पटना। पड़ोसी देश नेपाल से तल्ख होते संबंधों के बीच मधेशियों द्वारा हथियारबंद आंदोलन की तैयारी की खबरों ने भारतीय खुफिया एजेंसियों की नींद हराम कर दी है। खुफिया एजेंसियों ने केंद्रीय गृह व विदेश मंत्रालय को सूचित किया है कि बिहार व उत्तर प्रदेश से लगी नेपाल के सीमाई इलाकों में नेपाली माओवादी मधेशियों को अत्याधुनिक हथियार चलाने का प्रशिक्षण दे रहे हैं।

खुफिया एजेंसियों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि नेपाल के कई सीमाई जिलों में इस तरह के कुल नौ ट्रेनिंग कैंपों का संचालन किया जा रहा है। इसमें सबसे बड़ी चिंता की बात तो यह है कि इन ट्रेनिंग कैंपों में मधेशियों के स्कूली बच्चों को भी शामिल किया गया है। उल्लेखनीय है कि रविवार को ही नेपाल में तस्करों का पीछा करने के दौरान एसएसबी के 13 जवान भारत से नेपाल के सीमा क्षेत्र में प्रवेश कर गए थे, जिसे नेपाली पुलिस ने करीब छह घंटे तक बंधक बनाए रखा।

बाद में इन जवानों को विदेश व गृह मंत्रालय की पहल पर रिहा किया गया। यह घटना नेपाल के सीमाई जिला झापा की है। खुफिया सूत्रों ने बताया कि नेपाल में फिलहाल माओवादियों के पास अत्याधुनिक हथियारों की भारी कमी है।

ऐसे में वे अपने प्रशिक्षण में मधेशियों को पारंपरिक हथियारों का ही प्रशिक्षण दे रहे हैं। खुफिया एजेंसियों ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि अगर मधेशियों और नेपाली माओवादियों के बीच शुरू हुई इस सांठगांठ के खेल पर तत्काल नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में मधेशियों का आंदोलन गलत राह पकड़ सकता है।

इसका लाभ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय भारत विरोधी ताकतें उठा सकती हैं। बता दें कि विगत सितंबर माह में नेपाल में नए संविधान को लागू किया गया है। इस संविधान को लेकर मधेशियों (भारतीय मूल के नेपाली नागरिकों) में भारी असंतोष है।

उनका कहना है कि वे पूर्ण रूप से नेपाली नागरिक हैं और उन्हें नए संविधान में वे अधिकार नहीं दिए गए हैं जो नेपाल के मूल नागरिकों को हासिल हैं। इसी के विरोध में मधेशियों ने नेपाल में आर्थिक नाकेबंदी का एलान कर रखा है और भारत से नेपाल जाने वाली सभी जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति पर उन्होंने रोक लगा रखी है। भारतीय सीमा क्षेत्र में ही हजारों ट्रकों को रोक रखा गया है। इनमें पेट्रोलियम से लेकर रोजमर्रे के इस्तेमाल में आने वाली दवाएं और कई जरूरी वस्तुएं शामिल हैं।

Posted By: Kajal Kumari

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