पटना [राज्य ब्यूरो]। बिहार में लोकसभा चुनाव को लेकर विपक्षी महागठबंधन में दलों की भीड़ उमड़ रही है। साथ ही नेताओं की जुटान भी बढ़ती जा रही है। ऐसे में टिकटों की मारामारी तय है। कई नेता अभी से बेटिकट होने के अंदेशे में दुबले हो रहे हैं।

टिकट को लेकर बढ़ रही नेताओं की आशंका

आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए नेताओं का दल-बदल जारी है। उपेंद्र कुशवाहा पाला बदलकर महागठबंधन में शामिल हो चुके हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) हो या राष्‍ट्रीय जनता दल (राजद)-कांग्रेस, सभी दलों के नेता टिकट सुनिश्चित करने के लिए जुगाड़ में लग गए हैं। खासकर विपक्षी महागठबंधन में भाजपा विरोधी दलों व नेताओं की जुटान लगातार बढ़ती जा रही है। साथ ही बढ़ रही है, टिकट को लेकर नेताओं की आशंका।

अभी भी हरी झंडी के इंतजार में कई दिग्‍गज

सत्‍ताधारी राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की बात करें तो उस खेमे के कई नेता अभी भी हरी झंडी का इंतजार कर रहे हैं। टिकट की गारंटी हो जाए तो किसी भी समय उधर से इधर हो जाएंगे। पसंद के कई विकल्प हैं। राष्ट्रीय पार्टी पसंद है तो कांग्रेस हाजिर है। क्षेत्रीय और सामाजिक न्याय की धारा को पसंद करने वालों के सामने कई विकल्प हैं- राष्‍ट्रीय जनता दल (राजद), राष्‍ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) और हिंदुस्‍तानी अवाम मोर्चा (हम)। हां, वाम दलों के लिए किसी ने दावा पेश नहीं किया है।

विपक्ष का गुणगान कर रहे कीर्ति व शत्रुघ्‍न

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो सांसद कीर्ति आजाद और शत्रुघ्न सिन्हा बिना अर्जी दिए महागठबंधन के सदस्य की तरह आचरण करने लगे हैं। आजाद को कांग्रेस पसंद है। सिन्हा राजद का गुणगान कर रहे हैं। मिथिलांचल से आने वाले भाजपा के एक नेता को कांग्रेस और राजद-दोनों पसंद हैं। वे भाजपा से भी नाउम्मीद नहीं हैं। इसलिए शांति से बैठे हैं।

सीमांचल के एक पूर्व भाजपा सांसद पर भी कांग्रेस और राजद की नजर है। संयोग से भाजपा के ये दोनों नेता कांग्रेस की पृष्ठभूमि के हैं। सीमांचल में पक्की जीत के लिए महागठबंधन इन दिनों जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के एक विधायक के नाम पर भी गौर कर रहा है। हालांकि, हरेक के लिए टिकट उपलब्ध कराना महागठबंधन के लिए भी संभव नहीं है।

महागठबंधन का जनाधार बढ़ने का दावा

राजद के प्रवक्ता चितरंजन गगन कहते हैं कि चुनाव की राजनीति में उम्मीदवार उसी दल में जाना चाहते हैं, जहां जीत की संभावना है। महागठबंधन का जनाधार बढ़ रहा है। आम लोगों का झुकाव बढ़ रहा है। इसके चलते दूसरे दलों के नेता भी महागठबंधन की उम्मीदवारी को जीत की गारंटी मान रहे हैं।

भाजपा में अधिक सांसदों के बेटिकट होने की गुंजाइश नहीं

वैसे, उम्मीदवारों की भीड़ उस हालत में अधिक हो सकती है, जब भाजपा बड़े पैमाने पर अपने मौजूदा सांसदों को बेटिकट कर दे। भाजपा वैसे सांसदों को ही मौका नहीं देगी, जिनके बारे में रिपोर्ट है कि वे सीट नहीं बचा पाएंगे। सीटों की कमी के चलते भाजपा में अधिक सांसदों के बेटिकट होने की गुंजाइश नहीं है। 22 में से दो सांसद बागी बने हुए हैं। एक का निधन हो गया है। बचे 19 के लिए 17 सीटें हैं।

भाजपा अपने सांसदों को बता रही है कि कुछ सांसदों को गठबंधन के दूसरे दलों में भी समायोजित किया जा सकता है। लेकिन, मुश्किल उन नौ नेताओं के सामने है, जो पिछली बार भाजपा उम्मीदवार की हैसियत से चुनाव हार गए थे। महागठबंधन इन्हीं में से ताकतवर नेताओं पर दांव लगा सकता है।

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Posted By: Amit Alok