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राजनीति विज्ञान के 3800 शब्दों को मैथिली में मिलेगी नई पहचान, 16 अक्टूबर को होगा अंतिम फैसला

Published: Tue, 13 Oct 2026 06:53 PM (IST)

पटना विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के 3800 शब्दों को मैथिली भाषा में स्थापित करने पर मंथन चल रहा है।

राजनीति विज्ञान के 3800 शब्दों को मैथिली में मिलेगी नई पहचान, 16 अक्टूबर को होगा अंतिम फैसला

राजनीति विज्ञान के 3800 शब्दों को मैथिली में मिलेगी नई पहचान, 16 अक्टूबर को होगा अंतिम फैसला

HighLights

  1. राजनीति विज्ञान के 3800 शब्दों का मैथिलीकरण पटना में।

  2. शिक्षा मंत्रालय के आयोग की देखरेख में यह पहल।

  3. 16 अक्टूबर को शब्दावली पर होगा अंतिम निर्णय।

जागरण संवाददाता, पटना। राजनीति विज्ञान की शब्दावली को मैथिली भाषा में स्थापित करने की पहल की जा रही है। पटना विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में इसके लिए आठ सदस्यीय विशेषज्ञों की टीम मंथन कर रही है।

अब तक राजनीति विज्ञान से जुड़े 38 सौ शब्दों का चयन किया गया है, जिन्हें मैथिली भाषा में स्थापित करने पर विचार किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मंथन 16 अक्टूबर तक चलेगा। इसी दिन चयनित शब्दों की शब्दावली पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

यह पहल शिक्षा मंत्रालय के वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग की देखरेख में की जा रही है। वर्ष 1961 में स्थापित आयोग का उद्देश्य अंग्रेजी और हिंदी में प्रचलित तकनीकी एवं विषयगत शब्दों के भारतीय भाषाओं में उपयुक्त रूप तैयार करना और उन्हें स्थापित करना है।

इसी क्रम में राजनीति विज्ञान से संबंधित शब्दों के मैथिली रूप तय करने पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।

आयोग के सहायक निदेशक डॉ. सहजाद अहमद अंसारी ने बताया कि भारत में अनेक भाषाएं बोली जाती हैं। ऐसे में विभिन्न विषयों के तकनीकी शब्दों का निरीक्षण कर उन्हें स्थानीय भाषाओं में स्थापित करना आवश्यक है। कई शब्द अंग्रेजी और हिंदी में प्रचलित हैं, लेकिन उनके स्थानीय भाषा में प्रचलित रूप उपलब्ध नहीं हैं।

विशेषज्ञों की ओर से चयनित शब्दों को भारत सरकार के स्तर पर उपयोग में लाया जाता है। पटना विश्वविद्यालय में चल रही इस प्रक्रिया के तहत अंग्रेजी और हिंदी के शब्दों के मैथिली रूप निर्धारित किए जा रहे हैं। इसे त्रिभाषीय शब्दावली तैयार करने की प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।

18 भाषाओं में आठ लाख शब्दों पर हो चुका है काम

डॉ. अंसारी के अनुसार, आयोग की ओर से देश की 18 भाषाओं में शब्दावली तैयार करने का काम पूरा किया जा चुका है। विभिन्न विषयों को मिलाकर करीब आठ लाख शब्दों को इसमें शामिल किया गया है।

इनमें विज्ञान के डेढ़ लाख, सामाजिक विज्ञान के 85 हजार, इंजीनियरिंग के चार हजार, चिकित्सा विज्ञान के 50 हजार और कृषि के 25 हजार शब्द शामिल हैं। अन्य विषयों में भी तकनीकी शब्दावली तैयार करने का काम जारी है।

सोशल मीडिया से तेजी से बदल रही शब्दावली, अल्फा और जेनजी पर भी मंथन

सोशल मीडिया के बढ़ते प्रचलन के साथ भाषा में नए-नए शब्द तेजी से जुड़ रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या अंग्रेजी के शब्दों की है। अल्फा और जेनजी जैसे शब्दों के प्रचलन को देखते हुए इनके हिंदी के अलावा अन्य भारतीय भाषाओं में उपयुक्त रूप तय करने पर भी विशेषज्ञ विचार कर रहे हैं।

डॉ. अंसारी ने बताया कि बदलते समय के साथ भाषा में शामिल हो रहे नए शब्दों को भारतीय भाषाओं में स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य विभिन्न विषयों की शब्दावली को स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध कराना है, ताकि लोग अपनी भाषा में भी तकनीकी और अकादमिक विषयों को समझ सकें।

मैथिली शब्दावली तैयार करने वाली विशेषज्ञ टीम

पटना विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में चल रही इस पहल में आठ विशेषज्ञ शामिल हैं-

  • प्रो. सीमा प्रसाद, विभागाध्यक्ष, राजनीति विज्ञान विभाग, पटना विश्वविद्यालय
  • प्रो. वीरेंद झा
  • प्रो. संजय कुमार
  • प्रो. राकेश रंजन
  • डॉ. मंजर सुलेमान
  • डॉ. जीवछ राम
  • डॉ. राजीव कुमार
  • डॉ. पुतुल कुमारी