पटना, राज्य ब्यूरो। छह साल से एक ही जिले में जमे पुलिस पदाधिकारियों व कर्मियों का 10 दिनों के अंदर तबादला करने के निर्देश के दो दिन बाद ही डीजीपी एसके सिंघल ने नया आदेश जारी किया है। नए आदेश में उन्होंने स्पष्ट कहा है कि किसी भी पुलिस पदाधिकारी या कर्मी की तैनाती गृह जिले में नहीं की जाएगी। जिस जिले में कोई पदाधिकारी या कर्मी पहले काम कर चुका है, उसे दोबारा फिर उसी जिले में पदस्थापित नहीं किया जाएगा। चाहे उनका कार्यकाल उस जिले में कितना भी छोटा क्यों न रहा हो।

डीजीपी द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के तहत अवधि की गणना समेकित होगी। यदि किसी एक ही जिला में कोई पुलिसकर्मी दो या अधिक कार्यकालों में कार्य कर चुका है तो सभी कार्यकालों को मिलाकर अवधि की गणना की जाएगी। इसी तरह किसी पुलिसकर्मी ने अलग-अलग रैंक जैसे सिपाही, एएसआइ, एसआइ और इंस्पेक्टर में किसी जिला में कार्य किया है तो सभी कोटियों में बिताए गए समय को मिलाकर जिला व रेंज टर्म को गिना जाएगा। इसके अलावा तत्कालीन जोन या वर्तमान रेंज में पदस्थापित पुलिस अफसर या जवान के तैनाती अवधि की गणना उनके मुख्यालय जिला के पदस्थापन समरूप मानकर की जाएगी।

पुलिस मेंस एसोसिएशन ने किया विरोध

बिहार पुलिस मेंस एसोसिएशन ने डीजीपी के आदेश पर आपत्ति जताई है। एसोसिएशन का कहना है कि तबादले के नए आदेश से पुलिसकर्मियों में आक्रोश है। एसोसिएशन का कहना है कि मुख्यालय द्वारा नियम 315 के तहत स्थानांतरण हेतु मापदंड निर्धारित है, जिसे सरकार से अनुमोदित करानेके बाद लागू किया गया है। इस नीति के तहत रेंज आइजी-डीआइजी द्वारा स्थानांतरण भी किया गया है और तबादले को लेकर स्वेच्छा के स्थान की जानकारी भी मांगी गई थी। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी स्वेच्छा पत्र समर्पित कर चुके हैं और उसी के अनुसार तबादले की उम्मीद लगाए बैठे थे। पर इससे इतर नया फरमान जारी कर दिया गया है। पुलिस मेंस एसोसिएशन की इसका विरोध करेगी और जरूरत पडऩे पर उच्च न्यायालय में रिट भी दायर किया जाएगा।

Edited By: Shubh Narayan Pathak