोगों ने पटना की स्थिति को ठीक माना। इस मामले में इस शहर को पांच में से 3.64 अंक मिले।

बेरोजगारी और अतिक्रमण बड़ी समस्या
रोजगार के मौकों और अतिक्रमण को लोगों ने पटना की सबसे बड़ी समस्या माना है। सर्वे में लोगों ने माना कि पटना की स्थानीय अर्थव्यवस्था ठीक हालत में नहीं है। इस मुद्दे पर लोगों ने पांच में से 2.68 अंक दिए।

लोगों ने अतिक्रमण और फुटपाथ की स्थिति को लेकर भी नाराजगी जाहिर की। अतिक्रमण के मामले में शहर को लोगों ने पांच में से 2.67 अंक दिए वहीं फुटपाथ की स्थिति और कूड़ा-कचरा के मैनेजमेंट के मामले में इस शहर को पांच में से क्रमश: 2.66 और 2.61 अंक मिले।

सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी की व्यवस्था को लेकर लोगों ने पटना की स्थिति को ठीक नहीं माना। लोगों ने इस मामले में शहर को 2.74 अंकों की रेटिंग दी।

By Nandlal Sharma