अनिल कुमार, पटना सिटी। आस्था, विश्वास और समर्पण का लंगर गुरुद्वारों में तो दिखता है, लेकिन राजधानी के सबसे बड़े अस्पताल पीएमसीएच में चलने वाला लंगर अपने आम में एक मिसाल है। बाललीला मैनीसंगत के महंथ संत बाबा कश्मीर सिंह भूरिवाले की इस पहल से हर रोज अस्पताल में प्रदेश के दूर-दराज जिलों से आने वाले करीब एक हजार मरीज और उनके स्वजन लाभान्वित होते हैं।

बिहार के प्रतिष्ठित अस्पताल पीएमसीएच में मरीजों के तीमारदारों के लिए लंगर लगाकर सिख समाज ने एक नया आयाम स्थापित किया। सेवादारों में प्रसाद वितरण का जज्बा देखते ही बनता है। इस लंगर की शुरुआत पीएमसीएच में इसी साल 19 मई से हुई, जहां प्रतिदिन 1000 लोग प्रसाद के रूप में भोजन ग्रहण करते हैं। प्रतिदिन सुबह आठ बजे लगे लंगर में मरीज के स्वजनों को पांच प्रसादा (रोटी), चावल, दाल, सब्जी के साथ-साथ स्वच्छ जल मिलता है।

-अरदास के बाद लोग करते हैं प्रसाद के रूप में भोजन, पीते हैं पानी

बाललीला गुरुद्वारा के कारसेवक प्रमुख बाबा गुरविदर सिंह ने बताया कि समस्त लंगर दशमेश गुरु की बाल क्रीड़ा वाले स्थल बाललीला गुरुद्वारा में ही तैयार होता है। 7:30 बजे बड़े बर्तनों में पैक करके वाहन से पीएमसीएच भेजा जाता है। वहां पहले से ही मुकेश कुमार पप्पू पहले आए 250 लोगों को क्रम से टोकन दे चुके होते हैं। प्रतिदिन लंगर का मैन्यू अलग-अलग होता है। हथुआ वार्ड के समीप सुबह आठ बजे वाहन खड़ा कर दिया जाता है। इसके बाद टेबल पर बर्तनों में प्रसादा(रोटी), चावल, दाल, सब्जी रखी जाती है। समाजसेवी सरदार गुरमीत सिंह अरदास करते हैं। उनके साथ-साथ तीन लाइनों में लगे मरीज भी वाहिगुरु का सुमिरन करते हैं। अरदास समाप्त होते ही लाइन में लगे मरीज के परिजन हाथों में बर्तन लिए टेबल के पास पहुंचते हैं और उनकी थाली में पांच प्रसादा (रोटी), चावल, सब्जी या कढ़ी और कटोरा में दाल दी जाती है। अलग-अलग दिनों में पत्ता या फूल गोभी, बादाम, राजमा, सोयाबीन, आलू-मटर की सब्जियां दी जाती हैं। खाना के साथ-साथ दो लीटर स्वच्छ जल भी मरीज के स्वजनों को दिया जाता है।

- बाढ़ के दौरान भी पीएमसीएच में बंटता रहा लंगर

समाजसेवी दीपक लांबा बताते हैं कि जब बारिश से पीएमसीएच का भाग जलमग्न हो गया था उस समय भी प्रतिदिन वाहन से लंगर लाकर वितरण किया गया। इस दौरान लंगर भेजने वाला वाहन खराब हो गया तो दूसरे वाहन से लंगर भेजने की व्यवस्था हुई। प्रतिदिन मरीजों के लंगर में 75 किलो आटा से प्रसादा, 60 किलो चावल से भात, 50 किलो दाल तथा 100 किलो सब्जी बनाकर पीएमसीएच भेजी जाती है।

- बाहरी संगत भी बांटने में करते हैं सहयोग

रविवार को लंगर बांटने में बाललीला गुरुद्वारा के कारसेवकों के अलावा रंजीत सिंह खनूजा, लुधियाना के पलविदर सिंह, सतनाम सिंह, बलजीत सिंह, सज्जन सिंह समेत अन्य थे।

--जात-पात व अंधविश्वास को समाप्त करने के लिए लंगर सेवा शुरू की

तख्त श्री हरिमंदिर प्रबंधक समिति के सदस्य सरदार राजा सिंह तथा बाललीला गुरुद्वारा के बाबा सुखविदर सिंह बताते हैं कि सिखों के प्रथम गुरु नानकदेव को उनके पिता कल्याणचंद उर्फ मेहता कालूजी ने 20 रुपये व्यापार करने के लिए दिए थे। उन्होंने उस 20 रुपये में लोगों को भोजन कराया। पिता जी ने सच्चा सौदा करने की बात कही थी और नानक देव ने भूखे को भोजन कराने की परंपरा का निर्वहन किया। ऊंच-नीच, जात-पात और अंधविश्वास को समाप्त करने के लिए सभी लोगों को एक साथ बैठकर भोजन करने की परंपरा शुरू की। यह भी कहा जाता है कि अकबर बादशाह ने तीसरे गुरु अमरदास से लंगर का इंतजाम करने की बात कही तो गुरु जी ने यह कहते हुए मना कर दिया कि इसमें आपका घमंड है, श्रद्धा तो संगतों के पैसे से आएगी। इसके चलते लंगर सेवा के लिए मिलकर इंतजाम करते हैं।

Posted By: Jagran

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