बिहार के 'सुपरफूड' मखाना का देश-दुनिया में डंका, कोसी और सीमांचल में सबसे ज्यादा होता है उत्पादन
Bihar Makhana Production: भारत के कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में बिहार का 'सुपरफूड' मखाना अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए ...और पढ़ें

बिहार में मखाना की खेती (एआई जेनरेटेड तस्वीर)
HighLights
बिहार देश के कुल मखाना उत्पादन का 80-90% हिस्सा पैदा करता है।
मधुबनी, दरभंगा, कटिहार और कोसी क्षेत्र मखाना के प्रमुख उत्पादक केंद्र हैं।
प्राकृतिक संसाधनों और आधुनिक तकनीक से मखाना की खेती का विस्तार हुआ।
डिजिटल डेस्क, पटना।भारत के कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में बिहार का 'सुपरफूड' मखाना अपनी विशिष्ट पहचान और वर्चस्व बनाए हुए है। देश के कुल मखाना उत्पादन(Bihar Makhana Production) का लगभग 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा अकेले बिहार(Makhana Producing Districts in Bihar) में पैदा होता है। राज्य के उत्तरी और पूर्वी जिलों में पारंपरिक ज्ञान, अनुकूल जलवायु और आधुनिक तकनीक के समन्वय से मखाना की खेती एक बड़े व्यापार में तब्दील हो चुकी है।
उत्पादन के प्रमुख गढ़: मधुबनी और दरभंगा
राज्य में मखाना उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र मधुबनी जिला है, जो अकेले बिहार के कुल उत्पादन का लगभग 20% हिस्सा प्रदान करता है। यहां के रहिका, पंडौल, झंझारपुर और खजौली प्रमुख उत्पादन केंद्र बनकर उभरे हैं। वहीं, दरभंगा को मखाना की खेती और व्यापार की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक राजधानी माना जाता है।
इसके अलावा कटिहार कच्चे बीज और कुल कृषि उपज के मामले में राज्य के शीर्ष जिलों में शामिल है, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 18% है। सीमांचल के पूर्णिया में आधुनिक तकनीकों को अपनाकर उत्पादन का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, सीतामढ़ी, अररिया और किशनगंज में भी इसका बड़े पैमाने पर विस्तार हुआ है।
कोसी क्षेत्र: अनुकूल प्रकृति और बढ़ता कारोबार
मखाना उत्पादन में बिहार का कोसी क्षेत्र (सहरसा, सुपौल और मधेपुरा) विशेष भूमिका निभा रहा है। कोसी बेसिन के प्राकृतिक जलस्रोत, तालाब और निचले जलजमाव वाले इलाके मखाना की वृद्धि के लिए आदर्श परिस्थितियां तैयार करते हैं। यहां की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी बीजों के आकार और गुणवत्ता को बेहतर बनाती है।
सहरसा और आसपास के क्षेत्रों से मखाना रेल व सड़क परिवहन के जरिए दिल्ली, पंजाब समेत देश के विभिन्न महानगरों और वैश्विक बाजारों तक भेजा जा रहा है। प्राकृतिक संसाधनों और किसानों की मेहनत के दम पर बिहार का मखाना राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पैठ बनाए हुए है।
