यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 19, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
बिहार विधानमंडल शीतकालीन सत्र का आखिरी दिन: सारण के मुद्दे पर हंगामे के आसार, जनता के सवालों के नहीं मिले जवाब
सोमवार को बिहार विधानमंडल के शीतकालीन सत्र का आखिरी दिन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ...और पढ़ें

पटना, जागरण संवाददाता। बिहार विधानमंडल के पांच दिवसीय शीतकालीन सत्र का आज आखिरी दिन है।बीते मंगलवार 13 दिसंबर से सत्र शुरू होने के बाद अबतक चारों दिन सारण में जहरीली शराब के मद्दे पर खूब हंगामा देखने को मिला। सोमवार को सत्र के अंतिम दिन भी भाजपा इसी मुद्दे पर महागठबंधन की सरकार को घेरते नजर आएगी। जिस तरह से भाजपा ने सत्र के दौरान सदन के अंदर से लेकर बाहर तक शराबबंदी को लेकर बवाल किया है, उससे साफ है कि आज भी विपक्ष मुखर होकर सदन में नीतीश कुमार की सरकार से जहरीली शराब से मरने वालों के परिजनों को मुआवजा देने की मांग करेगा।
हालांकि, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साफ तौर पर कह दिया है कि उनकी सरकार शराब पीकर मरने वालों को मुआवजा नहीं देगी। सदन में बीते दिन इसको लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का रौद्र रूप भी देखने को मिला था। वहीं, भाजपा मुआवजे की मांग पर अड़ी है। इस लिहाज से सोमवार को शीतकालीन सत्र का आखिरी दिन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विधानसंभा में अल्प सूचित और तारांकित प्रश्न के उत्तर होंगे
बता दें कि सोमवार को विधानसभा में सबसे पहले अल्प सूचित और तारांकित प्रश्न होंगे और उसके उत्तर लिए जाएंगे। फिर ध्यानाकर्षण में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, शिक्षा विभाग, विज्ञान और प्रावैधिकी विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग को लेकर चार सूचनाएं हैं, जिसको विधानसभा में पूछा जाएगा। इसके बाद अगर कोई विधानसभा की समितियों का प्रतिवेदन होगा तो वह रखा जाएगा। याचिकाओं का उपस्थापन होगा। ब्रेक के बाद सार्वजनिक हित के विषय पर संकल्प लिए जाएंगे और अंत में विधानसभा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी का समापन भाषण होगा।
जनता के सवालों के नहीं मिल सके जवाब
बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान विपक्ष के तेवर सिर्फ शराब के मुद्दे पर ही आक्रामक नजर आए हैं, जिसके कारण जनता के मुद्दे सदन के अंदर नहीं उठ सके। युवाओं को रोजगार, अपराध, भ्रष्टाचार जैसे जरूरी विषय पर चर्चा ही नहीं हो सकी। सत्र के आखिरी दिन भी इन पर बहस की उम्मीद कम ही है।
