पटना। देश के पहले शिक्षा मंत्री भारत रत्‍‌न मौलाना अबुल कलाम आजाद के जन्मदिवस के मौके पर इमारत-ए-शरिया के सभागार में एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में इमारत-ए-शरिया के उलेमा व शहर के शिक्षाविद भी शामिल हुए।

इस मौके पर इमारत-ए-शरिया के कार्यवाहक नाजिम मौलाना शिबली अल कासमी ने सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा कि मौलाना आजाद हिंदू-मुस्लिम एकता को ही हिंदुस्तान की खूबसूरती मानते थे। इस खूबसूरती को बनाए रखने के लिए शिक्षा को आधार बनाया और सभी वर्ग के लोगों को शिक्षा के प्रति जागरूक करने का काम किया। आज इमारत-ए-शरिया की बुनियाद भी मौलाना अबुल कलाम की ही देन है। उन्होंने आज से 100 वर्ष पहले पटना सिटी के पत्थर की मस्जिद में हुए बैठक की अध्यक्षता की थी। इसी बैठक में इमारत-ए-शरिया की स्थापना करने की योजना बनाई गई थी। आज इसी बैठक का नतीजा है कि इमारत-ए-शरिया दीनी तालीम के साथ दुनियावी तालीम में अहम रोल निभा रही है। आज इमारत-ए-शरिया के छात्र पूरी दुनिया में देश का नाम रौशन कर रहे हैं। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सेक्रेटरी व प्रसिद्ध विद्वान मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने कहा कि आज देश में मौलाना कलाम के संदेशों को फैलाकर ही नफरत फैलाने वाली ताकतों पर फतह हासिल कर सकते हैं। सेमिनार में इमारत-ए-शरिया किताब व सुन्नत की रोशनी व इमामुल हिंद मौलाना अबुल कलाम आजाद कई दिमागों का एक इंसान किताब का लोकार्पण किया गया। इस मौके पर जमीयते उलेमा बिहार के महासचिव हुस्न अहमद कादरी, माइनोरिटी कमीशन के चेयरमैन प्रो युनूस हकीम, सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन मो इरशादुल्लाह, मदरसा शमसूल होदा पटना के प्राचार्य मौलाना मसूद अहमद कादरी, अबुल कलाम कासमी, मौलाना सोहैल अहमद नदवी, काजी सोहैल अखतर, मौलाना अरशद रहमानी, नजमूल हसन नजमी समेत कई गणमान्य लोगों ने मौलाना अबुल कलाम आजाद की जीवनी पर अपनी राय रखी।

Posted By: Jagran

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